शनिवार, 15 फ़रवरी 2025

पानी से पहले पुल ( कविता )

 पानी से पहले पुल


आओ बांध लें पानी से पहले पुल

देरी हुई तो सब कुछ बह जायेगा


वक्त आज बिक रहा पानी के मोल

कल खरीदने का ख्वाब रह जायेगा


क्यों व्यर्थ डाल रहे हो पानी पर नींव

मकां अगर है उस पर तो ढह जायेगा


मुसीबतें खूब कोसेगी पानी पी पी कर

थोड़ा प्यासा होगा वह सब सह जायेगा


बुलबुला जो बना पानी में वो मिट गया

जो रहा बूँद वह जग में मह मह जायेगा


पानी पानी हुए वे लोग छुप गए कोने में

पसीने से हुआ वो चौक में रह जायेगा


✒️डॉ अर्जुन सिंह साँखला

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