शुक्रवार, 10 सितंबर 2021

मेहनत की कमाई

                       मेहनत की कमाई 

एक दुकानदार का बेटा बहुत आलसी था इसलिए वह बहुत दुखी रहता था अपने बेटे को वह मेहनती इंसान बनाना चाहता था इसलिए मैं हमेशा उसे समझ था लेकिन वह उसकी बात पर ध्यान नहीं देता था ।

एक दिन पिता अपने पुत्र से बोला तुम आज अपनी मेहनत से कुछ कमा कर लाओ नहीं तो आज शाम को तुम्हें खाना नहीं मिलेगा लड़का बहुत परेशान हो गया वह रोते हुए अपनी मां के पास गया और उन्हें सारी बात बताई मां ने बात को सुनकर एक सोने का सिक्का उठाया और बोली जाओ बेटा यह सोने का सिक्का लो और शाम को पिताजी को दिखा देना शाम के समय पिता जी बोले क्या कमा कर लाए हो लड़के ने कहा वह सोने का सिक्का दिखाते हुए बोल रहे कमा कर लाया हूं तो पिताजी ने कहा बेटा ऐसे का अपने खेत के कुएं में डाल दो , बेटे ने तुरंत जाकर उस सिक्के को कुएं में डाल दिया अगले दिन पिता ने अपनी पत्नी को मायके भेज दिया और लड़के को फिर से कमाकर लाने को कहा अबकी बार लड़का रोते हुए अपनी बड़ी बहन के पास गया तो बड़ी बहन ने कहा भाई तू चिंता मत कर यह ₹10 ले और पिताजी पूछे तो बता देना कि तूने कमाए हैं शाम को फिर पिताजी ने पूछा आज तुमने क्या कमाया लड़के ने बहन से लिए हुए रुपए दिखाते हुए कहा यह रुपए कमाए मैंने तो पिता ने कहा ऐसे भी कुएं में डाल दो बेटा ने झट से उसे कुएं में डाल दिया आप पिता ने उसकी बहन को भी ससुराल भेज दिया बेटे को बुलाकर डांट लगाई और फिर कहा कि कमाकर लाओ आओ तो लड़की के पास मेहनत करने के सिवा कोई रास्ता नहीं था वह रोता हुआ बाजार की ओर चल दिया बाजार में उसे एक सेठ मिला सेठ ने कहा यह मेरा लकड़ियों का गट्ठर उठाकर घर तक ले चलो ₹2 दूंगा लड़के ने हामी भर दी उसने लकड़ियां उठाई और सेठ के साथ चल दिया रास्ते में चलते चलते उसके पैरों में छाले पड़ गए और हाथ पैर भी दर्द करने लगे शाम को पिताजी वह आज तो मैंने क्या कमाया तो उसने कहा यह दो रुपए कमाए तो पिताजी बोले जाओ इसे उसी उसी कुएं में डाल दो तो लड़का बोला मैंने इतनी मेहनत से पैसे कमाए हैं और आप कह रहे हैं कि इसे कुएं में डाल दूं मैं नहीं डालूंगा तो पिताजी बोले बेटा तो मैं तुम्हें यही सिखाना चाहता था सोने का सिक्का तो तुमने कुएं में फेंक दिया क्योंकि बाय तुम नहीं नहीं कमाया था लेकिन ₹2 फेंकने में इतना सोच रहे हो इसलिए कि यह तुम्हारी मेहनत की कमाई है आज तुम मेहनत की कमाई का महत्व समझ गए हो पिताजी ने खुश होकर दुकान की जिम्मेदारी बेटे को सौंप दी।