गुरुवार, 18 सितंबर 2025

बढ़े चलो कविता

 बढ़े चलो


फूल बिछें हों या कांटे हों, राह न अपनी छोड़ो तुम।


चाहे जो विपदायें आयें, मुख को जरा न मोड़ो तुम ।


साथ रहें या रहें न साथी, हिम्मत मगर न छोड़ो तुम ।


नहीं कृपा की भिक्षा मांगो, कर न दीन बन जोड़ो तुम । बस स्वयं पर रखो भरोसा, पाठ प्रेम का पढ़े चलो। जब तक जान बनी हो तन में, तब तक आगे बढ़े चलो।


श्रीनाथ सिंह

शुक्रवार, 22 अगस्त 2025

उर्दू , फारसी , अरबी से शुद्ध हिन्दी शब्द

 🌿 हिन्दी को शुद्ध करने की सूची

उर्दू/फ़ारसी/अरबी से  शुद्ध हिन्दी (संस्कृतनिष्ठ)

1. ज़मीन → भूमि

2. ग़ुस्सा → क्रोध

3. मेहनत → परिश्रम

4. सवाल → प्रश्न

5. जवाब → उत्तर

6. इंसान → मनुष्य

7. किताब → पुस्तक

8. कलम → लेखनी

9. ख्वाब → स्वप्न

10. तक़दीर → भाग्य

11. दुनिया → जगत

12. दोस्त → मित्र

13. दुश्मन → शत्रु

14. मोहब्बत → प्रेम

15. नफ़रत → घृणा

16. मकान → गृह

17. स्कूल → विद्यालय

18. कॉलेज → महाविद्यालय

19. दफ़्तर → कार्यालय

20. अदालत → न्यायालय

21. हुकूमत → शासन

22. क़ानून → विधि

23. हक़ → अधिकार

24. आज़ादी → स्वतंत्रता

25. ग़रीब → दरिद्र

26. अमीर → धनवान

27. रोज़गार → आजीविका

28. काम → कर्म

29. खेल → क्रीड़ा

30. किताबख़ाना → पुस्तकालय

31. इलाज → उपचार

32. बीमारी → रोग

33. डॉक्टर → चिकित्सक

34. दवा → औषधि

35. मास्टर → अध्यापक

36. बाप → पिता

37. माँ → माता

38. बीवी → पत्नी

39. बेटा → पुत्र

40. बेटी → पुत्री

41. रोज़ा → उपवास

42. नमाज़ → प्रार्थना

43. इबादत → उपासना

44. ख़ुशी → प्रसन्नता

45. ग़म → दुःख

46. मौत → मृत्यु

47. ज़िन्दगी → जीवन

48. जन्म → उत्पत्ति

49. आँख → नेत्र

50. कान → कर्ण

51. ज़ुबान → जिह्वा

52. दिल → हृदय

53. ख़ून → रक्त

54. दिमाग़ → मस्तिष्क

55. जिस्म → शरीर

56. हाथ → हस्त

57. पाँव → पाद

58. सर → शिरः

59. बाल → केश

60. रंग → वर्ण

61. तसवीर → चित्र

62. चेहरा → मुख

63. बाज़ार → हाट

64. दुकान → भंडार

65. मुल्क → राष्ट्र

66. शहर → नगर

67. गाँव → ग्राम

68. सड़क → मार्ग

69. रास्ता → पथ

70. वक़्त → समय

71. ज़्यादा → अधिक

72. कम → न्यून

73. मुश्किल → कठिन

74. आसान → सरल

75. पहला → प्रथम

76. आख़िरी → अंतिम

77. हमेशा → सदा

78. कभी-कभी → यदा-कदा

79. कभी नहीं → कदापि नहीं

80. दुबारा → पुनः

81. क़रीब → समीप

82. दूर → दूर

83. बहुत → अत्यधिक

84. थोड़ा → अल्प

85. सच्चा → सत्य

86. झूठा → असत्य

87. अच्छा → उत्तम

88. बुरा → निकृष्ट

89. ताक़त → शक्ति

90. हिम्मत → साहस

91. इज़्ज़त → सम्मान

92. बेइज़्ज़ती → अपमान

93. इन्साफ़ → न्याय

94. ज़ालिम → निर्दयी

95. रहम → दया

96. ग़लती → भूल

97. सही → शुद्ध

98. तालीम → शिक्षा

99. इल्म → ज्ञान

100. अकल → बुद्धि

101. इशारा → संकेत

102. इरादा → संकल्प

103. कोशिश → प्रयास

104. वजह → कारण

105. मक़सद → उद्देश्य

106. हासिल → प्राप्ति

107. मंज़िल → गन्तव्य

108. सफ़र → यात्रा

109. तजुर्बा → अनुभव

110. आदत → स्वभाव

111. अन्दाज़ → शैली

112. तारीख़ → इतिहास

113. तर्जुमा → अनुवाद

114. हक़ीक़त → सत्यता

115. झगड़ा → विवाद

116. लड़ाई → युद्ध

117. दुश्मनी → शत्रुता

118. दोस्ती → मैत्री

119. बर्बाद → विनष्ट

120. आबाद → समृद्ध

121. पैग़ाम → संदेश

122. पैग़म्बर → ऋषि

123. इब्तिदा → आरम्भ

124. इंतिहा → अंत

125. अन्दर → भीतरी

126. बाहर → बाहरी

127. ग़ैर → पराया

128. अपना → स्व

129. पूरा → सम्पूर्ण

130. आधा → अर्ध

131. बराबर → सम

132. अलग → पृथक

133. मिलना → संगम

134. जुदा → पृथक

135. छोटा → लघु

136. बड़ा → विशाल

137. ऊँचा → उन्नत

138. नीचा → अधम

139. साफ़ → स्वच्छ

140. गन्दा → मलिन

141. जल्दी → शीघ्र

142. देर → विलम्ब

143. नया → नवीन

144. पुराना → प्राचीन

145. असली → मौलिक

146. नक़ली → कृत्रिम

147. आम → सामान्य

148. ख़ास → विशेष

149. तरीक़ा → विधि

150. हाल → स्थिति

151. हालात → परिस्थितियाँ

152. शक्ल → रूप

153. सूरत → आकृति

154. क़िस्म → प्रकार

155. क़ीमत → मूल्य

156. तिजारत → व्यापार

157. सौदा → क्रय-विक्रय

158. फ़ायदा → लाभ

159. नुक़सान → हानि

160. ग़रीबी → दरिद्रता

161. दौलत → सम्पत्ति

162. सरमाया → पूँजी

163. तिजोरी → कोषागार

164. तक़रीब → अवसर

165. महफ़िल → सभा

166. जलसा → आयोजन

167. ख़बर → समाचार

168. अख़बार → पत्र |

169. इम्तहान → परीक्षा

170. नतीजा → परिणाम

171. दरख़ास्त → आवेदन

172. अर्ज़ी → निवेदन

173. रिपोर्ट → प्रतिवेदन

174. तफ्सील → विवरण

175. सबक़ → पाठ

176. ग़ज़ल → गीत

177. अफ़साना → कथा

178. क़िस्सा → कहानी

179. तसव्वुर → कल्पना

180. ख़्वाहिश → इच्छा

181. अरमान → आकांक्षा

182. ताज्जुब → आश्चर्य

183. तहरीर → लेख

184. तसल्ली → सांत्वना

185. तक़रीर → भाषण

186. ख़ुत्बा → प्रवचन

187. दुआ → प्रार्थना

188. बरकत → आशीर्वाद

189. रहमत → कृपा

190. बद्दुआ → शाप

191. नेमत → प्रसाद

192. क़सम → शपथ

193. वादा → प्रतिज्ञा

194. ख़ुलूस → निष्ठा

195. सच → सत्य

196. झूठ → असत्य

197. इख़्तिताम → समापन

198. इल्तिजा → विनती

199. ज़रूरत → आवश्यकता

200. मौक़ा → अवसर

201. मशविरा → परामर्श

202. राय → मत

203. ग़ौर → चिन्तन

204. तवज्जो → ध्यान

205. इत्तफ़ाक़ → संयोग

206. नसीहत → उपदेश

207. तर्बियत → प्रशिक्षण

208. मशक़्क़त → कठिनाई

209. आराम → विश्रान्ति

210. राहत → शांति

211. तक़लीफ़ → पीड़ा

212. दर्द → व्यथा

213. तक़रार → विवाद

214. सुलह → समझौता

215. शक → संदेह

216. यक़ीन → विश्वास

217. इमान → श्रद्धा

218. नेकनीयती → सज्जनता

219. ज़ुल्म → अत्याचार

220. ख़ैर → मंगल

221. शरारत → दुष्टता

222. गुनाह → पाप

223. सवाब → पुण्य

224. फ़र्ज़ → कर्तव्य

225. ज़िम्मेदारी → दायित्व

226. इख़्तियार → अधिकार

227. हुक्म → आदेश

228. फ़रमान → आज्ञा

229. नीयत → अभिप्राय

230. क़ाबिल → योग्य

231. नालायक → अयोग्य

232. हुनर → कौशल

233. जहालत → अज्ञानता

234. अदब → शिष्टाचार

235. तहज़ीब → संस्कृति

236. बदतमीज़ी → दुर्व्यवहार

237. तमीज़ → शालीनता

238. शौक़ → रुचि

239. तमन्ना → इच्छा

240. हसरत → लालसा

241. ग़रज़ → प्रयोजन

242. बहाना → अवसर

243. वजूद → अस्तित्व

244. मख़लूक़ → प्राणी

245. ख़िलाफ़ → विरोध

246. हक़ में → समर्थन

247. दख़ल → हस्तक्षेप

248. मदद → सहायता

249. मददगार → सहायक

250. रक़ीब → प्रतिस्पर्धी

251. साथी → सहचर

252. हमसफ़र → सहयात्री

253. मुनाफ़ा → लाभ

254. घाटा → हानि

255. करार → अनुबंध

256. इकरार → स्वीकार

257. इनकार → अस्वीकार

258. अदालत → न्यायालय

259. जमाना → युग

260. तालीफ़ → संकलन

261. इबादतगाह → उपासना-स्थान

262. मज़ार → समाधि

263. क़ब्र → समाधि/समाधिस्थल

264. रस्म → परम्परा

265. तर्ज़ → ढंग

266. हकीम → वैद्य

267. इलाज → उपचार

268. मरीज़ → रोगी

269. तावीज़ → मंत्रिका

270. बदन → काया

271. दौड़ → धावन

272. महबूब → प्रिय

273. अदावत → वैर

274. नफ़्स → अहंकार

275. रूह → आत्मा

276. जन्नत → स्वर्ग

277. जहन्नुम → नरक

278. सब्र → धैर्य

279. शुक्र → कृतज्ञता

280. तक़वा → संयम

281. हलाल → शुद्ध

282. हराम → निषिद्ध

283. शरीअत → धर्मनियम

284. फ़ितरत → प्रकृति

285. अकीदा → आस्था

286. तक़दीर → भाग्य

287. इलाक़ा → क्षेत्र

288. मुक़ाम → स्थान

289. मंज़र → दृश्य

290. नज़ारा → विहंगावलोकन

291. हकीकत → वास्तविकता

292. तहरीक़ → आन्दोलन

293. इंक़लाब → क्रान्ति

294. बग़ावत → विद्रोह

295. हुकूमत → शासन

296. बादशाह → राजा

297. तख़्त → सिंहासन

298. ताज → मुकुट

299. गुलाम → दास

300. आज़ाद → स्वतन्त्र

301. खुशबू → सुगन्ध

302. बदबू → दुर्गन्ध

303. ग़ज़ब → आश्चर्य

304. मंज़ूर → स्वीकृत

305. नामंज़ूर → अस्वीकृत

306. ज़र्रा → कण

307. दरिया → नदी

308. समंदर → सागर

309. किनारा → तट

310. साहिल → तटरेखा

311. ग़रक़ → डूबा

312. तूफ़ान → आंधी/चक्रवात

313. आँधी → धूलिवायु

314. बारिश → वर्षा

315. बादल → मेघ

316. बिजली → विद्युत्

317. चमक → दीप्ति

318. धूप → सूर्यकिरण

319. अंधेरा → तमस्

320. उजाला → प्रकाश

321. सितारा → तारा

322. चाँद → चन्द्र

323. सूरज → सूर्य

324. ज़माना → युग

325. वक़्त → समय

326. सदी → शताब्दी

327. साल → वर्ष

328. महीना → मास

329. हफ़्ता → सप्ताह

330. रोज़ → दिन

331. रात → रात्रि

332. सुबह → प्रातः

333. शाम → सायं

334. दुपहर → मध्यान्ह

335. आधी रात → अर्धरात्रि

336. आरज़ू → आकांक्षा

337. इश्क़ → प्रेम

338. आशिक़ → प्रियकर

339. माशूक़ → प्रेयसी

340. खामोशी → मौन

341. शोर → कोलाहल

342. आवाज़ → ध्वनि

343. चीख़ → चीत्कार

344. रोना → क्रन्दन

345. हँसी → हास्य

346. खेलना → क्रीड़न

347. लिखना → लेखन

348. पढ़ना → अध्ययन

349. देखना → दर्शन

350. सुनना → श्रवण

351. चलना → गमन

352. दौड़ना → धावन

353. गिरना → पतन

354. उठना → उदयन

355. बैठना → उपवेशन

356. सोना → निद्रा

357. जागना → जागरण

358. खाना → आहार

359. पीना → पान

360. बोलना → वाक्

361. सोचना → चिन्तन

362. जानना → अवगति

363. सीखना → अध्ययन

364. पढ़ाना → अध्यापन

365. खिलाना → भोज्यदान

366. पहनना → वस्त्रधारण

367. उतारना → अपगमन

368. सजना → अलंकरण

369. नाचना → नर्तन

370. गाना → गान

371. बजाना → वादन

372. पूछना → प्रश्न करना

373. बताना → कथन

374. सुनाना → श्रवण कराना

375. दिखाना → प्रदर्शन

376. खिलखिलाना → प्रहसन

377. रोशनी → प्रकाश

378. अँधेरा → तम

379. ज्वाला → अग्नि

380. धुआँ → धूम

381. राख → भस्म

382. पत्थर → शिला

383. मिट्टी → मृदा

384. पेड़ → वृक्ष

385. पौधा → तरु

386. फूल → पुष्प

387. फल → फल

388. बीज → बीज

389. पत्ता → पत्र

390. शाख़ → शाखा/डाली

391. जंगल → वन

392. बाग़ → उद्यान

393. खेत → कृषिक्षेत्र

394. घास → तृण

395. झील → सरोवर

396. तालाब → सरः

397. कुआँ → कूप

398. नहर → नाला

399. पुल → सेतु

400. मकसद → प्रयोजन

401. गवाही → साक्ष्य

402. शहादत → प्रमाण

403. वारिस → उत्तराधिकारी

404. जायदाद → सम्पत्ति

405. तक़सीम → विभाजन

406. हिस्सा → अंश

407. वसीयत → इच्छा-पत्र

408. दस्तख़त → हस्ताक्षर

409. मुहर → मोहर/छाप

410. तहरीर → लेख

411. कानून → विधि

412. दंड → दण्ड

413. जुर्माना → अर्थदण्ड

414. गुनाहगार → अपराधी

415. सज़ा → दण्ड

416. जेल → कारागार

417. कैदी → बन्दी

418. पहरेदार → प्रहरक

419. चौकीदार → रक्षक

420. सिपाही → सैनिक

421. फ़ौज → सेना

422. लश्कर → दल

423. हुक्मरान → शासक

424. बादशाह → नरेश

425. मलिका → रानी

426. वज़ीर → मन्त्री

427. अमीर → धनाढ्य

428. गरीब → दरिद्र

429. मजदूर → श्रमिक

430. किसान → कृषक

431. दुकानदार → व्यापारी

432. व्यापारी → वणिक

433. शिक्षक → अध्यापक

434. छात्र → विद्यार्थी

435. औरत → नारी

436. आदमी → पुरुष

437. बच्चा → शिशु

438. बूढ़ा → वृद्ध

439. जवान → तरुण

440. जवान लड़की → तरुणी

441. घर → गृह

442. दरवाज़ा → द्वार

443. खिड़की → झरोखा/जालिका

444. दीवार → भित्ति

445. छत → छज्जा

446. आँगन → प्रांगण

447. कुर्सी → आसन

448. मेज़ → पट्टिका

449. बिस्तर → शय्या

450. तकिया → आसनपृष्ठ

451. कंबल → कंबल/कम्बलम्

452. कपड़ा → वस्त्र

453. जूता → पादुक

454. टोपी → शिरोवस्त्र

455. छाता → छत्र

456. आईना → दर्पण

457. घड़ी → समयसूचक

458. किताब → ग्रन्थ

459. नोटबुक → लेखपुस्तिका

460. पेंसिल → लेखनी

461. पेन → कलम

462. स्याही → मसी/माषि

463. बोर्ड → फलक

464. नक्शा → मानचित्र

465. झंडा → ध्वज

466. चिन्ह → प्रतीक

467. निशान → लक्षण

468. शब्द → पद

469. वाक्य → वाक्य

470. भाषा → भाषा

471. लफ़्ज़ → शब्द

472. अल्फ़ाज़ → पदावली

473. जुमला → वाक्यांश

474. किताबत → लेखन

475. दरख़्त → वृक्ष

476. क़ल्ब → हृदय

477. अहसास → अनुभूति

478. हसरत → आकांक्षा

479. क़दर → मूल्य

480. नफ़ा → लाभ

481. नुक़सान → हानि

482. बयान → वक्तव्य

483. तक़रीर → भाषण

484. हिकमत → नीति

485. दानिश → प्रज्ञा

486. इल्मदार → विद्वान

487. जाहिल → मूर्ख

488. अक्लमन्द → बुद्धिमान

489. पागल → उन्मत्त

490. दीवाना → पागल

491. होश → चेतना

492. बेहोश → अचेत

493. ज़ख़्म → घाव

494. मरहम → लेप

495. इलाज → चिकित्सा

496. नुस्ख़ा → चिकित्साविधान

497. अस्पताल → चिकित्सालय

498. मरीज़ → रोगी

499. डॉक्टर → वैद्य

500. हकीम → आयुर्वेदाचार्य

हिन्दी बोलने का प्रयास करें उर्दू के वे शब्द जो हम प्रतिदिन बोलते है

 #हिन्दी_बोलने_का_प्रयास_करें___

ये वो उर्दू के शब्द जो आप प्रतिदिन 

प्रयोग करते हैं, इन शब्दों को त्याग कर 

मातृभाषा का प्रयोग करें...


  .... #उर्दू         ..#हिंदी

01 ईमानदार       - निष्ठावान

02 इंतजार         - प्रतीक्षा

03 इत्तेफाक       - संयोग

04 सिर्फ            - केवल, मात्र

05 शहीद           - बलिदान

06 यकीन          - विश्वास, भरोसा

07 इस्तकबाल    - स्वागत

08 इस्तेमाल       - उपयोग, प्रयोग

09 किताब         - पुस्तक

10 मुल्क            - देश

11 कर्ज़             - ऋण

12 तारीफ़          - प्रशंसा

13 तारीख          - दिनांक, तिथि

14 इल्ज़ाम         - आरोप

15 गुनाह            - अपराध

16 शुक्रीया          - धन्यवाद, आभार

17 सलाम           - नमस्कार, प्रणाम

18 मशहूर           - प्रसिद्ध

19 अगर             - यदि

20 ऐतराज़          - आपत्ति

21 सियासत        - राजनीति

22 इंतकाम          - प्रतिशोध

23 इज्ज़त           - मान, प्रतिष्ठा

24 इलाका           - क्षेत्र

25 एहसान          - आभार, उपकार

26 अहसानफरामोश - कृतघ्न

27 मसला            - समस्या

28 इश्तेहार          - विज्ञापन

29 इम्तेहान          - परीक्षा

30 कुबूल             - स्वीकार

31 मजबूर            - विवश

32 मंजूरी             - स्वीकृति

33 इंतकाल          - मृत्यु, निधन 

34 बेइज्जती         - तिरस्कार

35 दस्तखत          - हस्ताक्षर

36 हैरानी              - आश्चर्य

37 कोशिश            - प्रयास, चेष्टा

38 किस्मत            - भाग्य

39 फै़सला             - निर्णय

40 हक                 - अधिकार

41 मुमकिन           - संभव

42 फर्ज़                - कर्तव्य

43 उम्र                  - आयु

44 साल                - वर्ष

45 शर्म                 - लज्जा

46 सवाल              - प्रश्न

47 जवाब              - उत्तर

48 जिम्मेदार          - उत्तरदायी

49 फतह               - विजय

50 धोखा               - छल

51 काबिल             - योग्य

52 करीब               - समीप, निकट

53 जिंदगी              - जीवन

54 हकीकत            - सत्य

55 झूठ                  - मिथ्या, असत्य

56 जल्दी                - शीघ्र

57 इनाम                - पुरस्कार

58 तोहफ़ा              - उपहार

59 इलाज               - उपचार

60 हुक्म                 - आदेश

61 शक                  - संदेह

62 ख्वाब                - स्वप्न

63 तब्दील              - परिवर्तित

64 कसूर                 - दोष

65 बेकसूर              - निर्दोष

66 कामयाब            - सफल

67 गुलाम                - दास

68 जन्नत                -स्वर्ग 

69 जहन्नुम             -नर्क

70 खौ़फ                -डर

71 जश्न                  -उत्सव

72 मुबारक             -बधाई/शुभेच्छा

73 लिहाजा़             -इसलीए

74 निकाह             -विवाह/लग्न

75 आशिक            -प्रेमी 

76 माशुका             -प्रेमिका 

77 हकीम              -वैध

78 नवाब               -राजसाहब

79 रुह                  -आत्मा 

80 खु़दकुशी          -आत्महत्या 

81 इज़हार             -प्रस्ताव

82 बादशाह           -राजा/महाराजा

83 ख़्वाहिश          -महत्वाकांक्षा

84 जिस्म             -शरीर/अंग

85 हैवान             -दैत्य/असुर

86 रहम              -दया

87 बेरहम            -बेदर्द/दर्दनाक

88 खा़रिज           -रद्द

89 इस्तीफ़ा          -त्यागपत्र 

90 रोशनी            -प्रकाश 

91मसीहा             -देवदुत

92 पाक              -पवित्र

93 क़त्ल              -हत्या 

94 कातिल           -हत्यारा

95 मुहैया             - उपलब्ध

96 फ़ीसदी           - प्रतिशत

97 कायल           - प्रशंसक

98 मुरीद             - भक्त

99 कींमत           - मूल्य (मुद्रा में)

100 वक्त            - समय

101 सुकून        - शाँति

102 आराम       - विश्राम

103 मशरूफ़    - व्यस्त

104 हसीन       - सुंदर

105 कुदरत      - प्रकृति

106 करिश्मा    - चमत्कार

107 इजाद       - आविष्कार

108 ज़रूरत     - आवश्यक्ता

109 ज़रूर       - अवश्य

110 बेहद        - असीम

111 तहत       - अनुसार


इनके अतिरिक्त हम प्रतिदिन अनायास ही अनेक उर्दू शब्द प्रयोग में लेते हैं, कारण है ये बाॅलिवुड और मीडिया जो एक इस्लामी षड़यंत्र के अनुसार हमारी मातृभाषा पर ग्रहण लगाते आ रहे हैं।


हिन्दी हमारी राजभाषा एवं मातृभाषा हैं 

इसका सम्मान करें, 

भाषा बचाईये, संस्कृति बचाईये।ll

🙏🙏🙏

शुक्रवार, 8 अगस्त 2025

मांग का नियम । Law of demand

 मांग का नियम (Law of Demand) अर्थशास्त्र का एक मूलभूत सिद्धांत है। यह बताता है कि अन्य बातें समान रहने पर (ceteris paribus), किसी वस्तु की कीमत और उसकी मांगी गई मात्रा (quantity demanded) के बीच विपरीत (inverse) संबंध होता है।

इसका मतलब है:

 * जब किसी वस्तु की कीमत बढ़ती है, तो उसकी मांग घटती है।

 * जब किसी वस्तु की कीमत घटती है, तो उसकी मांग बढ़ती है।

यह सिद्धांत इस सहज मानवीय व्यवहार पर आधारित है कि उपभोक्ता कम कीमत पर अधिक वस्तुएं खरीदना पसंद करते हैं, क्योंकि उनकी क्रय शक्ति बढ़ जाती है। इसके विपरीत, जब कीमत बढ़ जाती है, तो वे उस वस्तु की कम मात्रा खरीदते हैं या उसके विकल्प (substitutes) की ओर मुड़ जाते हैं।

"अन्य बातें समान रहने पर" (Ceteris Paribus)

इस नियम में यह शर्त बहुत महत्वपूर्ण है। इसका मतलब है कि कीमत के अलावा अन्य सभी कारक जो मांग को प्रभावित करते हैं, जैसे:

 * उपभोक्ता की आय

 * उपभोक्ता की पसंद और प्राथमिकताएं

 * संबंधित वस्तुओं (जैसे स्थानापन्न और पूरक वस्तुएं) की कीमतें

 * भविष्य में कीमत में बदलाव की उम्मीद

 * जनसंख्या का आकार

...ये सभी स्थिर रहते हैं। अगर इनमें से कोई भी कारक बदलता है, तो मांग का नियम पूरी तरह से लागू नहीं हो पाएगा।

मांग के नियम के अपवाद

कुछ विशेष परिस्थितियों में मांग का नियम लागू नहीं होता है। इन अपवादों में, कीमत बढ़ने पर भी मांग घटती नहीं है, बल्कि बढ़ सकती है, या कीमत घटने पर भी मांग घट सकती है। ये अपवाद हैं:

 * गिफ़ेन वस्तुएं (Giffen Goods): ये बहुत निम्न-गुणवत्ता वाली वस्तुएं होती हैं। जब इनकी कीमत घटती है, तो उपभोक्ता अपनी बढ़ी हुई वास्तविक आय का उपयोग बेहतर वस्तुओं (जैसे मांस) को खरीदने में करते हैं, जिससे गिफ़ेन वस्तुओं की मांग घट जाती है।

 * प्रतिष्ठा की वस्तुएं (Veblen Goods): इन्हें दिखावे या स्टेटस सिंबल के लिए खरीदा जाता है, जैसे लक्जरी कारें, हीरे, महंगे ब्रांडेड कपड़े। इन वस्तुओं की कीमत जितनी अधिक होती है, इनकी मांग उतनी ही अधिक होती है, क्योंकि लोग इन्हें अपनी सामाजिक स्थिति को दर्शाने के लिए खरीदते हैं।

 * भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद: अगर किसी उपभोक्ता को लगता है कि भविष्य में किसी वस्तु (जैसे पेट्रोल, सोना) की कीमत और भी बढ़ जाएगी, तो वे वर्तमान में कीमत बढ़ने पर भी उसकी अधिक मात्रा खरीदना शुरू कर देते हैं।

 * अनिवार्य वस्तुएं (Essential Goods): जीवन के लिए आवश्यक वस्तुओं (जैसे नमक, दवाइयां) की मांग उनकी कीमत से बहुत कम प्रभावित होती है। कीमत बढ़ने पर भी लोग इनकी उतनी ही मात्रा खरीदते रहते हैं, क्योंकि इनके बिना उनका काम नहीं चल सकता।

 * उपभोक्ता की अज्ञानता: अगर कोई उपभोक्ता वस्तु की गुणवत्ता का अनुमान उसकी कीमत से लगाता है, तो वह महंगी वस्तु को बेहतर मानकर खरीद सकता है, भले ही सस्ती वस्तु समान हो।


पूर्ति का नियम ।। Law of supply

 पूर्ति का नियम अर्थशास्त्र का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। यह बताता है कि अन्य बातें समान रहने पर, किसी वस्तु की कीमत और उसकी पूर्ति (supply) के बीच सीधा (positive) संबंध होता है।

इसका सीधा सा मतलब है कि:

 * जब किसी वस्तु की कीमत बढ़ती है, तो उत्पादक (या विक्रेता) उस वस्तु की अधिक मात्रा बाजार में बेचने के लिए तैयार होते हैं।

 * जब किसी वस्तु की कीमत घटती है, तो उत्पादक उसकी कम मात्रा बाजार में बेचने के लिए तैयार होते हैं।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उत्पादक का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है। जब कीमत बढ़ती है, तो उन्हें प्रति इकाई अधिक लाभ मिलता है, जिससे वे अधिक उत्पादन और बिक्री करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। इसके विपरीत, जब कीमत घटती है, तो लाभ कम हो जाता है, और वे कम उत्पादन करते हैं।

"अन्य बातें समान रहने पर" का मतलब (Ceteris Paribus)

पूर्ति के नियम में यह शर्त बहुत महत्वपूर्ण है। इसका मतलब है कि कीमत के अलावा अन्य सभी कारक जैसे:

 * उत्पादन की लागत (कच्चे माल, मजदूरी)

 * उत्पादन की तकनीक

 * संबंधित वस्तुओं की कीमतें

 * भविष्य में कीमत बढ़ने या घटने की संभावना

 * सरकारी नीतियाँ (जैसे कर, सब्सिडी)

...ये सभी स्थिर रहते हैं। यदि इनमें से कोई भी कारक बदलता है, तो पूर्ति के नियम का प्रभाव भी बदल सकता है।

पूर्ति के नियम के अपवाद

कुछ विशेष परिस्थितियों में यह नियम लागू नहीं होता है। इन्हें पूर्ति के नियम के अपवाद कहा जाता है, जैसे:

 * कृषि उत्पाद: इनकी पूर्ति अक्सर मौसम और प्रकृति पर निर्भर करती है, न कि कीमत पर। अगर सूखा पड़ जाए, तो कीमत बढ़ने पर भी पूर्ति नहीं बढ़ाई जा सकती।

 * नाशवान वस्तुएं: फल, सब्जियां, दूध जैसी वस्तुएं जल्दी खराब हो जाती हैं। इसलिए, विक्रेता को कम कीमत पर भी इन्हें बेचना पड़ता है, ताकि नुकसान से बचा जा सके।

 * भविष्य में कीमत बढ़ने की संभावना: अगर उत्पादकों को लगता है कि भविष्य में किसी वस्तु की कीमत और भी बढ़ने वाली है, तो वे वर्तमान में कीमत बढ़ने पर भी उसे बेचेंगे नहीं, बल्कि स्टॉक करके रखेंगे।

 * कलात्मक और दुर्लभ वस्तुएं: प्रसिद्ध कलाकृतियाँ या दुर्लभ सिक्कों की संख्या सीमित होती है। कीमत कितनी भी बढ़ जाए, इनकी पूर्ति को बढ़ाया नहीं जा सकता।


बुधवार, 6 अगस्त 2025

सेंसर बोर्ड क्या होता है?

 सेंसर बोर्ड, जिसे आधिकारिक तौर पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (Central Board of Film Certification - CBFC) कहा जाता है, भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण निकाय है। इसका मुख्य काम यह सुनिश्चित करना है कि भारत में रिलीज होने वाली कोई भी फिल्म या टीवी कार्यक्रम सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त है या नहीं।

सेंसर बोर्ड के मुख्य कार्य

सेंसर बोर्ड का काम सिर्फ फिल्मों में से दृश्य या संवाद हटाना नहीं है, बल्कि उसके कई और महत्वपूर्ण काम हैं:

 * फिल्मों को प्रमाणित करना: सेंसर बोर्ड किसी भी फिल्म को उसकी सामग्री के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में सर्टिफिकेट देता है। ये सर्टिफिकेट बताते हैं कि फिल्म किस उम्र के दर्शकों के लिए उपयुक्त है।

 * प्रमाणन के प्रकार:

   * U (यूनिवर्सल): इसका मतलब है कि फिल्म सभी आयु वर्ग के लोग देख सकते हैं।

   * U/A (यूनिवर्सल/अडल्ट): इस तरह की फिल्मों को 12 साल से कम उम्र के बच्चे अपने माता-पिता के मार्गदर्शन में देख सकते हैं।

   * A (अडल्ट): ये फिल्में सिर्फ 18 साल या उससे ज़्यादा उम्र के दर्शक देख सकते हैं।

   * S (स्पेशल): ये सर्टिफिकेट सिर्फ खास तरह के दर्शकों के लिए होता है, जैसे डॉक्टर या वैज्ञानिक।

 * आपत्तिजनक सामग्री को हटाना: बोर्ड फिल्म के कंटेंट को ध्यान से देखता है और अगर उन्हें लगता है कि कोई दृश्य या संवाद समाज के लिए आपत्तिजनक, हिंसा को बढ़ावा देने वाला, या किसी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला है, तो वे उसे हटाने या संशोधित करने की सलाह देते हैं।

 * कानून का पालन सुनिश्चित करना: सेंसर बोर्ड यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी फिल्म सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 और उसके तहत बनाए गए नियमों का पालन करती है। बिना सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट के कोई भी फिल्म भारत में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की जा सकती।

संक्षेप में, सेंसर बोर्ड एक प्रहरी की तरह काम करता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि फिल्मों के जरिए जो सामग्री समाज तक पहुँच रही है, वह सुरक्षित और उपयुक्त हो।


मंगलवार, 5 अगस्त 2025

KYC क्या होता है?

 KYC का मतलब "Know Your Customer" है, जिसे हिंदी में "अपने ग्राहक को जानें" कहते हैं। यह एक अनिवार्य प्रक्रिया है जिसका पालन बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि वे किसी व्यक्ति की पहचान और पते की जानकारी सत्यापित कर रहे हैं।

यह प्रक्रिया वित्तीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को वैध बनाना) और आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण (financing) को रोकने में मदद करती है।

KYC में क्या-क्या शामिल होता है?

KYC प्रक्रिया में आम तौर पर ग्राहक से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ जमा करने के लिए कहा जाता है, जो उसकी पहचान और पते को प्रमाणित करते हैं। इन दस्तावेज़ों को दो श्रेणियों में बांटा जाता है:

 * पहचान का प्रमाण (Proof of Identity): यह दस्तावेज़ आपकी पहचान की पुष्टि करते हैं। इनमें शामिल हैं:

   * पैन कार्ड (PAN Card)

   * आधार कार्ड (Aadhaar Card)

   * पासपोर्ट

   * ड्राइविंग लाइसेंस

   * मतदाता पहचान पत्र (Voter ID Card)

 * पते का प्रमाण (Proof of Address): यह दस्तावेज़ आपके आवासीय पते की पुष्टि करते हैं। इनमें शामिल हैं:

   * आधार कार्ड (यदि पते के लिए उपयोग किया जा रहा है)

   * पासपोर्ट

   * मतदाता पहचान पत्र

   * बिजली या पानी का बिल (जो 3 महीने से ज्यादा पुराना न हो)

   * बैंक स्टेटमेंट

   * रेंट एग्रीमेंट (किराये का समझौता)

KYC क्यों जरूरी है?

KYC की प्रक्रिया कई कारणों से महत्वपूर्ण है:

 * धोखाधड़ी से बचाव: यह सुनिश्चित करता है कि खाता असली व्यक्ति द्वारा खोला गया है, न कि किसी धोखेबाज द्वारा।

 * कानूनी आवश्यकता: यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य नियामक संस्थाओं द्वारा बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के लिए एक कानूनी आवश्यकता है।

 * सुरक्षा: KYC आपके खातों को अधिक सुरक्षित बनाता है। यदि कोई अवैध लेनदेन होता है, तो बैंक आसानी से जिम्मेदार व्यक्ति का पता लगा सकते हैं।

 * सेवाओं का लाभ: बैंक खाता खोलने, म्यूचुअल फंड में निवेश करने, बीमा पॉलिसी खरीदने या ऑनलाइन वॉलेट का उपयोग करने जैसी कई वित्तीय सेवाओं के लिए KYC पूरा करना अनिवार्य है।

E-KYC क्या है?

आजकल, कागजी दस्तावेज़ों के बजाय, E-KYC (Electronic Know Your Customer) का उपयोग भी किया जाता है। इसमें आधार कार्ड के बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (biometric authentication) या OTP के माध्यम से तुरंत पहचान और पते का सत्यापन किया जाता है। यह प्रक्रिया को तेज और अधिक सुविधाजनक बनाता है।


IMPS क्या होता है?

 IMPS का मतलब Immediate Payment Service (इमीडिएट पेमेंट सर्विस) है, जिसे हिंदी में "तत्काल भुगतान सेवा" कहते हैं। यह भारत में बैंकों के बीच फंड ट्रांसफर करने का एक डिजिटल तरीका है।

यह सुविधा नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा शुरू की गई थी। IMPS की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 24x7 उपलब्ध है, यानी आप कभी भी, किसी भी समय, छुट्टियों के दिन भी तुरंत पैसे भेज और प्राप्त कर सकते हैं।

IMPS की मुख्य विशेषताएं

 * रियल-टाइम ट्रांसफर: IMPS के जरिए पैसे भेजते ही तुरंत दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में पहुँच जाते हैं।

 * 24x7 उपलब्धता: यह सेवा साल के 365 दिन, हर समय उपलब्ध रहती है, जिसमें बैंक की छुट्टियाँ भी शामिल हैं।

 * सुरक्षित: यह एक सुरक्षित माध्यम है और इसमें OTP (वन टाइम पासवर्ड) जैसी सुरक्षा सुविधाएँ होती हैं।

 * विभिन्न तरीके: आप IMPS का उपयोग कई तरीकों से कर सकते हैं:

   * मोबाइल नंबर और MMID: इसके लिए आपको लाभार्थी (जिसे पैसे भेजने हैं) का मोबाइल नंबर और 7 अंकों का MMID (मोबाइल मनी आइडेंटिफ़ायर) चाहिए होता है।

   * खाता नंबर और IFSC कोड: आप लाभार्थी के बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड का उपयोग करके भी पैसे भेज सकते हैं।

 * लेनदेन की सीमा: IMPS के जरिए एक दिन में ₹5 लाख तक का लेनदेन किया जा सकता है, हालाँकि, यह सीमा आपके बैंक पर भी निर्भर कर सकती है।

IMPS, NEFT और RTGS में अंतर

IMPS को अक्सर NEFT (National Electronic Funds Transfer) और RTGS (Real Time Gross Settlement) से तुलना की जाती है। इन तीनों में मुख्य अंतर नीचे दिए गए हैं:

 * IMPS: तुरंत फंड ट्रांसफर करता है, 24x7 उपलब्ध है, और छोटे से लेकर बड़े अमाउंट तक के लिए इस्तेमाल होता है।

 * NEFT: यह बैच (Batch) में काम करता है, इसलिए पैसे ट्रांसफर होने में कुछ समय लग सकता है। यह आमतौर पर बैंक के वर्किंग घंटों के दौरान उपलब्ध होता है।

 * RTGS: यह भी रियल-टाइम में पैसे ट्रांसफर करता है, लेकिन इसका उपयोग आमतौर पर बड़ी रकम (₹2 लाख या उससे ज़्यादा) के लिए होता है। यह भी बैंक के वर्किंग घंटों के दौरान ही उपलब्ध होता है।


NPCI क्या होता है?

 NPCI का मतलब नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India) है। यह भारत में रिटेल पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम्स को मैनेज करने वाली एक संस्था है।

NPCI से जुड़ी कुछ अहम बातें:

 * स्थापना: इसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और इंडियन बैंक्स' एसोसिएशन (IBA) की पहल पर 2008 में स्थापित किया गया था।

 * उद्देश्य: इसका मुख्य काम भारत में एक सुरक्षित, मजबूत और कुशल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है।

 * गैर-लाभकारी संगठन: NPCI एक गैर-लाभकारी संगठन (Not-for-Profit) के रूप में काम करता है।

 * मुख्य उत्पाद: NPCI ने कई लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

   * यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI): एक रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम जो तुरंत बैंकों के बीच फंड ट्रांसफर की सुविधा देता है।

   * रुपे (RuPay): भारत का अपना कार्ड पेमेंट नेटवर्क।

   * इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS): 24/7 तुरंत फंड ट्रांसफर करने की सेवा।

   * नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH): सैलरी, पेंशन और बिल पेमेंट जैसे बड़े ट्रांजैक्शन के लिए एक बल्क पेमेंट सिस्टम।

   * नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC): FASTag के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक टोल पेमेंट की सुविधा।

   * भारत बिलपे (BBPS): बिल पेमेंट के लिए एक एकीकृत (integrated) प्लेटफार्म।


रविवार, 6 जुलाई 2025

केंचुआ खेती के लाभ

 दोस्तो आज केंचुए के बारे में यहां कुछ बाते आपको बताने जा रहा हु  और उसके लाभ के  अलावा भी खेती में केंचुए के कई और भी फ़ायदे हैं जिनको आप आज जानेंगे 


मिट्टी की संरचना में सुधार: केंचुए मिट्टी को ढीला करते हैं और मिलाते हैं, जिससे मिट्टी की संरचना और जल निकासी में सुधार होता है. इससे कटाव और बाढ़ को रोकने में मदद मिलती है. 

 

पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है: केंचुए पौधों के मलबे और मिट्टी खाते हैं, जिससे मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ जाती है. 

 

खाद तैयार करते हैं: केंचुए खेत में मौजूद कार्बनिक पदार्थों को खाकर अच्छी गुणवत्ता वाली खाद तैयार करते हैं. इस खाद को वर्मीकॉम्पोस्ट कहते हैं. 

 

ट्रैक्टर से भी अच्छी जुताई करते हैं: केंचुए खेत में ट्रैक्टर से भी अच्छी जुताई कर देते हैं. 

 

मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता बढ़ाते हैं: केंचुओं से मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता बढ़ती है. 

 

बैक्टीरिया, शैवाल, प्रोटोजोआ, एक्टिनाइमिसिटी आदि की वृद्धि में मदद मिलती है. 

 

केंचुआ खाद से फसलों की उपज में 15-20% तक की वृद्धि होती है. 


यह खेत में दीमक एवं अन्य हानिकारक कीटों को नष्ट कर देता हैं। इससे कीटनाशक की लागत में कमी आती हैं। इसके उपयोग के बाद 2-3 फसलों तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनी रहती हैं। मिट्टी में केचुओं की सक्रियता के कारण पौधों की जड़ों के लिए उचित वातावरण बना रहता हैं, जिससे उनका सही विकास होता हैं।


दोस्तो आज की ये स्टोरी आपको कैसा लगा अपने कमेंट जरूर लिखें।

साभार 🙏

भारतीय संविधान के भाग

 Gs by Kiran kumar  sir 💐

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🟦 भारतीय संविधान के भाग ✍


♦️भारतीय संविधान के 22 भाग है


◾️भाग 1 - संघ और उनका राज्यक्षेत्र


◾️भाग 2 - नागरिकता


◾️भाग 3 -  मूल अधिकार


◾️भाग 4 - राज्य की नीति के निर्देशक तत्व

🔺4 (क) मूल कर्तव्य


◾️भाग 5 - संघ


◾️भाग 6 - राज्य


◾️भाग 7 - निकाल दिया गया निरस्त कर दिया गया


◾️भाग 8 - संघ राज्य क्षेत्र


◾️भाग 9 - पंचायत


🔺9 (क) नगर पालिकाए

🔺9 (ख) सहकारी समितियां


◾️भाग - 10 - अनुसूचित जाति, जनजातीय क्षेत्र 


◾️भाग 11 - संघ और राज्यों के बीच संबंध


◾️भाग - 12 - वित्त, संपत्ती, संविदाए और वाद


◾️भाग - 13 - भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम


◾️भाग - 14 - संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं

🔺14 (क) अधिकरण


◾️भाग 15 - निर्वाचन


◾️भाग 16 - कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध


◾️भाग 17 - राज्य भाषा


◾️भाग 18 - आपात उपबंध


◾️भाग 19 - प्रकीर्ण


◾️भाग 20 - संविधान का संशोधन


◾️भाग 21 - अस्थाई, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध


◾️भाग 22 - संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिंदी में प्राधिकृत पाठ और निरसन

आर्थिक सम्वृद्धि की परिभाषाएं

 


■ 2. आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth)

आर्थिक संवृद्धि से अभिप्राय आय अथवा उत्पादन में होने वाली दीर्घकालीन वृद्धि से है। आय अथवा उत्पादन के मूल्य में वृद्धि तब हो सकती है। 

(i) जब वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि हो तथा वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें स्थिर (Constant) रहे।

(ii) जब वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों में वृद्धि हो और वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन स्थिर (Constant) रहे। 'आर्थिक

संवृद्धि' से अभिप्राय पहले प्रकार के उत्पादन के मूल्य (Value of Output) में वृद्धि से है अर्थात् वह मूल्य (Value) जो बस्तुओं

तथा सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि के फलस्वरूप संभव होता है, जबकि वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमत स्थिर रहती हैं। इस प्रकार की संवृद्धि को ही वास्तविक संवृद्धि (Real Growth) कहा जाता है। इसका तात्पर्य है देश में वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रवाह में वृद्धि (It) implies increase in the flow of goods and services) | यदि देश की जनसंख्या स्थिर (Constant ) रहती है तब वास्तविक संवृद्धि का अर्थ है प्रतिब्यक्ति के लिए देश में वस्तुओं तथा सेवाओं की अधिक उपलब्धता।

■ परिभाषा ( Definition)

प्रो. मायर के अनुसार, "आर्थिक संवृद्धि वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी देश की प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में

दीर्घकालीन वृद्धि होती है।" (Economic growth may be defined as the process whereby the real per capita

income of the country increases over a long period of time - Meier)

प्रो. सालवाटोर के शब्दों में, "आर्थिक संवृद्धि वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी देश की प्रतिव्यक्ति उत्पादकता

निरन्तर बढ़ने के फलस्वरूप दीर्घकाल तक के लिए उस देश को प्रतिव्यक्ति वास्तविक कुल राष्ट्रीय आय उत्पाद में वृद्धि होती

है अथवा प्रतिव्यक्ति उत्पादकता में निरन्तर वृद्धि होने से आय में दीर्घकालीन वृद्धि होती है।" (Economic growth has been defined as the process whereby a country's real per capita gross national product (GNP) or

income increase over a sustained period of time through continuing increase in per capita productivity. Salvatore)

प्रो. पीटरसन के अनुसार, "आर्थिक संवृद्धि से अभिप्राय है वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रतिव्यक्ति वास्तविक उत्पादन में समय के साथ-साथ वृद्धि हो तथा अर्थव्यवस्था की वस्तुओं तथा सेवाओं की उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो।" (Economic growth involves an increase in overtime in the per capital actual output of goods and services as well

as an increase in the economy's capability to produce goods and services. - Peterson)

उपरोक्त परिभागओं के अनुसार आर्थिक संवृद्धि यह प्रक्रिया है जिसके फलस्वरूप देश में प्रतिव्यक्ति वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन प्रतिव्यक्ति वास्तविक कुल राष्ट्रीय उत्पाद अथवा प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में दीर्घकालीन वृद्धि होती है। इस संदर्भ में

निम्नलिखित बातों का स्पष्टीकरण आवश्यक है:

(i) वस्तुओं के परिमाण में होने वाली आकस्मिक वृद्धि (Occasional rise in the volume of output) को आर्थिक संवृद्धि नहीं कहा जा सकता। उदाहरण के लिए मान लो, किसी वर्ष, अच्छी वर्षा के कारण, कृषि उत्पादन में तो (उस विशेष वर्ष) वृद्धि हो जाती है, परन्तु आगामी वर्षों में कृषि उत्पादन कम हो जाता है तो इसे आर्थिक संवृद्धि नहीं कहा जाएगा। अतएव संवृद्धि की धारणा परिवर्तन के उस प्रवृत्ति पथ (Trend Path) को व्यक्त करती है जो समय के साथ-साथ वृद्धि की ओर अग्रसर हो, बेशक बीच में उत्पादन में थोड़ी-बहुत आकस्मिक गिरावट हो अथवा न हो।


शनिवार, 1 मार्च 2025

वर्तमान में अध्यक्ष और आयुक्त

 वर्तमान समय में आयुक्त या अध्यक्ष:



◽नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ::  संजय मूर्ति
◽मुख्य सूचना आयुक्त :: हीरालाल सामरिया

◽मुख्य चुनाव आयुक्त :: ज्ञानेश कुमार

◽ लोकसभा अध्यक्ष :: ओम बिरला
◽ राज्य सभा :: जगदीप धनखड़

◽चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया::  संजीव खन्ना


◽राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के प्रथम अध्यक्ष::  जस्टिस बालचंद्रन (बालकृष्ण ईराड़ी)

◽16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष :: अरविंद पनगढ़िया

◽वर्तमान में महान्यायवादी :: आर.वेंकटरमनी
◽राष्ट्रीय महिला आयोग:: विजय रहाटकर
◽राष्ट्रीय मानवअधिकार आयोग :: न्यायमूर्ति वी. रामा सुब्रह्मण्यम
◽राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग :: इकबाल सिंह लालपुरा

◽प्रथम लोकपाल:: पिनाकी चंद्र घोष
◽वर्तमान लोकपाल :: जस्टिस खानविलकर

 👉 भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ( सेबी ) के नये अध्यक्ष ::  तुहिन कांत पाण्डे

शनिवार, 15 फ़रवरी 2025

उत्पत्ति के आधार पर शब्द के भेद

 📚उत्पत्ति के आधार पर शब्द के भेद

उत्पत्ति के आधार पर शब्द के चार भेद होते हैं:
1. तत्सम शब्द
2. तद्भव शब्द
3. देशज शब्द
4. विदेशी शब्द

📚तत्सम शब्द :
तत् (उसके) + सम (समान) यानी ऐसे शब्द जिनकी उत्पत्ति संस्कृत भाषा में हुई ओर वे हिन्दी भाषा में बिना किसी परिवर्तन के प्रयोग में आने लगे, ऐसे शब्द तत्सम शब्द कहलाते हैं। जैसे: पुष्प, पुस्तक, पृथ्वी, क्षेत्र, कार्य, मृत्यु, कवि, माता, विद्या, नदी, फल, अग्नि, पुस्तक आदि।

📚तद्भव शब्द
ऐसे शब्द जिनकी उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई थी लेकिन वो रूप बदलकर हिन्दी में आ गए हों, ऐसे शब्द तद्भव शब्द कहलायेंगे। जैसे:
दुग्ध → दूध
अग्नि → आग
कार्य → काम
कर्पूर → कपूर
हस्त → हाथ

📚देशज शब्द
ऐसे शब्द जो भारत की विभिन्न स्थानीय बोलियों में से हिंदी में आ गए हैं, वे शब्द देशज शब्द कहलाते हैं। जैसे: पेट, डिबिया, लोटा, पगड़ी, थैला, इडली, डोसा, समोसा, चमचम, गुलाबजामुन, लड्डु, खटखटाना, खिचड़ी आदि। 
दिए गए सभी उदाहरण भारत की ही विभिन्न स्थानीय बोलियों में से क्षेत्रीय प्रभाव के कारण परिस्थिति व आवश्यकतानुसार बनकर प्रचलित हो गए हैं। ये अब हिन्दी में आ गए हैं। अतः यह शब्द देशज शब्द कहलायेंगे।

📚विदेशी शब्द
ऐसे शब्द जो भारत से बाहर की भाषाओं से हैं लेकिन ज्यों के त्यों हिन्दी में प्रयुक्त हो गए, वे शब्द विदेशी शब्द कहलाते हैं। मुख्यतः यह विदेशी जातियों से हमारे बढ़ते मिलन से हुआ है। ये विदेशी शब्द उर्दू, अरबी, फारसी,अंग्रेजी, पुर्तगाली, तुर्की, फ्रांसीसी, ग्रीक आदि भाषाओं से आए हैं। 
विदेशी शब्दों के उदाहरण निम्न हैं :
अंग्रेजी : कॉलेज, पैंसिल, रेडियो, टेलीविजन, डॉक्टर, लैटरबक्स, पैन, टिकट, मशीन, सिगरेट, साइकिल आदि
फारसी : अनार,चश्मा, जमींदार, दुकान, दरबार, नमक, नमूना, बीमार, बरफ, रूमाल, आदमी, चुगलखोर, आदि। 
अरबी : औलाद, अमीर, कत्ल, कलम, कानून, खत, फकीर, रिश्वत, औरत, कैदी, मालिक, गरीब आदि। 
तुर्की : कैंची, चाकू, तोप, बारूद, लाश, दारोगा, बहादुर आदि। 
पुर्तगाली : अचार, आलपीन, कारतूस, गमला, चाबी, तिजोरी, तौलिया, फीता, साबुन, तंबाकू, कॉफी, कमीज आदि। 
फ्रांसीसी : पुलिस, कार्टून, इंजीनियर, कर्फ्यू, बिगुल आदि। 
चीनी : तूफान, लीची, चाय, पटाखा आदि। 
यूनानी : टेलीफोन, टेलीग्राफ, ऐटम, डेल्टा आदि। 
जापानी : रिक्शा आदि।

संज्ञा की परिभाषा एवं संज्ञा के प्रकार

 ✅ संज्ञा


संज्ञा की परिभाषा

किसी भी व्यक्ति, वस्तु, जाति, भाव या स्थान के नाम को ही संज्ञा कहते हैं। जैसे – मनुष्य (जाति), अमेरिका, भारत (स्थान), बचपन, मिठास(भाव), किताब, टेबल(वस्तु) आदि।

संज्ञा के भेद

संज्ञा के तीन मुख्य भेद होते हैं: (कुल पांच भेद होते है )

1.व्यक्तिवाचक संज्ञा

2.भाववाचक संज्ञा

3.जातिवाचक संज्ञा
जातिवाचक संज्ञा के दो उपभेद माने जाते है ।

(अ)द्रव्यवाचक संज्ञा
(ब) समूहवाचक या समुदायवाचक संज्ञा

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा

जो शब्द केवल एक व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराते हैं उन शब्दों को व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- भारत, चीन (स्थान), किताब, साइकिल (वस्तु), सुरेश,रमेश (व्यक्ति) आदि।

व्यक्तिवाचक संज्ञा के अन्य उदाहरण

रमेश बाहर खेल रहा है।

महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट खेलते हैं।

मैं भारत में रहता हूँ।

महाभारत एक महान ग्रन्थ है।

अमिताभ बच्चन कलाकार हैं।

ऊपर दिए गए वाक्यों में रमेश, महेंद्र सिंह धोनी, भारत, महाभारत, व अमिताभ बच्चन संज्ञा शब्द कहलायेंगे क्योंकि ये शब्द किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराते हैं।


2. जातिवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान की संपूर्ण जाति का बोध कराते हैं, उन शब्दों को जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- मोबाइल, टीवी (वस्तु), गाँव, स्कूल (स्थान), आदमी, जानवर (प्राणी) आदि।

जातिवाचक संज्ञा के अन्य उदाहरण

स्कूल में बच्चे पढ़ते हैं।

बिल्ली चूहे खाती है।

पेड़ों पर पक्षी बैठे हैं।

ऊपर दिए गए वाक्यों में बच्चे, चूहे, पक्षी जातिवाचक संज्ञा शब्द कहलायेंगे क्योंकि ये किसी विशेष बच्चे या पक्षी का बोध न कराकर सभी बच्चो व पक्षियों का बोध करा रहे हैं।


3. भाववाचक संज्ञा

जो शब्द किसी चीज़ या पदार्थ की अवस्था, दशा या भाव का बोध कराते हैं, उन शब्दों को भाववाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- बचपन, बुढ़ापा, मोटापा, मिठास आदि।

भाववाचक संज्ञा के उदाहरण

ज्यादा दोड़ने से मुझे थकान हो जाती है।

लगातार परिश्रम करने से सफलता मिलेगी।

ऊपर दिए गए वाक्यों में थकान से थकने का भाव व सफलता से सफल होने का भाव व्यक्त हो रहा है इसलिए ये भाववाचक संज्ञा शब्द हैं।


4. द्रव्यवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी धातु या द्रव्य का बोध करते हैं, द्रव्यवाचक संज्ञा कहलाते हैं।  जैसे- कोयला, पानी, तेल, घी आदि।

द्रव्यवाचक संज्ञा के उदाहरण

मेरे पास सोने के आभूषण हैं।

एक किलो तेल लेकर आओ।

मुझे दाल पसंद है।

ऊपर दिए गए वाक्यों में सोने, तेल और दाल शब्दों से किसी द्रव्य का बोध हो रहा है इसलिए ये द्रव्यवाचक संज्ञा कहलाते हैं।



5. समुदायवाचक संज्ञा

जिन संज्ञा शब्दों से किसी भी व्यक्ति या वस्तु के समूह का बोध होता है, उन शब्दों को समूहवाचक या समुदायवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- भीड़, पुस्तकालय, झुंड, सेना आदि।

समुदायवाचक संज्ञा के उदाहरण

भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी सेना है।

कल बस स्टैंड पर भीड़ जमा हो गयी।

मेरे परिवार में चार सदस्य हैं।

ऊपर दिए गए वाक्यों में सेना, भीड़ व परिवार एक समूह का बोध करा रहे हैं इसलिए ये समुदायवाचक संज्ञा कहलायेंगे।

पानी से पहले पुल ( कविता )

 पानी से पहले पुल


आओ बांध लें पानी से पहले पुल

देरी हुई तो सब कुछ बह जायेगा


वक्त आज बिक रहा पानी के मोल

कल खरीदने का ख्वाब रह जायेगा


क्यों व्यर्थ डाल रहे हो पानी पर नींव

मकां अगर है उस पर तो ढह जायेगा


मुसीबतें खूब कोसेगी पानी पी पी कर

थोड़ा प्यासा होगा वह सब सह जायेगा


बुलबुला जो बना पानी में वो मिट गया

जो रहा बूँद वह जग में मह मह जायेगा


पानी पानी हुए वे लोग छुप गए कोने में

पसीने से हुआ वो चौक में रह जायेगा


✒️डॉ अर्जुन सिंह साँखला

भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के सदस्यों के नाम

 *🛡️प्रारूप समिति*


♟️संविधान सभा की सभी समितियों में सबसे महत्वपूर्ण समिति 29 अगस्त, 1947 को गठित प्रारूप समिति थी।


♟️इसमें सात सदस्य थे। वे थे:


♟️डॉ. बी.आर. अंबेडकर (अध्यक्ष)


♟️एन. गोपालस्वामी अयंगर


♟️अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर


♟️डॉ. के.एम. मुंशी


♟️सैयद मोहम्मद सादुल्लाह


♟️एन. माधव राव (उन्होंने बी.एल. मित्तर का स्थान लिया, जिन्होंने अस्वस्थता के कारण इस्तीफा दे दिया था)


♟️टी.टी. कृष्णमाचारी (उन्होंने डी.पी. खेतान का स्थान लिया, जिनकी मृत्यु 1948 में हुई थी)

शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2025

भारत का निर्वाचन आयोग


भारत का निर्वाचन आयोग :

• निकाय - संवैधानिक (भाग 15,अनुच्छेद 324 से 329)

• स्थापना 25 जनवरी,1950

• मुख्यालय -  नई दिल्ली

• संरचना : एक अध्यक्ष + 2 सदस्य

• कार्यकाल - 6 वर्ष या 65 वर्ष जो भी पहले हो

• नियुक्ति - राष्ट्रपति द्वारा

• त्यागपत्र -  राष्ट्रपति को

• हटाने की प्रक्रिया - उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान

• प्रथम अध्यक्ष - श्री सुकुमार सेन ( 1950 - 1958)

• प्रथम महिला अध्यक्ष - श्रीमती वी एस रमादेवी (  1990 )

• वर्तमान अध्यक्ष- राजीव कुमार ,25 वें

चुनाव आयुक्त - - ज्ञानेश कुमार
- सुखबीर संधू

• अनुच्छेद 324 के तहत एक निर्वाचन आयोग की व्यवस्था का प्रावधान है।

• अनुच्छेद 326 के तहत भारत में वयस्क मताधिकार का प्रावधान किया गया है।

• 61 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1989 द्वारा मताधिकार की आयु को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया (प्रभावी 28 मार्च 1989 से)

• चुनाव सुधार से संबंधित समितियां

- तारकुंडे समिति ( 1974- 1975)( वयस्क मताधिकार की आयु 18 वर्ष करने की सिफारिश तारकुंडे समिति द्वारा की गई थी )

- जयप्रकाश नारायण समिति ( 1979 )

- दिनेश गोस्वामी समिति ( 1990 -91 )

- इंद्रजीत गुप्ता समिति ( 1998 )

- के संथानम समिति, 1962( समय-समय पर निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाए निर्वाचन में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम अर्हता)

- बोहरा समिति (1993) - राजनीति के अपराधीकरण पर रोक ।

- तनखा समिति

• अन्य सुधार :

1. C-विजील एप (2018) :  इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत सीधे निर्वाचन आयोग को भेज सकता है |

2.मतदाता हेल्पलाइन नंबर 1950 : चुनाव संबंधित शिकायत करना तथा सुझाव देना

3.पिंक बूथ  -  महिला मतदान को प्रोत्साहित करना ( 2015 बिहार से शुरू )

4.मॉडल पूलिंग बूथ ( 2020 ): कोरोना काल में बिहार विधानसभा चुनाव में कोरोनावायरस का पालन करवाया गया।

5. गरुड़ एप : 2021 में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लांच किया गया।
उद्देश्य - बूथ लेवल ऑफिसर ( BLO) द्वारा सभी मतदान केंद्रों की डिजिटल मैपिंग करना, जिससे चुनाव कार्य में तेजी, स्मार्ट , पारदर्शी तथा समय पर पूरा हो सके।

Note : 25 जनवरी राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2011 से मनाया जा रहा है।

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया

 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मणिपुर में लागू किया राष्ट्रपति शासन


✅ गृह मंत्रालय द्वारा घोषित मणिपुर में राष्ट्रपति शासन 13 फरवरी 2025 को लागू कर दिया गया है। यह निर्णय मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के हाल ही में इस्तीफा देने के बाद लिया गया है।

✅ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत लगाया गया राष्ट्रपति शासन, केंद्र को उस स्थिति में नियंत्रण लेने की अनुमति देता है जब कोई राज्य सरकार संवैधानिक रूप से कार्य करने में विफल हो जाती है।

✅ इस नियम के तहत, राज्य की शक्तियाँ केंद्र को हस्तांतरित कर दी जाती हैं, और विधायी कार्य संसद को स्थानांतरित कर दिए जाते हैं, हालाँकि उच्च न्यायालय अप्रभावित रहते हैं। 1950 से अब तक 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 134 बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है। मणिपुर और उत्तर प्रदेश में इसे सबसे अधिक बार देखा गया है, जबकि जम्मू और कश्मीर में सबसे लंबी अवधि, 12 वर्षों से अधिक का रिकॉर्ड है।

✅ 2023 में मैतेई समुदाय और कुकी-ज़ो जनजातियों के बीच भड़की जातीय हिंसा के परिणामस्वरूप 250 से अधिक मौतें हुईं और बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ।

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2025

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर

 *📜 List of RBI Governors (1935 - Present) 📊*


1️⃣ *Sir Osborne Smith (April 1, 1935 – June 30, 1937)*

👔 First Governor | 🇬🇧 British Banker


2️⃣ *Sir James Braid Taylor (July 1, 1937 – February 17, 1943)*

📑 ICS Officer | 📈 Deputy Governor Turned Governor


3️⃣ *Sir C.D. Deshmukh (August 11, 1943 – June 30, 1949)*

🇮🇳 First Indian Governor | 🌟 Visionary Leader


4️⃣ *Sir Benegal Rama Rau (July 1, 1949 – January 14, 1957)*

✍️ Longest Tenure | 🇮🇳 Economic Strategist


5️⃣ *K.G. Ambegaonkar (January 14, 1957 – February 28, 1957)*

⏳ Interim Governor | 🏛️ Finance Secretary


6️⃣ *H.V.R. Iyengar (March 1, 1957 – February 28, 1962)*

📚 Banking Reforms Leader | 🏦 State Bank Head


7️⃣ *P.C. Bhattacharya (March 1, 1962 – June 30, 1967)*

📘 Auditor | 🔍 Policy Innovator


8️⃣ *L.K. Jha (July 1, 1967 – May 3, 1970)*

📝 PM’s Advisor | 💼 Global Diplomat


9️⃣ *B.N. Adarkar (May 4, 1970 – June 15, 1970)*

⏳ Short Tenure | 💹 Economist


🔟 *S. Jagannathan (June 16, 1970 – May 19, 1975)*

🌏 India-US Relations | 💼 Banking Expert


1️⃣1️⃣ *N.C. Sen Gupta (May 19, 1975 – August 19, 1975)*

⏳ Interim Expert | 📜 Policy Shaper


1️⃣2️⃣ *K.R. Puri (August 20, 1975 – May 2, 1977)*

🏦 LIC Chief | 💹 Economic Planner


1️⃣3️⃣ *M. Narasimham (May 3, 1977 – November 30, 1977)*

📘 Narasimham Report | 💡 Reform Architect


1️⃣4️⃣ *Dr. I.G. Patel (December 1, 1977 – September 15, 1982)*

📚 Economist | 🌍 IMF Veteran


1️⃣5️⃣ *Dr. Manmohan Singh (September 16, 1982 – January 14, 1985)*

🇮🇳 Economic Reformer | 🇮🇳 Former PM


1️⃣6️⃣ *A. Ghosh (January 15, 1985 – February 4, 1985)*

⏳ Shortest Tenure | 🎓 Scholar


1️⃣7️⃣ *R.N. Malhotra (February 4, 1985 – December 22, 1990)*

🏦 Reforms Leader | 🌟 Visionary


1️⃣8️⃣ *S. Venkitaramanan (December 22, 1990 – December 21, 1992)*

💼 Finance Expert | 🔧 Crisis Manager


1️⃣9️⃣ *Dr. C. Rangarajan (December 22, 1992 – November 21, 1997)*

📊 Policy Maker | 📘 Reforms Architect


2️⃣0️⃣ *Dr. Bimal Jalan (November 22, 1997 – September 6, 2003)*

📊 Economy Strategist | 🌍 Stability Architect


2️⃣1️⃣ *Dr. Y.V. Reddy (September 6, 2003 – September 5, 2008)*

💹 Crisis Forecaster | 🌟 Global Voice


2️⃣2️⃣ *Dr. D. Subbarao (September 5, 2008 – September 4, 2013)*

📉 Crisis Manager | 🎓 Reforms Leader


2️⃣3️⃣ *Dr. Raghuram G. Rajan (September 4, 2013 – September 4, 2016)*

📖 Academic Star | 🌍 Global Economist


2️⃣4️⃣ *Dr. Urjit Patel (September 4, 2016 – December 10, 2018)*

💡 Monetary Expert | 📊 Fiscal Strategist


2️⃣5️⃣ *Shaktikanta Das (December 12, 2018 – December 10, 2024)*

📈 Stability Leader | 📲 Digital Push


2️⃣6️⃣ *Sanjay Malhotra (December 11, 2024 – Present)*

💼 IAS Officer | 💹 Reforms and Growth Advocate


*💡 Important Facts:✍️📔*


🌟 *Longest Serving:* Benegal Rama Rau (7+ years)

⏳ *Shortest Serving:* A. Ghosh (20 days)

🇮🇳 *First Indian Governor:* Sir C.D. Deshmukh

सोमवार, 3 फ़रवरी 2025

ICC सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर 2024 विजेताओं की सूची

 ICC सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर 2024 के विजेताओं की सूची


📌 सर्वश्रेष्ठ पुरुष टेस्ट क्रिकेटर - जसप्रीत बुमराह (भारत)

📌 सर्वश्रेष्ठ पुरुष टी-20 क्रिकेटर - अर्शदीप सिंह (भारत)

📌 सर्वश्रेष्ठ महिला टी-20 क्रिकेटर - एमेलिया केर (न्यूजीलैंड)

📌 वनडे पुरुष क्रिकेटर - अजमतुल्लाह ओमरजई (अफगानिस्तान)

📌 वनडे महिला क्रिकेटर - स्मृति मंधाना (भारत)

📌 सर्वश्रेष्ठ अंपायर - रिचर्ड इलिंगवर्थ


 

वायुमण्डल की परतों के नामों को याद रखनें की ट्रिक

 वायुमण्डल की परतों के नाम 

Trick - क्षोभ सम मध्य आय बर्हि

क्षोभ - क्षोभमण्डल

सम - समताप मण्डल

मध्य - मध्यमण्डल

आय - आयन मण्डल

बर्हि - बर्हिमण्डल