बुधवार, 1 दिसंबर 2021

एड्स दिवस 1 दिसम्बर 2021

 " सुरक्षित यौन संबंध बनाये ,जांचा परखा रक्त चढ़ाए।

   छूने से ये नहीं फैलता , याद हमेशा तुम ये रखना ।।

  एड्स को समझों , एड्स को जानो , एड्स क्या है ? तुम पहचानो ।" 

               --  एड्स जागरूकता नारा नाको ( राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ) द्वारा


विश्व एड्स ( AIDS ) दिवस १ दिसम्बर पर एक लेख प्रस्तुत है - 


एड्स को पूरो नाम ' एक्वार्ड डिफिसिएन्सी सिन्ड्रोम ' हैगो। और जो रोग एचआईवी ( ह्यूमन इम्यूनो डिफेसिएनसी वायरस )  नाम के वायरस से फैलत हैगो। 

जो बीमारी भौत खतरनाक बीमारी ( संक्रमित बीमारी ) हैगी , जा बीमारी से मानव की मृत्यु भी हो जात हैगी । 

अबे तक एड्स बीमारी कौ कोई इलाज नई बनौ , जा बीमारी से बचाव ही जा बीमारी कौ इलाज हैगों ।


एड्स कौ इतिहास - एड्स सबसे पहलो केस ( एड्स से पीड़ित रोगी ) का अध्ययन  कैलीफोर्निया ( अमेरिका ) और न्यूयार्क में सन् १९८१ में करौ।


एड्स फैलने के तीन कारण हैगे - 

१) असुरक्षित यौन ( सेक्स ) संबंध से।

२) रक्त ( खून ) के द्वारा  एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति को रक्त दान करने से  , संक्रमित सुइयों से ।

३) मां के द्वारा शिशु ( बच्चे को )


बचाव के उपाय - 

१) सुरक्षित यौन संबंध ।

२) रक्त दान के समय , रक्त की जांच करवाना । 

३) बच्चे और मां का उपचार करवाना ।


                   लेखक 

         किरण कुमार  ( अध्ययनरत छात्र ) 

        इन्दिरा गांधी यूनिवर्सिटी नयी दिल्ली ।



राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ( नाको ) की वेबसाइट - NACO AIDDS


नोट - अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगे तो अपने सभी दोस्तों के साथ शेयर करें ।

कॉपी करके भी आप शेयर कर सकते है , बस लेखक का नाम न हटाए आप साथ में अपना नाम लिख सकते है । 

क्योकि यह पोस्ट बहुत अध्ययन करने के बाद हमने बनाई है ।

रविवार, 21 नवंबर 2021

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा कक्षा 9 वीं , 10 वीं , 11 वीं , 12 वीं अर्द्धवार्षिक परीक्षा का टाइम टेबल 2021 - 2022

कक्षा 9 वीं अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2021-22 टाइम टेबल

     समय 9:00 AM से 12:00PM  बजे तक

 
  दिनांक                         विषय

29 नवंबर 2021     --          गणित

1 दिसंबर 2021       --          सामाजिक विज्ञान

3 दिसंबर 2021       --          हिन्दी विशिष्ट

4 दिसंबर 2021       --          संस्कृत

6 दिसंबर 2021       --          अंग्रेजी

8 दिसंबर 2021       --           विज्ञान




अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2021 - 2022 कक्षा 9 वीं , 10 वीं ,11 वीं , 12 वीं  की समय सारणी डाउनलोड करने के लिंक  -- क्लिक करें / Click here



कक्षा 10 वीं अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2021-22 टाइम टेबल

     समय 12:30 PM से 3:30PM  बजे तक

 
  दिनांक                              विषय

29 नवंबर 2021     --          अंग्रेजी

1 दिसंबर 2021       --         विज्ञान

2 दिसंबर 2021       --         हिन्दी विशिष्ट

3 दिसंबर 2021       --          संस्कृत

6 दिसंबर 2021       --          सामाजिक विज्ञान

8 दिसंबर 2021       --           गणित

मंगलवार, 9 नवंबर 2021

बीए प्रथम वर्ष पाठयक्रम 2021 -2022 _BA 1st Year Syllabus 2021 -2022

मध्यप्रदेश उच्चशिक्षा विभाग ने हाल ही में पाठ्यक्रम ( सिलेबस )  2021 - 2022 जारी कर दिया है। जो सभी विश्वविद्यालयों ( यूनिवर्सिटीज ) और महाविद्यालयों ( कॉलेजो )  के लिए उपयोगी है।


बीए प्रथम वर्ष का सिलेबस डाउनलोड करे सभी विषय के लिए लिंक

बीए प्रथम वर्ष सभी विषय का सिलेबस डाउनलोड करें


http://www.mphighereducation.nic.in/Portal/eLearning/CoursesSyllabus.aspx#


मंगलवार, 26 अक्टूबर 2021

समस्याओं का बोझ

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 //◆◆◆◆//  प्रेरक प्रसंग  // ◆◆◆◆//

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◆ !! समस्याओं का बोझ !!

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एक प्रोफेसर कक्षा में दाखिल हुए। उनके हाथ में पानी से भरा एक गिलास था। उन्होंने उसे बच्चों को दिखाते हुए पूछा, “यह क्या है?” छात्रों ने उत्तर दिया, “गिलास।” प्रोफेसर ने दोबारा पूछा, “इसका वजन कितना होगा ?” उत्तर मिला, “लगभग 100-150 ग्राम।” उन्होंने फिर पूछा, “अगर मैं इसे थोड़ी देर ऐसे ही पकड़े रहूं तो क्या होगा ?” छात्रों ने जवाब दिया, “कुछ नहीं।” “अगर मैं इसे एक घण्टे पकड़े रहूं तो ?” प्रोफेसर ने दोबारा प्रश्न किया। छात्रों ने उत्तर दिया, “आपके हाथ में दर्द होने लगेगा।” 


उन्होंने फिर प्रश्न किया, “अगर मैं इसे सारा दिन पकड़े रहूं तो क्या होगा” ? तब छात्रों ने कहा, “आपकी नसों में तनाव हो जाएगा। नसें संवेदनशून्य हो सकती हैं। जिससे आपको लकवा हो सकता है।” प्रोफेसर ने कहा, “बिल्कुल ठीक। अब यह बताओ क्या इस दौरान इस गिलास के वजन में कोई फर्क आएगा ?” जवाब था कि नहीं। तब प्रोफेसर बोले, “यही नियम हमारे जीवन पर भी लागू होता है। यदि हम किसी समस्या को थोड़े समय के लिए अपने दिमाग में रखते हैं। तो कोई फर्क नहीं पड़ता। 


लेकिन अगर हम देर तक उसके बारे में सोचेंगे तो वह हमारे दैनिक जीवन पर असर डालने लगेगी। हमारा काम और पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होने लगेगा। इसलिए सुखी जीवन के लिए आवश्यक है कि समस्याओं का बोझ अपने सिर पर हमेशा नहीं लादे रखना चाहिए। समस्याएं सोचने से नहीं हल होतीं। सोने से पहले सारे समस्यायुक्त विचारों को बाहर रख देना चाहिए। इससे आपको अच्छी नींद आएगी और आप सुबह तरोताजा रहेंगें।



Moral- सीख :-


समस्याओं को लेकर अधिक परेशान नहीं होना चाहिए। इससे हमारा नुकसान ही होता है।


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╚»★ जय भिम ✺ नमो बुद्धाय ★«╝

            ★जय संविधान★

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रविवार, 17 अक्टूबर 2021

मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय

      प्रेमचंद जी का जीवन परिचय

प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 में बनारस जिले के लमही गांव में हुआ था । प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय था ।  माता का नाम आनंदी देवी था और पिता का नाम अजायब लाल था जो एक डाक मुंशी थे ।



 प्रेमचंद का विवाह शिवरानी देवी विधवा के साथ हुआ । उनका बचपन अभावों में बीता मैट्रिक मैट्रिक पास करने के बाद अध्यापक बने साथ ही  अध्यापन करते कराते हुए बीए की परीक्षा उत्तीर्ण की फिर शिक्षा विभाग में डिप्टी इंस्पेक्टर हो गए । उनका निधन 8 अक्टूबर 1936 को हुआ  । 


रचनाएं :-

१. उपन्यास --  सेवा सदन  , गोदान , गबन , प्रेमाश्रम , रंगभूमि , कर्मभूमि , निर्मला , कायाकल्प , वरदान , प्रतिज्ञा , मंगलसूत्र ( अपूर्ण )।

२. कहानियां --  पंच परमेश्वर , दो बैलों की कथा , ईदगाह , परीक्षा , नमक का दरोगा , बड़े घर की बेटी , पूस की रात , कफन ,  बूढ़ी काकी , प्रेम सरोवर , प्रेम पंचमी , प्रेम गंगा , कफन , प्रेम प्रतिमा , प्रेम कुंज , प्रेम प्रसून , आदि है ।

इनकी पहली कहानी पंच परमेश्वर है जो  सन् 1916 में सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।

३. नाटक --  कर्बला , संग्राम , प्रेम की वेदी ।

४. जीवनी -- महात्मा , शेखशादी , दुर्गादास , कलम तलवार और त्याग ।

प्रेमचंद को उपन्यास सम्राट , कहानी सम्राट भी कहा जाता है ।



शनिवार, 16 अक्टूबर 2021

मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा कक्षा 10 वीं कम किया गया पाठ्यक्रम 2021 - 2022

  कक्षा 10 वीं विषय - हिन्दी  

Class 10 th hindi


कक्षा 10 वीं  विषय - विज्ञान का कम किया गया पाठ्यक्रम



  कक्षा 10 वीं सामाजिक विज्ञान





 विषय संस्कृत 




विषय अंग्रेजी। 




गणित 









शुक्रवार, 8 अक्टूबर 2021

रिक्शे वाला की प्रेरणादायक कहानी

       


एक बार एक अमीर आदमी कहीं जा रहा होता है तो उसकी कार ख़राब हो जाती है। उसका कहीं पहुँचना बहुत जरुरी होता है। उसको दूर एक पेड़ के नीचे एक रिक्शा दिखाई देता है। वो उस रिक्शा वाले पास जाता है। वहां जाकर देखता है कि रिक्शा वाले ने अपने पैर हैंडल के ऊपर रखे होते हैं। पीठ उसकी अपनी सीट पर होती है और सिर जहां सवारी बैठती है उस सीट पर होती है।


और वो मज़े से लेट कर गाना गुन-गुना रहा होता है। वो अमीर व्यक्ति रिक्शा वाले को ऐसे बैठे हुए देख कर बहुत हैरान होता है कि एक व्यक्ति ऐसे बेआराम जगह में कैसे रह सकता है, कैसे खुश रह सकता है। कैसे गुन-गुना सकता है। 


वो उसको चलने के लिए बोलता है। रिक्शा वाला झट से उठता है और उसे 20 रूपए देने के लिए बोलता है।


रास्ते में वो रिक्शा वाला वही गाना गुन-गुनाते हुए मज़े से रिक्शा खींचता है। वो अमीर व्यक्ति एक बार फिर हैरान कि एक व्यक्ति 20 रूपए लेकर इतना खुश कैसे हो सकता है। इतने मज़े से कैसे गुन-गुना सकता है। वो थोड़ा ईर्ष्यापूर्ण हो जाता है और रिक्शा वाले को समझने के लिए उसको अपने बंगले में रात को खाने के लिए बुला लेता है। रिक्शा वाला उसके बुलावे को स्वीकार कर लेता है।


वो अपने हर नौकर को बोल देता है कि इस रिक्शा वाले को सबसे अच्छे खाने की सुविधा दी जाए। अलग अलग तरह के खाने की सेवा हो जाती है। सूप्स, आइस क्रीम, गुलाब जामुन सब्जियां यानि हर चीज वहाँ मौजूद थी।


 वो रिक्शा वाला खाना शुरू कर देता है, कोई प्रतिक्रिया, कोई घबराहट बयान नहीं करता। बस वही गाना गुन-गुनाते हुए मजे से वो खाना खाता है। सभी लोगों को ऐसे लगता है जैसे रिक्शा वाला ऐसा खाना पहली बार नहीं खा रहा है। पहले भी कई बार खा चुका है। वो अमीर आदमी एक बार फिर हैरान एक बार फिर ईर्ष्यापूर्ण कि कोई आम आदमी इतने ज्यादा तरह के व्यंजन देख के भी कोई हैरानी वाली प्रतिक्रिया क्यों नहीं देता और वैसे कैसे गुन-गुना रहा है जैसे रिक्शे में गुन-गुना रहा था।


यह सब कुछ देखकर अमीर आदमी की ईर्ष्या और बढती है। अब वह रिक्शे वाले को अपने बंगले में कुछ दिन रुकने के लिए बोलता है। रिक्शा वाला हाँ कर देता है। 


उसको बहुत ज्यादा इज्जत दी जाती है। कोई उसको जूते पहना रहा होता है, तो कोई कोट। एक बेल बजाने से तीन-तीन नौकर सामने आ जाते हैं। एक बड़ी साइज़ की टेलीविज़न स्क्रीन पर उसको प्रोग्राम दिखाए जाते हैं। और एयर-कंडीशन कमरे में सोने के लिए बोला जाता है।


अमीर आदमी नोट करता है कि वो रिक्शा वाला इतना कुछ देख कर भी कुछ प्रतिक्रिया नहीं दे रहा। वो वैसे ही साधारण चल रहा है। जैसे वो रिक्शा में था वैसे ही है। वैसे ही गाना गुन-गुना रहा है जैसे वो रिक्शा में गुन-गुना रहा था।


अमीर आदमी के ईर्ष्या बढ़ती चली जाती है और वह सोचता है कि अब तो हद ही हो गई। इसको तो कोई हैरानी नहीं हो रही, इसको कोई फर्क ही नहीं पढ़ रहा। ये वैसे ही खुश है, कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दे रहा।


अब अमीर आदमी पूछता है: आप खुश हैं ना? 

रिक्शा वाला: जी साहेब बिलकुल खुश हूँ।

अमीर आदमी फिर पूछता है: आप आराम में हैं ना ? 

रिक्शा वाला कहता है: जी बिलकुल आरामदायक हूँ।


अब अमीर आदमी तय करता है कि इसको उसी रिक्शा पर वापस छोड़ दिया जाये। वहाँ जाकर ही इसको इन बेहतरीन चीजों का एहसास होगा। क्योंकि वहाँ जाकर ये इन सब बेहतरीन चीजों को याद करेगा।


अमीर आदमी अपने सेक्रेटरी को बोलता है कि इसको कह दो कि अपने दिखावे के लिए कह दिया कि आप खुश हो, आप आरामदायक हो। लेकिन साहब समझ गये हैं कि आप खुश नहीं हो आराम में नहीं हो। इसलिए आपको उसी रिक्शा के पास छोड़ दिया जाएगा।”


सेक्रेटरी के ऐसा कहने पर रिक्शा वाला कहता है: ठीक है सर, जैसे आप चाहे, जब आप चाहे।


उसे वापस उसी जगह पर छोड़ दिया जाता है जहाँ पर उसका रिक्शा था। अब वो अमीर आदमी अपने गाड़ी के काले शीशे ऊँचे करके उसे देखता है।


रिक्शे वाले ने अपनी सीट उठाई बैग में से काला सा, गन्दा सा, मेला सा कपड़ा निकाला, रिक्शा को साफ़ किया, मज़े में बैठ गया और वही गाना गुन-गुनाने लगा।


अमीर आदमी अपने सेक्रेटरी से पूछता है: “चक्कर क्या है। इसको कोई फर्क ही नहीं पड रहा इतनी आरामदायक वाली, इतनी बेहतरीन जिंदगी को ठुकरा के वापस इस कठिन जिंदगी में आना और फिर वैसे ही खुश होना, वैसे ही गुन-गुनाना।”


फिर वो सेक्रेटरी उस अमीर आदमी को कहता है: “सर यह एक कामयाब इन्सान की पहचान है। एक कामयाब इन्सान वर्तमान में जीता है, उसको मनोरंजन करता है और बढ़िया जिंदगी की उम्मीद में अपना वर्तमान खराब नहीं करता।


अगर उससे भी बढ़िया जिंदगी मिल गई तो उसे भी वेलकम करता है उसको भी मनोरंजन (enjoy) करता है उसे भी भोगता है और उस वर्तमान को भी ख़राब नहीं करता। और अगर जिंदगी में दुबारा कोई बुरा दिन देखना पड़े तो वो भी उस वर्तमान को उतने ही ख़ुशी से, उतने ही आनंद से, उतने ही मज़े से भोगता है मनोरंजन करता है और उसी में आनंद लेता है।”


शिक्षा:-

कामयाबी आपके ख़ुशी में छुपी है, और अच्छे दिनों की उम्मीद में अपने वर्तमान को ख़राब नहीं करें। और न ही कम अच्छे दिनों में ज्यादा अच्छे दिनों को याद करके अपने वर्तमान को ख़राब करना है।




दिखावटीपन से बचें 😀😀


            एक व्यक्ति को किसी बड़े पद पर नौकरी मिल गयी। वह इस नौकरी से खुद को और बड़ा समझने लगा, लेकिन वह कभी भी खुद को बड़े पद के मुताबिक़ नहीं ढाल सका। एक दिन वह अपने ऑफिस में बैठा था, तभी बाहर से उसके दरवाजे को खटखटाने की आवाज आई। खुद को बहुत व्यस्त दिखाने के लिए उसनें टेबल पर रखे टेलीफोन को उठा लिया और जो व्यक्ति दरवाजे के बाहर खड़ा था उसे अन्दर आने के लिए कहा। वह अन्दर आकर इंतजार करने लगा, इस बीच कुर्सी पर बैठा अधिकारी फ़ोन पर चिल्ला-चिल्ला कर बात कर रहा था।


बीच-बीच में वह फोन पर कहता, कि मुझे वह काम जल्दी करके देना, टेलीफोन  पर अपनी बातों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बता रहा था। ऐसे ही कुछ मिनट तक बात करने के बाद उस आदमी ने फ़ोन रखा और सामने वाले व्यक्ति से उसके ऑफिस आने की वजह पूछी। उस आदमी ने अधिकारी को जवाब देते हुए कहा, “सर, मुझे बताया गया था कि 3 दिनों से आपके इस ऑफिस का टेलीफ़ोन ख़राब है और मैं इस टेलीफ़ोन को ठीक करने के लिए आया हूँ।” 😀😀


शिक्षा:-

हमें कभी भी दिखावा नहीं करनी चाहिए। हम दिखावा करके क्या साबित करना चाहते हैं, इससे हम कभी भी कुछ हासिल नहीं कर सकते, हमें किसी के सामने झूठ बोलने की क्या जरूरत! दिखावा करके हम खुद की नजरों में कभी भी ऊपर नहीं उठ सकते। दिखावा करने से बचिए क्योंकि इससे लोग पीठ पीछे आपकी ही बुराई करेंगे। मुखौटा मत लगायें।



ऊंट और व्यापारी की कहानी

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 //◆◆◆◆//  प्रेरक प्


एक बार एक व्यापारी अपने चार ऊटों के साथ व्यापार करने जा रहा था। चलते-चलते जब रात हुई तब वह एक सराय पर रुका। सराय में जाने से पहले वह अपने ऊंट एक पेड़ से बाँधने लगा।


 तीन ऊंट बाँधने के बाद उसने देखा कि चौथा ऊंट बंधने के लिए उसने जो रस्सी रखी थी वह कहीं रास्ते में गिर गयी।


 _अँधेरा बढ़ रहा था। व्यापारी के पास कोई और रस्सी भी नहीं थी। उसने आस-पास देखा कि शायद उसे कोई दूसरी रस्सी मिल जाए लेकिन बहुत ढूंढ़ने के बाद भी उसे कोई रस्सी नहीं मिली। ऊंट को बंधना भी जरूरी था। नहीं तो

ऊंट रात में कहीं भी जा सकता था।        

                      

थक-हार कर और परेशान होकर व्यापारी वहीं बैठ गया।


तभी वहां सराय का मालिक आया।


               “क्या हुआ श्रीमान? आप यहाँ क्यों बैठ गए। हम कब से आपका इंतजार कर रहे हैं।"


सराय के मालिक ने व्यापारी से पूछा। व्यापारी ने सराय के मालिक को अपनी समस्या बताई।

               व्यापारी की बात सुनते ही सराय का मालिक जोर से हंसा और कहा,


“हा..हा...हा... बस इतनी सी बात। ये समस्या तो कुछ भी नहीं है। आप ऐसा करिए इसे ऐसे ही बाँध दीजिये।"


“ऐसे ही बाँध दीजिये मतलब?"

व्यापारी ने हैरान होते हुए पूछा।


“ऐसे ही मतलब ये कि आप इसे बिना रस्सी के ही बांधने का अभिनय कीजिये। विश्वास मानिये ये कहीं नहीं जाएगा।"

उस व्यापारी ने ऐसा ही किया। ऐसा किये जाने पर ऊंट शांतिपूर्वक बैठ गया। व्यापारी ने उसके सामने चारा डाला और सराय के मालिक को धन्यवाद देते हुए आराम करने चला गया।                                                         


रात बीतने पर सुबह जब व्यापारी आगे की यात्रा के लिए तैयार हुआ। उसने जाकर सबसे पहले अपने ऊंट देखे।


सभी ऊंट वैसे ही बैठे हुए थे। बिना रस्सी वाला ऊंट भी अपनी जगह से हिला नहीं था। व्यापारी ने तीनों ऊंटों की रस्सी खोली और तीनों ऊंट उठ खड़े हुए लेकिन चौथा ऊंट न खड़ा हुआ।


व्यापारी ने उसे उठाने का बहुत प्रयास किया लेकिन वह ऊंट नहीं उठा। व्यापारी उसे मारने के लिए एक डंडा उठा लाया। तभी वहां से सराय का मालिक गुजरा। उसने व्यापारी को टोकते हुए कहा,


“अरे! क्या करते हो भाई साहब? बेजुबान जानवर को मारते हो?"


व्यापारी ने बताया कि वह बहुत देर से कोशिश कर रहा है लेकिन यह ऊंट खड़ा ही नहीं हो रहा। तब सराय का मालिक बोला,


“उठेगा कैसे? पहले उसकी रस्सी तो खोलिए।"

"रस्सी... कौन सी रस्सी?"


“अरे वही रस्सी जिस से आपने इसे रात को बांधा था।"


“लेकिन रात को तो हमने बस इसे बाँधने का नाटक किया था।"


“बस वही नाटक आपको फिर करना है।"

यह सुन व्यापारी ने वैसा ही किया जैसा सराय के मालिक ने कहा। 


व्यापारी हैरान था। सिर्फ नाटक करने से ही ऊंट ने कैसे मान लिया कि वो बंधन में है और उसे अभी आजाद किया गया है।


 उसने सराय के मालिक से इसका कारन पूछा। तब सराय के मालिक ने इसका कारन बताया,


“इसका कारन है ऊंट की मानसिकता। एक इंसान या जानवर जैसी मानसिकता बना लेता है उसे अपने हालात वैसे ही बेहतर नज़र आते हैं। जब आपने इसे बाँधने का नाटक किया। तब इसने अपनी मानसिकता बना ली कि मैं बंध चुका हूँ। इसीलिए सुबह आपके उठाने पर भी यह नहीं उठा। तब भी इसकी मानसिकता यही थी कि मैं बंधा हुआ हूँ और कहीं नहीं जा सकता। जब आपने इसे खोलने का नाटक किया तो यह उठ खड़ा हुआ।"


व्यापारी को आज मानसिकता की ताकत समझ आ गयी थी। उसने सराय के मालिक का एक बार फिर धन्यवाद किया और आपनी राह चल पड़ा।


यह कहानी सिर्फ ऊंट की नहीं है बल्कि हम सब की है। जो हम यह मानसिकता बना लेते हैं कि  जीवन में कुछ नहीं कर सकते। हमारे पास बहुत से गुण हैं। परन्तु हम अपनी नकारात्मक मानसिकता के शिकार होकर अपने हालातों को बदतर बना लेते हैं। हम सबके अन्दर वो सारे

गुण मौजूद हैं जो हमारे जीवन को और बेहतर बना सकते हैं।


हम किसी के गुलाम नहीं हैं। परन्तु फिर भी आप यह स्वीकार कर लेते हैं तो आप अपनी जिंदगी के मालिक नहीं हैं।


यदि आप सुखी जीवन चाहते हैं तो अपनी मानसिकता को बदलिए। अपने हालातों को बदलिए और दुनिया को एक अलग नजरिये से देखिये। फिर देखिए खुशियां आप की राह देख रही होंगी।



एक गांव वाला और चश्मा


एक ग्रामीण था। वह अनपढ़ था। वह पढ़ना-लिखना नहीं जानता था। उन्होंने अक्सर लोगों को किताबें या पेपर पढ़ने के लिए चश्मा पहना हुआ देखा था। उसने सोचा, “अगर मेरे पास चश्मा हो, तो मैं भी इन लोगों की तरह पढ़ सकता हूँ। मुझे शहर जाना चाहिए और अपने लिए एक जोड़ी चश्मा खरीदना चाहिए।” इसलिए एक दिन वह एक शहर में गया। एक चश्मे की दुकान में पहुंचा। उसने दुकानदार से एक जोड़ी चश्मा दिखाने के लिए कहा। दुकानदार ने उन्हें कई जोड़े चश्मे और एक किताब दी।


ग्रामीण ने एक-एक कर सभी चश्मों को आजमाया। लेकिन वह कुछ पढ़ नहीं सका। उसने दुकानदार से कहा कि – ये सब चश्में तो बेकार हैं। दुकानदार ने उसे ऊपर से नीचे तक घूरा। फिर उसने किताब की तरफ देखा। वह उल्टी थी! दुकानदार ने कहा, “शायद आप नहीं जानते कि कैसे पढ़ना है।” ग्रामीण ने कहा, “नहीं, मैं नहीं जानता। मैं चश्मा खरीदना चाहता हूं ताकि मैं दूसरों की तरह पढ़ सकूं। लेकिन ये सभी चश्में तो बकवास हैं।”


दुकानदार ने हंसी आ गयी. उसने बड़ी मुश्किल से अपनी हँसी रोकी. अब उसको अनपढ़ ग्राहक की असली समस्या समझ आ गई थी। उसने गाँव वाले को समझाया, “मेरे प्यारे दोस्त, तुम बहुत अनजान हो। चश्मा पढ़ने या लिखने में मदद नहीं करते हैं। वे केवल आपको ठीक से देखने में मदद करते हैं। सबसे पहले, आपको पढ़ना और लिखना सीखना चाहिए।”


सीख :-  अज्ञानता अंधापन है।



चतुर चिड़िया की कहानी


     एक दिन की बात है एक चिड़िया आकाश में अपनी उड़ान भर रही होती है। रास्ते में उसे गरुड़ मिल जाता है। गरुड़ उस चिड़िया को खाने को दौड़ता है। चिड़िया उससे अपनी जान की भीख मांगती है। लेकिन गरुड़ उसपर रहम करने को तैयार नहीं होता। तब चिड़िया उसे बताती है कि मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं और उनके लालन पालन के लिए मेरा जीवित रहना जरूरी है। तब गरुड़ इस पर चिड़िया के सामने एक शर्त रखता है कि मेरे साथ दौड़ लगाओ और अगर तुमने मुझे हरा दिया तो मैं तुम्हारी जान बख्श दूंगा और तुम्हें यहां से जाने दूंगा।

 

     गरुड़ इस बात को जानता था कि चिड़िया का उसे दौड़ में हराना असंभव है। इसलिए उसके सामने इतनी कठिन शर्त रख देता है। चिड़िया के पास इस दौड़ के लिए हां करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता। लेकिन चिड़िया को इस बात का अंदाजा था कि गरुड़ को दौड़ में हराना नामुमकिन है लेकिन फिर बी वह इस दौड़ के लिए हां कर देती है। पर वह गरुड़ से कहती है कि जब तक ये दौड़ ख़त्म नहीं होता वह उसे नहीं मरेगा। गरुड़ इस बात पर राजी हो जाता है।


      दौड़ शुरू होती है चिड़िया फट से जाकर गरुड़ के सिर पर बैठ जाती है और जैसे ही गरुड़ दौड़ के आखिरी स्थान पर पहुंचता है चिड़िया फट से उड़ कर लाइन के पार पहुंच जाती ही और जीत जाती है। गरुड़ उसकी चतुरता से प्रसन्न हो जाता है और उसको जिंदा छोड़ देता है। चिड़िया तुरंत ही वहां से उड़ जाती है और अपने रास्ते चल देती है।


शिक्षा:-

      कठिन परिस्थितियों में हालातों पर रोना नहीं चाहिए बल्कि समझदारी और चतुरता के साथ मुसीबत का सामना करना चाहिए। विरोधी या कार्य आपकी क्षमता से ज्यादा मजबूत हो तो इसका मतलब यह नहीं कि आप पहले से ही हार मान कर बैठ जाएं बल्कि समझदारी और धैर्य से बैठ कर समस्या का समाधान ढूढ़ना चाहिए। अपने ऊपर विश्वास रखना चाहिए कि हम किसी भी हालत में जीत सकते है।



इच्छापूर्ति प्रेरणादायक कहानी


एक घने जंगल में एक इच्छा पूर्ति वृक्ष था, उसके नीचे बैठ कर कोई भी इच्छा करने से वह तुरंत पूरी हो जाती थी। यह बात बहुत कम लोग जानते थे क्योंकि उस घने जंगल में जाने की कोई हिम्मत ही नहीं करता था।


एक बार संयोग से एक थका हुआ व्यापारी उस वृक्ष के नीचे आराम करने के लिए बैठ गया। उसे पता ही नहीं चला कि कब उसकी नींद लग गयी। जागते ही उसे बहुत भूख लगी, उसने आस पास देखकर सोचा- 'काश कुछ खाने को मिल जाए!' तत्काल स्वादिष्ट पकवानों से भरी थाली हवा में तैरती हुई उसके सामने आ गई।


व्यापारी ने भरपेट खाना खाया और भूख शांत होने के बाद सोचने लगा। काश कुछ पीने को मिल जाए! तत्काल उसके सामने हवा में तैरते हुए अनेक शरबत आ गए। शरबत पीने के बाद वह आराम से बैठ कर सोचने लगा-  कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूँ। हवा में से खाना पानी प्रकट होते पहले कभी नहीं देखा न ही सुना।


जरूर इस पेड़ पर कोई भूत रहता है जो मुझे खिला पिला कर बाद में मुझे खा लेगा ऐसा सोचते ही तत्काल उसके सामने एक भूत आया और उसे खा गया।


शिक्षा:-

इस प्रसंग से आप यह सीख सकते हैं कि हमारा मस्तिष्क ही इच्छापूर्ति वृक्ष है। आप जिस चीज की प्रबल कामना करेंगे, वह आपको अवश्य मिलेगी। अधिकांश लोगों को जीवन में बुरी चीजें इसलिए मिलती हैं, क्योंकि वे बुरी चीजों की ही कामना करते हैं।


इंसान ज्यादातर समय सोचता है- कहीं बारिश में भीगने से मैं बीमार न हों जाँऊ और वह बीमार हो जाता है। इंसान सोचता है- मेरी किस्मत ही खराब है और उसकी किस्मत सचमुच खराब हो जाती हैं।


इस तरह आप देखेंगे कि आपका अवचेतन मन इच्छापूर्ति वृक्ष की तरह आपकी इच्छाओं को ईमानदारी से पूर्ण करता है..! इसलिए आपको अपने मस्तिष्क में विचारों को सावधानी से प्रवेश करने की अनुमति देनी चाहिए।


विचार जादूगर की तरह होते हैं, जिन्हें बदलकर आप अपना जीवन बदल सकते हैं। इसलिये सदा सकारात्मक सोचिए।

इसलिए तथागत बुद्ध ने कहा था - कि जैसे तुम सोचोगे वैसा तुम पाओगे। 


बाहर की दुनिया बिलकुल वैसी है, जैसा कि हम अंदर से सोचते हैं। हमारे विचार ही चीजों को सुंदर और बदसूरत बनाते हैं। पूरा संसार हमारे अंदर समाया हुआ है, बस जरूरत है चीजों को सही रोशनी में रखकर देखने की।


समस्या का समाधान प्रेरणादायक कहानी


एक दस वर्षीय लड़का रोज अपने पिता के साथ पास की पहाड़ी पर सैर को जाता था।

एक दिन लड़के ने कहा, “पिताजी चलिए आज हम दौड़ लगाते हैं, जो पहले चोटी पे लगी उस झंडी को छू लेगा वो रेस जीत जाएगा !”

पिताजी तैयार हो गए।

दूरी काफी थी, दोनों ने धीरे-धीरे दौड़ना शुरू किया।

कुछ देर दौड़ने के बाद पिताजी अचानक ही रुक गए।


“क्या हुआ पापा, आप अचानक रुक क्यों गए, आपने अभी से हार मान ली क्या?”, लड़का मुस्कुराते हुए बोला।

“नहीं-नहीं, मेरे जूते में कुछ कंकड़ पड़ गए हैं, बस उन्ही को निकालने के लिए रुका हूँ।”, पिताजी बोले।

लड़का बोला, “अरे, कंकड़ तो मेरे भी जूतों में पड़े हैं, पर अगर मैं रुक गया तो रेस हार जाऊँगा…”, और ये कहता हुआ वह तेजी से आगे भागा।


पिताजी भी कंकड़ निकाल कर आगे बढे, लड़का बहुत आगे निकल चुका था, पर अब उसे पाँव में दर्द का एहसास हो रहा था, और उसकी गति भी घटती जा रही थी। धीरे-धीरे पिताजी भी उसके करीब आने लगे थे।


लड़के के पैरों में तकलीफ देख पिताजी पीछे से चिल्लाये,” क्यों नहीं तुम भी अपने कंकड़ निकाल लेते हो?”

“मेरे पास इसके लिए टाइम नहीं है !”, लड़का बोला और दौड़ता रहा।

कुछ ही देर में पिताजी उससे आगे निकल गए।

चुभते कंकडों की वजह से लड़के की तकलीफ बहुत बढ़ चुकी थी और अब उससे चला नहीं जा रहा था, वह रुकते-रुकते चीखा, “पापा, अब मैं और नहीं दौड़ सकता !”

    पिताजी जल्दी से दौड़कर वापस आये और अपने बेटे के जूते खोले, देखा तो पाँव से खून निकल रहा था। 


वे झटपट उसे घर ले गए और मरहम-पट्टी की।

जब दर्द कुछ कम हो गया तो उन्होंने समझाया,” बेटे, मैंने आपसे कहा था ना पहले अपने कंकडों को निकाल लो फिर दौड़ो।”

“मैंने सोचा मैं रुकुंगा तो रेस हार जाऊँगा !” बेटा बोला।


“ ऐसा नही है बेटा, अगर हमारी लाइफ में कोई प्रॉब्लम आती है तो हमे उसे ये कह कर टालना नहीं चाहिए कि अभी हमारे पास समय नहीं है।


 दरअसल होता क्या है, जब हम किसी समस्या को अनदेखी करते हैं तो वो धीरे-धीरे और बड़ी होती जाती है और अंततः हमें जितना नुक्सान पहुंचा सकती थी उससे कहीं अधिक नुक्सान पहुंचा देती है। तुम्हे पत्थर निकालने में मुश्किल से 1 मिनट का समय लगता पर अब उस 1 मिनट के बदले तुम्हे 1 हफ्ते तक दर्द सहना होगा। “ पिताजी ने अपनी बात पूरी की।

दोस्तों हमारा जीवन ऐसी तमाम कंकडों से भरा हुआ है l


शुरू में ये समस्याएं छोटी जान पड़ती है और हम इन पर बात करने या इनका समाधान खोजने से बचते हैं, पर धीरे-धीरे इनका रूप बड़ा हो जाता है l


समस्याओं को तभी पकडिये जब वो छोटी हैं वर्ना देरी करने पर वे उन कंकडों की तरह आपका भी खून बहा सकती हैं..!!



लक्ष्य की प्राप्ति


     एक लड़के ने एक बार एक बहुत ही धनवान व्यक्ति को देखकर धनवान बनने का निश्चय किया। वह धन कमाने के लिए कई दिनों तक मेहनत कर धन कमाने के पीछे पड़ा रहा और बहुत सारा पैसा कमा लिया। इसी बीच उसकी मुलाकात एक विद्वान से हो गई। विद्वान के ऐश्वर्य को देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया और अब उसने विद्वान बंनने का निश्चय कर लिया और अगले ही दिन से धन कमाने को छोड़कर पढने-लिखने में लग गया। वह अभी अक्षर ज्ञान ही सिख पाया था, की इसी बीच उसकी मुलाकात एक संगीतज्ञ से हो गई। उसको संगीत में अधिक आकर्षण दिखाई दिया, इसीलिए उसी दिन से उसने पढाई बंद कर दी और संगीत सिखने में लग गया।


     इसी तरह काफी उम्र बित गई, न वह धनी हो सका ना विद्वान और ना ही एक अच्छा संगीतज्ञ बन पाया। तब उसे बड़ा दुख हुआ। एक दिन उसकी मुलाकात एक बहुत बड़े महात्मा से हुई। उसने महात्मन को अपने दुःख का कारण बताया। महात्मा ने उसकी परेशानी सुनी और मुस्कुराकर बोले, “बेटा, दुनिया बड़ी ही चिकनी है, जहाँ भी जाओगे कोई ना कोई आकर्षण ज़रूर दिखाई देगा। एक निश्चय कर लो और फिर जीते जी उसी पर अमल करते रहो तो तुम्हें सफलता की प्राप्ति अवश्य हो जाएगी, नहीं तो दुनियां के झमेलों में यूँ ही चक्कर खाते रहोगे। बार-बार रूचि बदलते रहने से कोई भी उन्नत्ति नहीं कर पाओगे।”


युवक महात्मा की बात को समझ गया और एक लक्ष्य निश्चित कर उसी का अभ्यास करने लगा।


शिक्षा:-

उपर्युक्त प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि हम जिस भी कार्य को करें, पूरे तन और मन से से एकाग्रचित होकर करें, बार-बार इधर-उधर भटकने से बेहतर यही की एक जगह टिककर मेहनत की जाएं, तभी सफलता प्राप्त की जा सकती हैं।



परेशानी का अनोखा हल



       एक शहर में एक अमीर आदमी रहता था। उसको पैसों का बहुत घमण्ड था। एक बार किसी कारण से उसकी आँखों मे इन्फेक्शन हो गया और उसकी आँखों मे बुरी तरह जलन होने लगी। वह कई डॉक्टरों के पास गया, लेकिन किसी भी डॉक्टर को उसकी परेशानी समझ नही आयी। वह बहुत परेशान होने लगा। वह अपना इलाज कराने विदेश चला गया। वहाँ एक बड़े डॉक्टर ने उसकी आँखे देखी और कहा – मैंने अपनी पूरी लाइफ में अभी तक ऐसा केस नही देखा है। ( वह आदमी बहुत डर जाता है ) वह डॉक्टर से पूछता है – क्या हुआ डॉक्टर। 


    डॉक्टर कहते है – आपकी आंखों में एलर्जी हो गयी है। आप सिर्फ ‘ हरा रंग देख सकते है। यदि आप हरे कलर के अलावा’ दूसरे कलर’ देखोगे, तो आपकी आंखों में जलन होने लगेगी और धीरे-धीरे आपकी आंखों की रोशनी चली जायेगी। ( वह बहुत उदास हो जाता है )। उसके पास पैसा तो बहुत होता है, इसलिए वह पेंटर को बुलाता है और कहता है – तुम इस घर को ‘ हरा कलर ‘ कर दो और जहाँ भी, मैं जाता हूं, पूरी जगह को हरा कर दो। उसने अपनी गली, सड़क ,बोर्ड सब कुछ हरा करवा दिया। उसने बहुत पैसा खर्च कर दिया, फिर भी कोई ना कोई ऐसी चीज रह जाती। 


        जिसको हरा नही किया जा सकता था। जैसे नीला आसमान, खाना खाने के लिए रोटी, और शरीर का कलर, सब चीजों को हरा कलर नही किया जा सकता था। ( उसका हर रोज बहुत ज्यादा पैसा ख़र्च हो जाता था ) एक दिन उसी गली से एक लड़का निकल रहा था। उसने देखा कि, चारो ओर हरा कलर ही क्यों है। उसने वहां कुछ लोगो से पूछा – कि यहाँ चारो ओर ‘हरा कलर’ क्यों है। लोगो ने बताया कि, यहाँ एक अमीर आदमी रहता है। उसकी आँखों मे एलर्जी है। 


       अगर वह हरे कलर के अलावा दूसरा कलर देखता है तो उसकी आँखों मे जलन होने लगती है। इसलिए सब जगह हरा कलर है। वह लड़का उस आदमी के पास जाता है और कहता है – आपने सभी जगह को हरा क्यों कर दिया है। आपकी परेशानी का दूसरा इलाज भी हो सकता है। आपकी परेशानी का इलाज बहुत ही सस्ता और आसान है। आप वेवजह ही इतना पैसा खर्च करते हो। वह आदमी कहता है – आप बताओ, इस परेशानी का क्या हाल हो सकता है। लड़का कहता है – आपकी परेशानी का हल अभी निकल सकता है। 


      आप एक ‘हरे कलर का चश्मा पहनो।’ जिससे आपको सारी चीजे हरी दिखाई देंगी। जो बहुत ही सस्ता होगा और आपका एक पैसा भी खर्च नही होगा। ( यह सुनकर उस अमीर आदमी की आंखें खुली की खुली रह जाती है ) वह सोचता है, कि कितना आसान तरीका है। मैं, ना जाने कितना पैसा खर्च करता रहा। मैं हड़बड़ी में फैसले लेता रहा। मेरी परेशानी का हल मेरे सामने था। अगर, मैं आराम से इस बारे मे सोचता, तो आसानी से हल निकल आता।


शिक्षा:-

दोस्तों, कई बार हमारे सामने कुछ परेशानियां आ जाती है। जो बहुत ही आसान होती है। उसका हल भी हमारे सामने होता है। लेकिन हम हड़बड़ाहट में ठीक से सोच नहीं पाते हैं और घबरा जाते हैं, जिससे हम अपनी लाइफ में गलत फैसले ले लेते हैं।



शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2021

नये वायुसेना अध्यक्ष विवेक राम चौधरी बने

 भारतीय वायु सेना के 27 वें प्रमुख एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी बने उनका कार्यकाल 30 सितंबर 2021 से सितम्बर 2024 तक होगा ।

इन्होंने राकेश सिंह भदोरिया की जगह ली है जिनका कार्यकाल 30 सितंबर 2021 को समाप्त हुआ है हाल ही में ।


शुक्रवार, 10 सितंबर 2021

मेहनत की कमाई

                       मेहनत की कमाई 

एक दुकानदार का बेटा बहुत आलसी था इसलिए वह बहुत दुखी रहता था अपने बेटे को वह मेहनती इंसान बनाना चाहता था इसलिए मैं हमेशा उसे समझ था लेकिन वह उसकी बात पर ध्यान नहीं देता था ।

एक दिन पिता अपने पुत्र से बोला तुम आज अपनी मेहनत से कुछ कमा कर लाओ नहीं तो आज शाम को तुम्हें खाना नहीं मिलेगा लड़का बहुत परेशान हो गया वह रोते हुए अपनी मां के पास गया और उन्हें सारी बात बताई मां ने बात को सुनकर एक सोने का सिक्का उठाया और बोली जाओ बेटा यह सोने का सिक्का लो और शाम को पिताजी को दिखा देना शाम के समय पिता जी बोले क्या कमा कर लाए हो लड़के ने कहा वह सोने का सिक्का दिखाते हुए बोल रहे कमा कर लाया हूं तो पिताजी ने कहा बेटा ऐसे का अपने खेत के कुएं में डाल दो , बेटे ने तुरंत जाकर उस सिक्के को कुएं में डाल दिया अगले दिन पिता ने अपनी पत्नी को मायके भेज दिया और लड़के को फिर से कमाकर लाने को कहा अबकी बार लड़का रोते हुए अपनी बड़ी बहन के पास गया तो बड़ी बहन ने कहा भाई तू चिंता मत कर यह ₹10 ले और पिताजी पूछे तो बता देना कि तूने कमाए हैं शाम को फिर पिताजी ने पूछा आज तुमने क्या कमाया लड़के ने बहन से लिए हुए रुपए दिखाते हुए कहा यह रुपए कमाए मैंने तो पिता ने कहा ऐसे भी कुएं में डाल दो बेटा ने झट से उसे कुएं में डाल दिया आप पिता ने उसकी बहन को भी ससुराल भेज दिया बेटे को बुलाकर डांट लगाई और फिर कहा कि कमाकर लाओ आओ तो लड़की के पास मेहनत करने के सिवा कोई रास्ता नहीं था वह रोता हुआ बाजार की ओर चल दिया बाजार में उसे एक सेठ मिला सेठ ने कहा यह मेरा लकड़ियों का गट्ठर उठाकर घर तक ले चलो ₹2 दूंगा लड़के ने हामी भर दी उसने लकड़ियां उठाई और सेठ के साथ चल दिया रास्ते में चलते चलते उसके पैरों में छाले पड़ गए और हाथ पैर भी दर्द करने लगे शाम को पिताजी वह आज तो मैंने क्या कमाया तो उसने कहा यह दो रुपए कमाए तो पिताजी बोले जाओ इसे उसी उसी कुएं में डाल दो तो लड़का बोला मैंने इतनी मेहनत से पैसे कमाए हैं और आप कह रहे हैं कि इसे कुएं में डाल दूं मैं नहीं डालूंगा तो पिताजी बोले बेटा तो मैं तुम्हें यही सिखाना चाहता था सोने का सिक्का तो तुमने कुएं में फेंक दिया क्योंकि बाय तुम नहीं नहीं कमाया था लेकिन ₹2 फेंकने में इतना सोच रहे हो इसलिए कि यह तुम्हारी मेहनत की कमाई है आज तुम मेहनत की कमाई का महत्व समझ गए हो पिताजी ने खुश होकर दुकान की जिम्मेदारी बेटे को सौंप दी।

शुक्रवार, 30 जुलाई 2021

रहीमदास जी के दोहे

 दोस्तों आज हम आपके लिए रहीमदास के दोहे लेकर आए हैं , जो हिन्दी साहित्य में बहुत प्रसिद्ध है ।

           रहीमदास का जीवन परिचय 

रहीमदास का पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना था । इनका जन्म लाहौर में सन् 1556 में हुआ था । रहीम अरबी , फारसी , संस्कृत के अच्छे जानकार थे । रहीम , अकबर के दरबार में रहते थे । 

रहीमदास की रचनाएं -  रहीम सतसई , श्रृंगार सतसई , रास पंचाध्यायी ,रहीम रत्नावली आदि ।

रहीमदास के दोहे -

1. रहिमन धागा प्रेम का , मत तोड़ो चटकाय ।

  टूटे से फिर ना जुड़े , जुड़े गाॅंठ पड़ जाय ।।


2. रहिमन पानी राखिए , बिन पानी सब सून ।

    पानी गये न ऊबरै , मोती , मानुष , चून ।।


3. एकै साधै सब सधै , सब साधे सब जाय ।

    रहिमन मूलहिं सीचबों , फूलै फलै अघाय ।।


4. चित्रकूट में राम रहे , रहिमन अवध नरेश ।

   जा पर बिपदा पड़त है , सो आवत यह देश ।।


5. दीरघ दोहा अरथ के , आखर थोरे आहिं ।

   ज्यों रहीम नट कुण्डली , सिमहि कूदि चढ़ि जाहिं ।।


6. धनि रहीम जल पंक को , लघु जिय पिअत अघाय ।

   उदधि बड़ाई कौन है , जगत पिआसो जाय ।।


7. नाद रीझि तन देत मृग , नर धन हेत समेत ।

   ते रहीम पशु से अधिक , रीझेहु कछू न देत।।


8. बिगरी बात बनै नहीं , लाख करौ किन कोय ।

   रहिमन फाटे दूध को , मथे न माखन होय ।।


9. रहिमन देखि बड़ेन को , लघु न दीजिये डारि ।

   जहां काम आवे सुई , कहा करे तलवारि ।।


10. रहिमन निज संपत्ति बिना , कोउ न बिपत्ति सहाय ।

       बिन पानी ज्यों जलज को , नहिं रवि सके बचाय ।।


11. रहिमन पानी  राखिए , बिन पानी सब सून ।

पानी गए न ऊबरै , मोती , मानुष ,चून ।।

सोमवार, 26 जुलाई 2021

नये कैबिनेट मंत्री 2021 / नवीनतम मंत्रीमंडल जुलाई 2021

                नये कैबिनेट मंत्री 2021


  • प्रधानमंत्री  --      नरेन्द्र मोदी
  • रक्षामंत्री  --      राजनाथसिंह
  • गृहमंत्री   --      अमितशाह
  • कानून एवं न्याय मंत्री -- किरण रिजिजू
  • शिक्षा मंत्री       --  धर्मेंद्र प्रधान
  • सूचना और प्रसारण मंत्री , खेल मंत्री -- अनुराग ठाकुर
  • पर्यटन और संस्कृति मंत्री -- जी किशन रेड्डी
  • पशुपालन , मत्स्य , डेयरी मंत्री -- पुरुषोत्तम रूपाला
  • वन , पर्यावरण , श्रम मंत्री -- भूपेंद्र यादव
  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण , रसायन, उर्वरक मंत्री -- मनसुख मंडाविया
  • पेट्रोलियम मंत्री -- हरदीप सिंह पुरी
  • बिजली ( इलेक्ट्रिसिटी ) मंत्री -- राजकुमार सिंह
  • खाद्य प्रसंस्करण, उपभोक्ता मामले मंत्री -- पशुपति कुमार पारस
  • रेलवे , आईटी -- अश्विनी वैष्णव
  • इस्पात मंत्री -- आरसीवी सिंह
  • नागरिक उड्डयन मंत्री -- ज्योतिरादित्य सिंधिया
  • सामाजिक न्याय मंत्री -- वीरेंद्र कुमार
  • आयुष एवं जहाजरानी मंत्री -- सर्वानंद सोनोवाल
  • लघु उद्योग , एम एस एम ई मंत्री  -- नारायण राणे

गुरुवार, 8 जुलाई 2021

चूहा और बैल की प्रेरणादायक कहानी

एक नन्हा-सा चूहा था। वह अपने बिल से बाहर आया। उसने देखा कि एक बड़ा बैल पेड़ की छाया में सोया हुआ है। बैल जोर-जोर से खर्राटें भर रहा था। चूहा बैल की नाक के पास गया और मजा लेने के लिए उसने उसकी नाक में काट लिया। 


बैल हड़बड़ा कर जाग गया। दर्द के मारे वह जोर से डकारा। इससे घबरा कर चूहा सरपट भागा। बैल ने पूरी ताकत से उसका पीछा किया। चूहा दौडकर झटपट दीवार के छेद में घुस गया। अब वह बैल की पहुँच से बाहर था। 


पर बैल ने चूहे को सजा देने की ठान ली थी। उसने गुस्से से चिल्लाकर कहा, "अबे नालायक! मैं तुझे एक ताकतवर बैल को काटने का मजा चखाऊँगा।" बैल ताकतवर था। उसने अपने सिर से दीवार पर जोर से धक्का मारा। पर दीवार भी बहुत मजबूत थी। उस पर कोई असर नही हुआ, बल्कि बैल के सिर में ही चोट लगी। यह देख कर चूहे ने बैल को चिढ़ाते हुए कहा, "अरे मूर्ख, बिना मतलब अपना सिर क्यों फोड़ रहा है? तू कितना ही बलवान क्यों न हो, पर हमेशा तेरे मन की तो नहीं हो सकती।" 


बैल अब भी चूहे को बिना दंड दिए छोड़ देने को तैयार नहीं था। चूहे जैसे एक तुच्छ प्राणी ने उसका अपमान किया था। इस समय वह बहुत क्रोध में था। 


पर धीरे-धीरे उसका जोश कम हुआ। उसे चूहे की बात सही मालूम हुई। इसलिए वह चुपचाप वहाँ से चला गया। 


चूहे के ये शब्द अब भी उसके कान में गूँज रहे थे तू कितना ही बलवान क्यों न हो, पर हमेशा तेरे ही मन की तो नहीं हो सकती। 


मित्रो" बुद्धि शक्ति से बड़ी होती है, इसीलिए हमे सर्व प्रथम बुद्धि द्वारा ही अपने प्रतिद्वंदी को मात देने का प्रयास करना चाहिए।

सोमवार, 5 जुलाई 2021

भारत के राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल

         

         

नमस्कार दोस्तों जैसा कि आप सभी को विदित हो कि आजकल करेन्ट अफेयर्स ( समसामयिकी घटनाचक्र ) से संबंधित प्रश्न अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे एस एस सी , रेलवे , पुलिस , दिल्ली पुलिस , आर्मी आदि में पूछे जाते हैं । जिनमें पद और पदाधिकारियों से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं तो आज हम आपके लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों से संबंधित पोस्ट लेकर आए हैं । 



    1)मध्यप्रदेश --- शिवराज सिंह चौहान --- मंगूभाई छगनभाई पटेल    

    2) छत्तीसगढ --- भूपेश बघेल --- अनुसुईया उईके

    3)राजस्थान --- अशोक गहलोत ---- कल्याणसिहं

    4)तेलंगाना ---- के.चन्द्रशेखर राव --- ई.एस. नरसिम्हन

    5)मिजोरम ----- जोराम थंगा ---  हरिबाबू कंभमपति

    6)गोवा ---- प्रमोद सावंत ----  श्रीधरन पिल्लई

    7)दिल्ली ---- अरविन्द केजरीवाल --- अनिल बैजल

    8) उत्तरप्रदेश ---- योगी आदित्यनाथ ----- आनंदीबेन पटेल

    9) गुजरात ---- विजय रूपाणी ----- आचार्य देवव्रत

  10) उत्तराखण्ड ---- पुष्कर सिंह धामी --- रानीमौर्य

  11) झारखण्ड ----- हेमंत सोरेन ----  रमेश बैस

  12) अरूणाचल प्रदेश --- पेमा खाडू ---- बी.डी. मिश्रा

  13) मणिपुर --- एन. विरेनसिहं ---- जगदीश मुखी

  14) पश्चिम बंगाल --- ममता बनर्जी ---- जगदीप धनखड़

  15) तमिलनाडु --- ई. के. पलानीस्वामी --- बनवारीलाल पुरोहित

  16) पंजाब --- कैप्टन अमरिन्दर सिहं --- वी.पी. सिहं बदनौर

  17) कर्नाटक ---  बासवराज बोम्मई        --  थावरचंद्र गहलोत

  18) महाराष्ट्र --- उद्धव ठाकरे --- सी. विद्यासागर राव

  19) केरल --- पिनरई विजयन --- पी. सदाशिवम

  20) हिमाचल प्रदेश --- जयराम ठाकुर ---  राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर

  21) हरियाणा --- मनोहरलाल खट्टर ---  बंडारू दत्तात्रेय

  22) सिक्किम --- प्रेमसिहं गोले --- गंगाप्रसाद

  23) त्रिपुरा --- बिप्लव कुमार देव ---  सत्यदेव नारायण आर्य

  24) उड़ीशा --- नवीन पटनायक --- गणेशीलाल

  25) नागालैण्ड --- नेफियू रियो --- आरएन रवी

  26) मेघालय ---- कॉनरेड संगमा --- सत्य पाल मलिक

  27) बिहार --- नीतेश कुमार -- फागु चौहान

  28) असम --- सर्वानंद सोनोवाल --- जगदीश मुखी

  29) आन्ध्रप्रदेश --- जगमोहन रेड्डी ---- विश्व भूषण




केन्द्र शासित प्रदेश :-

               केन्द्र शासित प्रदेश लेफ्टिनेंट गवर्नर /प्रशासक

            1) अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह --- देवेन्द्र कुमार जोशी [ LFT ]

            2) चण्डीगढ़ --- वी.पी.सिहं बदनौर [PR ]

            3) दादर और नगर हवेली --- प्रफुल्ल पटेल [ pR ]

            4) दमन और द्वीप --- प्रफुल्ल पटेल [ PR]

            5) दिल्ली --- अनिल बैजल [LFT ]

            6) लक्ष्यद्वीप --- दिनेश्वर शर्मा [PR]

            7) पुदुचेरी --- डॉ. तमिलसाई सुन्दरराजन [LFT]

            8) जम्मू और कश्मीर ---- मनोज सिन्हा

            9) लद्दाख ---- आरके माथुर

हमने इस पोस्ट को त्रुटिपूर्ण बनाने की हर संभव कोशिश की है । फिर भी अगर आपको कोई त्रुटी दिखती है तो हमें कमेन्ट में अवश्य बताएं , हम आपके आभारी होंगे । 

लेखक और संपादक - किरण कुमार बौद्ध

धन्यवाद ।








          

संघर्षशील चिड़िया की प्रेरणादायक कहानी

 


आपको अपनी ताकत को पहचानना होगा...आपको पहचानना होगा कि भले आप छोटी सी चिड़िया की तरह होंगे, लेकिन ताकत की कड़ियां कहीं न कहीं आपसे होकर गुजरती होंगी...हर शेर को सवा शेर मिल सकता है, बशर्ते आप अपनी लड़ाई से घबराएं नहीं...


आप अगर किसी काम के पीछे पड़ जाएंगे तो वो काम होकर रहेगा यकीन कीजिए. हर ताकत के आगे एक और ताकत होती है और अंत में सबसे ताकतवर आप होते हैं. हिम्मत, लगन और पक्का इरादा ही हमारी ताकत की बुनियाद है..!!       


बड़े सपनो को पाने वाले हर व्यक्ति को सफलता और असफलता के कई पड़ावों से गुजरना पड़ता है.


पहले लोग मजाक उड़ाएंगे,फिर लोग साथ छोड़ेंगे, फिर विरोध करेंगे फिर वही लोग कहेंगे हम तो पहले से ही जानते थे की एक न एक दिन तुम कुछ बड़ा करोगे!


रख हौंसला वो मंज़र भी आयेगा,

प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा..! 


थक कर ना बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफ़िर मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा !!

शनिवार, 19 जून 2021

किसी व्यक्ति के साथ अच्छाई करना भी बुरा है

एक रात जब दुकानदार दुकान बंद करने ही वाला था कि दुकान में एक कुत्ता आ गया।

उसके मुंह में एक बैग था।  बैग में खरीदी जाने वाली वस्तुओं और पैसे की एक सूची थी।  दुकानदार ने पैसे लेकर बैग में सामान रख लिया।

कुत्ते ने तुरंत सामान का थैला उठाया और चला गया।  दुकानदार हैरान रह गया और कुत्ते के पीछे जाकर देखने लगा कि मालिक कौन है।

कुत्ता बस स्टॉप पर इंतजार कर रहा था।  कुछ देर बाद एक बस आई और कुत्ता बस में चढ़ गया।  कंडक्टर के आते ही वह अपनी गर्दन की बेल्ट दिखाने के लिए आगे बढ़ा, जिसमें पैसे थे और पता भी।  कंडक्टर ने पैसे लिए और टिकट को फिर से अपने गले की बेल्ट में डाल लिया।

जब वह गंतव्य पर पहुंचा, तो कुत्ता सामने गया और अपनी पूंछ हिलाकर यह संकेत दिया कि वह नीचे उतरना चाहता है।  बस के रुकते ही वह नीचे उतर गई।  दुकानदार उसका पीछा कर रहा था।

कुत्ते ने अपने पैरों से एक घर का दरवाजा खटखटाया।  उसका मालिक अंदर से आया और उसे डंडे से पीटा।

चौंक गए दुकानदार ने उससे पूछा "तुम कुत्ते को क्यों मार रहे हो?", जिस पर मालिक ने जवाब दिया, "उसने मेरी नींद में खलल डाला। यह चाबी अपने साथ ले जा सकता था।"


यही जीवन की सच्चाई है।  लोगों की आपसे उम्मीदों का कोई अंत नहीं है।  जैसे ही आप गलत होते हैं, वे हमारी गलतियों की ओर इशारा करने लगते हैं।  अतीत में किए गए सभी अच्छे भूल जाते हैं।  कोई भी छोटी सी गलती फिर बढ़ जाती है।  यह इस भौतिक संसार की प्रकृति है🔥🔥

बुधवार, 26 मई 2021

प्रमुख पदाधिकारियों की सूची #नवीनतम_कौन_क्या ?

              पद                                      नाम


1) भारत के राष्ट्रपति                     ---  महामहिम रामनाथ कोविंद

2) भारत के उपराष्ट्रपति                ---  एम. वैकैया नायडू

3)भारत के मुख्य न्यायधीश           ----  एन.वी. रमन्ना

4) भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त   ----  सुशील चंद्रा

   अन्य निर्वाचन आयुक्त    ----          राजीव कुमार

5) अटॉर्नी जनरल [ भारत के महान्यायवादी ] --- के. के. वेणुगोपाल

6) भारत की सेना के अध्यक्ष :-
        थलसेना अध्यक्ष           ---  मनोज मुकुन्द नरवड़े

        जलसेना अध्यक्ष          ---  कर्मवीरसिहं(३१ मई से )

        वायुसेना अध्यक्ष          ---  राकेश सिहं भदौरिया ( १ अक्टूबर से )

         वायुसेना उपाध्यक्ष       ----  के. एस. भदौरिया


7) विदेश सचिव            -----    हर्षवर्धन श्रृंगला
8) रिजर्व बैक ऑफ इण्डिया के गवर्नर  ------ शक्तिकांत दास
9) आर्थिक सलाहकार                       ------  कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम्

10) संघ लोकसेवा आयोग ( upsc ) के अध्यक्ष --  प्रदीप जोशी

रविवार, 16 मई 2021

चूहा , कछुआ और बिच्छू की प्रेरणादायक कहानी

एक नदी में बाढ़ आ जाती है ।छोटे से टापू में पानी भर जाता है। वहां रहने वाला सीधा साधा एक चूहा कछुवे से कहता है मित्र क्या तुम मुझे नदी पार करा सकते हो मेरे बिल में पानी भर गया है ?


कछुवा राजी हो जाता है तथा चूहे को अपनी पीठ पर बैठा लेता है


तभी एक बिच्छु भी बिल से बाहर आता है और कहता है मुझे भी पार जाना है मुझे भी ले चलो ।

चूहा बोला मत बिठाओ ये जहरीला है ये मुझे काट लेगा

तभी समय की नजाकत को भांपकर बिच्छू बड़ी विनम्रता से कसम खाकर प्रेम प्रदर्शित करते हुए कहता है भाई कसम से नही काटूंगा बस मुझे भी ले चलो।


कछुआ चूहे और बिच्छू को ले तैरने लगता है।

तभी बीच रास्ते मे बिच्छू चूहे को काट लेता है।

चूहा चिल्लाकर कछुए से बोलता है "मित्र इसने मुझे काट लिया अब मैं नही बचूंगा।


थोड़ी देर बाद उस बिच्छू ने कछुवे को भी डंक मार दिया। कछुवा मजबूर था जब तक किनारे पहुंचा चूहा मर चुका था।।


कछुआ बोला 

"मैं तो इंसानियत से मजबूर था तुम्हे बीच मे नही डुबोया" 

मगर तुमने मुझे क्यों काट लिया ?


बिच्छु उसकी पीठ से उतरकर जाते जाते बोला "मूर्ख तुम जानते नही मेरा तो धर्म ही है डंक मारना चाहे कोई भी हो।"

गलती तुम्हारी है जो तुमने मुझ पर विश्वास किया।


ठीक इसी तरह हमारे लोगों ने भी नदी पार करवाने के लिए कुछ बिच्छुओं को पीठ पर बिठा लिया है।


वे लगातार डंक मार रहे है हमारे लोगो को अगल कर रहे है और हमारी सारी ताकत को खत्म कर रहे है। 

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फलस्वरूप

हर रोज बेचारे निर्दोष बहुजन मर रहे हैं।


गहन विचार कीजिए अपनी आने वाली पीढ़ियों को ताकतवर बनाने के लिए खुद कार्य कीजिए और ज्यादा कुछ नहीं कर सकते तो बस ऐसे मैसेजो को बहुजनो तक पहुंचने का कार्य ही कर दीजिए ये भी एक योगदान ही होगा।।


धन्यवाद ।

बुधवार, 12 मई 2021

समझदार बैल की प्रेरणादायक कहानी #चतुरबैल की कहानी

एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया | 

वह बैल घंटों ज़ोर-ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं ? 

काफी सोच विचार के बाद अंततः उसने निर्णय लिया कि बैल चूँकि अब काफी बूढा हो चुका है अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं है इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिए |

किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी | 

जैसे ही बैल की समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह और जोर - जोर से चीखकर कर रोने लगा और फिर, अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया | 

सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह यह देखकर आश्चर्य से सन्न रह गया...अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था | 

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे-वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एक सीढी ऊपर चढ़ आता जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह बैल कुएँ के किनारे पर पहुँच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया |


 ध्यान रखे आपके जीवन में भी बहुत तरह से मिट्टी फेंकी जायेगी बहुत तरह की गंदगी आप पर गिरेगी जैसे कि, आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही आपकी आलोचना करेगा | कोई आपकी सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला बुरा कहेगा | कोई आपसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो आपके आदर्शों के विरुद्ध होंगे... 

ऐसे में आपको हतोत्साहित हो कर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हर तरह की गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख ले कर उसे सीढ़ी बनाकर बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है | इस मनुष्य जीवन में हमें तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | जीवन में बहुत सारे उतार चढ़ाव आते हैं उनसे विचलित नही होना चाहिए | तमाम बधाओं को पार करते हुए आगे बढ़ते चले जाना है | अपना मनोबल कभी गिरने नही देना है अपना हौसला हमेशा बुलंद रखो |


               सकारात्मक रहे..... सकारात्मक जिए !


√इस संसार में.....

                         सबसे बड़ी सम्पत्ति "बुद्धि "

                         सबसे अच्छा हथियार "धैर्य"

                         सबसे अच्छी सुरक्षा "विश्वास"

                         सबसे बढ़िया दवा "हँसी" है

             और आश्चर्य की बात कि "ये सब निशुल्क है.....  

            

    



सांप और वैद्य की प्रेरणादायक कहानी

एक बार की बात है, एक गाँव में एक वैद्यजी रहते थे। 

वैद्यजी के पास कभी - कभार कोई मरीज आता था क्योंकि उस गाँव में ज्यादातर लोग बीमार नहीं पड़ते थे। 

इससे वैद्यजी की आजीविका में बहुत समस्या आती थी। 

एक दिन वैद्यजी अपनी झोपड़ी से बाहर निकले और एक पेड़ के नीचे जाकर बैठे। तभी उन्हें उस पेड़ के कोटर में एक सांप दिखाई दिया। 

वैद्यजी सोचने लगे कि अगर यह सांप किसी को काट खाए तो कितना अच्छा हो। मैं उसे ठीक करके अच्छा खासा धन कमा सकता हूँ।

तभी वैद्यजी की नजर सामने खेल रहे बच्चों पर पड़ी। उन्होंने बच्चो के पास जाकर कहा.. देखो ! बच्चों उस पेड़ के कोटर में मिट्टू मिया बैठे है। 

बच्चे तो बच्चे होते है, उनमें से एक बच्चा दौड़ा और सीधे जाकर कोटर में हाथ डाल दिया। संयोग से सांप की मुण्डी उसके हाथ में आ गई। 

जैसे ही उसने बाहर निकाला तो डर के मारे उछाल दिया। नीचे अन्य बच्चों के साथ वैद्यजी खड़े थे। 

सांप सीधा वैद्यजी के ऊपर आकर गिरा और कई जगह डस लिया। तड़पते हुयें वैद्यजी की जान निकल गई।

इसलिए कहते है.. "कर बुरा तो हो बुरा”


शिक्षा – दोस्तों ! इसलिए मनुष्य को हमेशा दूसरों का भला सोचना चाहिए, और भला ना हो सके तो कमसे कम बुरा तो नहीं सोचना चाहिए। 

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शुक्रवार, 7 मई 2021

बुद्ध कथा प्रेरणादायक # कहानी

 #बुद्धकथा#

 

एक बार नदी को अपने पानी के प्रचंड प्रवाह पर घमंड हो गया ।  नदी को लगा कि मुझमें इतनी ताकत है कि मैं पहाड़, मकान, पेड़, पशु, मानव आदि सभी को बहाकर ले जा सकती हूँ। 

एक दिन नदी ने बड़े गर्वीले अंदाज में समुद्र से कहा - बताओ! मैं तुम्हारे लिए क्या-क्या लाऊँ ? मकान, पशु, मानव, वृक्ष जो तुम चाहो, उसे मैं जड़ से उखाड़़कर ला सकती हूँ। 

समुद्र समझ गया कि नदी को अहंकार हो गया है, उसने नदी से कहा - यदि तुम मेरे लिए कुछ लाना ही चाहती हो, तो थोड़ी सी घास उखाड़कर ले आओ। 


नदी ने कहा बस इतनी सी बात, अभी लेकर आती हूँ। नदी ने अपने जल का पूरा जोर लगाया, पर घास नहीं उखड़ी, नदी ने कई बार जोर लगाया, लेकिन असफलता ही हाथ लगी। 


आखिर नदी हारकर समुद्र के पास पहुँची और बोली मैं वृक्ष, मकान, पहाड़ आदि तो उखाड़़कर ला सकती हूँ। मगर जब भी घास को उखाड़ने के लिए जोर लगाती हूँ, तो वह नीचे की ओर झुक जाती है और मैं खाली हाथ ऊपर से गुजर जाती हूँ। समुद्र ने नदी की पूरी बात ध्यान से सुनी और मुस्कुराते हुए बोला -  जो पहाड़ और वृक्ष जैसे कठोर होते हैं, वे आसानी से उखड़ जाते हैं । किन्तु घास जैसी विनम्रता जिसने सीख ली हो, उसे प्रचंड आँधी-तूफान या प्रचंड वेग भी नहीं उखाड़ सकता। 


 जीवन में खुशी का अर्थ लड़ाइयाँ लड़ना नहीं, बल्कि उनसे बचना है। कुशलता पूर्वक पीछे हटना भी अपने आप में एक जीत है, क्योंकि अभिमान फरिश्तों को भी शैतान बना देता है और नम्रता साधारण व्यक्ति को भी फरिश्ता बना देती है।

लेखक -  किरण कुमार बौद्ध


💐💐   नमों बुद्धाय जय भीम  💐💐



बुद्धजी की प्रेरणादायक समाज को जागरूक करने वाली कथा #बुद्धकथा

 #बुद्धकथा#

एक बार तथागत बुद्ध अपने शिष्यों के साथ जा रहे थे । रास्ते में कुछ गड्ढे खुदे पड़े थे । और उनके अंदर नर कंकाल पड़े थे।

 उनको देखकर बुद्ध के शिष्य ने पूछा - "तथागत, इन गड्ढों में ये नर कंकाल क्यों पड़े हैं?" 

तथागत चुप रहे ।

फिर कुछ दूर चलने के बाद वहाँ पर भी गड्ढों में नर कंकाल पड़े मिले।

 तथागत के शिष्य ने फिर पूछा, "तथागत, इन गड्ढों में नर कंकाल क्यों पड़े हैं?" 

तथागत बुद्ध ने कहा, "इन लोगों को प्यास लगी थी, इन लोगों ने कुआँ खोदना चाहा, लेकिन ये लोग अलग-अलग कुआँ खोदने में लग गए और कुआँ खोदते-खोदते ही मर गए । न तो उनको पानी मिला, न ही इनकी प्यास बुझी । यदि ये लोग एक साथ मिलकर एक कुआँ खोदते तो कुआँ भी खुदता, शक्ति भी कम लगती, इनकी प्यास भी बुझती और ये जिंदा भी रहते।

आज ठीक इसी तरह  समाज के लोग अलग-अलग लड़ रहे हें और अपनी शक्ति को नष्ट कर रहे हैं। जिससे उनकी समस्यायें खत्म होने की बजाय बढ़ती जा रही हैं।  इसलिये एक साथ मिलकर लड़िये अन्यथा वही होगा जो उपरोक्त कुआँ खोदने वालों का हुआ।

 जय भीम नमो बुद्धाय ।

लेखक - किरण कुमार बौद्ध " बुलबुल भैया "



बुधवार, 28 अप्रैल 2021

शेर और कुत्ते की प्रेरणादायक कहानी

 

एक बूढ़ा शेर और एक जवान शेर मे गहरी दोस्ती थी ।दोनों हर वक्त साथ में रहते थे। मिलकर शिकार करना घूमना और मस्ती करना यह उनका काम था। पूरे जंगल मे उनकी दोस्ती की चर्चा थी , लेकिन एक दिन दोनों के बीच एक छोटी सी बात को ले कर टकराव हो गया और दोस्ती टूट गई । दोनों अलग हो गए , दुश्मनी इतनी बढ़ी कि अब एक दूसरे  का चहेरा देखना भी पसंद नहीं करते थे ।
एक दिन बूढ़े शेर पर जंगली कुत्तों ने हमला कर दिया । शेर बूढ़ा था , कमजोर था, इसलिए कुत्ते उसे नोचने लगे । बूढ़ा शेर थक चुका था । अब उनका कमजोर शरीर उनका साथ नही दे रहा था ।



तब दूर खड़ा उनका जवान शेर उनको बचाने आ गया । वो दहाड़ कर बोला तुम डरना नहीं मै तुम्हारे साथ हूं । जवान शेर कुत्तो पर टूट पड़ा । उनका गुस्सा देख कर कुत्ते भाग खड़े हुए । बूढ़े शेर को बचाने के बाद जवान शेर वहां से जा ने लगा । तब एक तीसरे शेर ने उनको आवाज़ दी और उनको रोका । जवान शेर रुका ।
तीसरे शेर ने जवान शेर को पूछा कि एक बात बताओं तुम्हारी और बूढ़े शेर की तो दोस्ती टूट चुकी है तुम दोनों तो दुश्मन हो फिर भी तुमने बूढे शेर की जान क्यों बचाई? तब जवान शेर ने जवाब दिया । आपस की दुश्मनी अलग बात है लेकिन जब बात कौम या समाज हो तो उठकर मुकाबला करना चाहिए । अगर ऐसा नही करेंगे तो कुत्ते हम पर राज करेंगे और ये मुझे मंजूर नहीं है ।

अतः मेरे प्यारे आंबेडकरवादी दोस्तों वक़्त है, जाग जाइए । तुम शेर हो और तुम पर कुत्ते इसीलिए राज करते है क्योंकि तुम मे  जवान शेर जैसी सोच नहीं है।
आपने इस कहानी को पढ़ने में इतना समय दिया , इसके लिए हम आपके आभारी हैं ।

लेेखक -  किरण कुमार बौद्ध

सभी दोस्तों को जय भीम नमो बुद्धाय 🙏🙏

बुधवार, 21 अप्रैल 2021

अच्छे कर्म और बुरे कर्म _ शिक्षाप्रद कहानी


एक दिन एक राजा ने अपने तीन मन्त्रियो को दरबार में  बुलाया, और  तीनो  को  आदेश  दिया  के  एक - एक  थैला  ले  कर  बगीचे  में  जाएं  , और वहां  से  अच्छे - अच्छे  फल  (fruits ) जमा  करें ।

वो  तीनो  अलग - अलग  बाग़  में   गए ,


पहले  मन्त्री  ने  कोशिश  की  के  राजा  के  लिए  उसकी पसंद  के  अच्छे  अच्छे  और  मज़ेदार  फल  जमा  किए जाएँ , उस ने  काफी  मेहनत  के  बाद  बढ़िया और  ताज़ा  फलों  से  थैला  भर  लिया ।


दूसरे मन्त्री  ने  सोचा  राजा  हर  फल  का परीक्षण  तो करेगा नहीं , इस  लिए  उसने  जल्दी  जल्दी  थैला  भरने  में  ताज़ा , कच्चे , गले  सड़े फल  भी  थैले  में  भर  लिए ।🍏


तीसरे  मन्त्री  ने  सोचा  राजा  की  नज़र  तो  सिर्फ  भरे  हुवे थैले  की  तरफ  होगी  वो  खोल  कर  देखेगा  भी  नहीं  कि  इसमें  क्या  है , उसने  समय बचाने  के  लिए  जल्दी  जल्दी  इसमें  घास , और  पत्ते  भर  लिए  और  वक़्त  बचाया ।


🍋

दूसरे  दिन  राजा  ने  तीनों मन्त्रियो  को  उनके  थैलों  समेत  दरबार  में  बुलाया  और  उनके  थैले  खोल  कर  भी  नही देखे  और  आदेश दिया  कि , तीनों  को  उनके  थैलों  समेत  दूर  स्थान के एक जेल  में  ३  महीने  क़ैद  कर  दिया  जाए .




🍒

अब  जेल  में  उनके  पास  खाने  पीने  को  कुछ  भी  नहीं  था  सिवाए  उन  थैलों  के ।

तो  जिस मन्त्री ने  अच्छे  अच्छे  फल  जमा  किये  वो  तो  मज़े  से  खाता  रहा  और  3 महीने  गुज़र  भी  गए ,


🍇

फिर  दूसरा  मन्त्री जिसने  ताज़ा , कच्चे  गले  सड़े  फल  जमा  किये  थे,  वह कुछ  दिन  तो  ताज़ा  फल  खाता  रहा  फिर  उसे  ख़राब  फल  खाने  पड़े , जिस  से  वो  बीमार  होगया  और  बहुत  तकलीफ  उठानी  पड़ी ।


और  तीसरा मन्त्री  जिसने  थैले  में  सिर्फ  घास  और  पत्ते  जमा  किये  थे  वो  कुछ  ही  दिनों  में  भूख  से  मर  गया ।

अब  आप  अपने  आप  से  पूछिये  कि  आप  क्या  जमा  कर  रहे  हो  ? 🤔❓


🍑

आप  इस समय जीवन के  बाग़  में  हैं , जहाँ  चाहें  तो  अच्छे कर्म जमा  करें ..

चाहें  तो बुरे कर्म ,

मगर याद रहे जो आप जमा करेंगे वही आपको आखरी समय काम आयेगा ।


💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

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धन्यवाद 

मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

बहुत ही ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक पंक्तियां

Motivation quite -

जीभ जन्म से होती है 

और मृत्यु तक रहती है.....

क्योकि वो कोमल होती है.

दाँत जन्म के बाद में आते है 

और मृत्यु से पहले चले जाते हैं.. 

क्योकि वो कठोर होते है। 


छोटा बनके रहोगे तो 

मिलेगी हर बड़ी रहमत...

बड़ा होने पर तो 

माँ भी गोद से उतार देती है.

पानी के बिना नदी बेकार है,

     अतिथि के बिना आँगन बेकार है,

   प्रेम न हो तो सगे-सम्बन्धी बेकार है, 

       पैसा न हो तो पाकेट बेकार है,

           और जीवन में गुरु न हो 

               तो जीवन बेकार है,,

                इसलिए जीवन में 

         "गुरु"जरुरी है.. "गुरुर" नही.ं

यदि कबीर जिन्दा होते तो आजकल के दोहे यह होते :-


🔹नयी सदी से मिल रही, दर्द भरी सौगात!

       बेटा कहता बाप से, तेरी क्या औकात!!

🔹पानी आँखों का मरा, मरी शर्म औ लाज!

      कहे बहू अब सास से, घर में मेरा राज!!

🔹भाई भी करता नहीं, भाई पर विश्वास!

     बहन पराई हो गयी, साली खासमखास!!

🔹मंदिर में पूजा करें, घर में करें कलेश!

      बापू तो बोझा लगे, पत्थर लगे गणेश!!

🔹बचे कहाँ अब शेष हैं, दया, धरम, ईमान!

      पत्थर के भगवान हैं, पत्थर दिल इंसान!!

🔹पत्थर के भगवान को, लगते छप्पन भोग!

      मर जाते फुटपाथ पर, भूखे, प्यासे लोग!!

🔹फैला है पाखंड का, अन्धकार सब ओर!

     पापी करते जागरण, मचा-मचा   कर शोर!

🔹पहन मुखौटा धरम का, करते दिन भर पाप!

     भंडारे करते फिरें, घर में भूखा बाप!😒😒😒😒

मन लगाकर पढ़िये और दिल से सोचो की माँ के दिल पर क्या गुजरती हैं जब ये उनके साथ होता हैं:~

🔆वाह रे जमाने तेरी हद हो गई, 

    बीबी के आगे मदर रद्द हो गई !


♻बड़ी मेहनत से जिसने पाला, 

    आज वो मोहताज हो गई ! 

♻और कल की छोकरी, तेरे   

    सर का ताज हो गई !

♻बीवी हमदर्द और मॉं सरदर्द 

     हो गई !


    🔆वाह रे जमाने तेरी हद .........

♻पेट पे सुलाने वाली, पैरों में सो 

       रही है !

♻बीवी के लिए लिम्का, 

      मॉं पानी को रो रही है ! 

♻सुनता नहीं कोई, वो आवाज 

     देते देते सो गई !


    🔆वाह रे जमाने तेरी हद .........

♻मॉं मांजती है बर्तन , वो सजती

       संवरती है !

♻अभी निपटी ना बुढ़िया तू , 

       इस लीये उस पर बरसती है !

♻अरे दुनिया को आई मौत, 

       मौत तेरी कहॉ गुम हो गई !


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