गुरुवार, 16 नवंबर 2023

अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2023 - 24 कक्षा 9 वीं से कक्षा 12 वीं समय सारणी । Halfyearly exams 2023 - 24 class 9th to 12th time table download

 


अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2023 - 24 कक्षा 9 वीं से कक्षा 12 वीं समय सारणी ।  


कक्षा  9 वीं एवं कक्षा 10 वीं के लिए समय सारणी








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कक्षा  11 वीं एवं कक्षा 12 वीं के लिए समय सारणी


गुरुवार, 2 नवंबर 2023

बाबूजी उठे नहीं क्या अभी तक?

 बहुत अच्छी कहानी है समय मिलने पर पढ़िएगा जरूर😊


🍂(बाबूजी उठे नहीं क्या अभी तक ?)

   

" अमित, अरे बाबूजी उठे नहीं क्या अभी तक ? टाइम पर दवा नहीं लेने से उनकी तबियत बिगड़ जाती है। अमित, जरा देखोगे क्या उनके कमरे में जाकर ? मैं रोटियाँ बना रही हूँ, सब्जी भी गैस पर रखी है, तुम्हारा टिफिन भी लगाना है अभी। जागते ही चाय चाहिए उनको, वो भी सुबह ठीक सात बजे। अब तो पौने आठ बज रहे हैं, आज चाय-चाय करते किचन तक आए भी नहीं। "🍂

 

अदिति की बातें सुनते अमित को भी आश्चर्य हुआ। बाबूजी आज अभी तक उठे क्यों नहीं ? वो तुरंत उनके कमरे में गया। बाबूजी अभी बिस्तर पर ही थे, गहरी नींद में। 

अमित ने उन्हें आवाज दी : " बाबूजी, उठिए, आठ बजने को आए। आज चाय नहीं पीनी क्या ? "🍂


कोई जवाब न पाकर अमित ने उन्हें हिलाया और जगाने की कोशिश की लेकिन उनके एकदम ठंडे पड़े शरीर के स्पर्श से वह चौंक गया और चीखा : " अदितिsss...अदितिsss...इधर आओ जरा। देखो, बाबूजी उठ नहीं रहे हैं। "🍂


रोटी बेलना छोड़, सब्जी की गैस बंद कर अदिति तेजी से बाबूजी के कमरे में पहुँची। 


अमित को कुछ सूझ नहीं रहा था। बोला : " अदिति, देखो, बाबूजी उठते नहीं हैं। "🍂


अदिति ने भी कोशिश की मगर बाबूजी न जागे। उसकी आँखों से अश्रु बह निकले फिर खुद को मानो सांत्वना देती हुई वह बोली : " जरूर रात की दवाओं के असर से गहरी नींद में हैं। ठहरो मैं डॉक्टर को फोन करती हूँ। "


अदिति ने बाबूजी के रेग्युलर डॉक्टर को कॉल किया : " हलो डॉक्टर साहब, मैं गीता बोल रही हूँ। "🍂


डॉक्टर : " हाँ, गीता, बोलो। बाबूजी तो ठीक हैं न ? परसों ही तो उन्हें चैक किया था, बीपी बढ़ा हुआ था इसलिए मैंने दवाई भी चेंज कर दी है। " 🍂

🍂

अदिती : " डॉक्टर साहब, बाबूजी उठ नहीं रहे। प्लीज आप जल्दी घर आएँगे क्या ? "🍂


डॉक्टर : " हाँ... हाँ... मैं तुरंत आता हूँ। "


10 मिनिट में डॉक्टर साहब आ गए। बाबूजी को चैक किया। फिर अमित की पीठ पर सांत्वना की थपकी देते हुए बोले : " सुबह-सुबह ही डेथ हुई है इनकी। बीपी ही इनपर भारी गुजरा। मैं डेथ सर्टिफिकेट बना देता हूँ। "


डॉक्टर की बात सुन, अदिति हिचकियाँ ले-लेकर रोने लगी।


डॉक्टर ने उसे कहा : " गीता, जन्म-मरण हमारे हाथ में थोड़ी होता है और फिर उम्र भी तो हो गई थी इनकी। होनी को कौन टाल सकता है। "🍂


फिर अमित की ओर देखते वे बोले : " मैं तो कहता हूँ, अच्छा ही हुआ जो तकलीफ से निजात पा गए। अल्जाइमर रोग बहुत तकलीफदेह होता है, खुद पेशेंट के लिए भी और उसके नाते-रिश्तेदारों के लिए भी। "🍂


" डेथ सर्टिफिकेट पर उनका नाम क्या लिखूँ ? उन्हें चैक करने आता था तो तुम लोगों की देखा-देखी मैं भी उन्हें बाबूजी ही कहता था। गीता के बाबूजी के रूप में ही जानता हूँ मैं इन्हें। " ---डॉक्टर ने आगे कहा।🍂

 

थोड़ी देर के लिए अमित और अदिति सकपकाए से एक दूसरे का मुँह देखने लगे फिर गीता ने चुप्पी तोड़ी और डॉक्टर से बोली : " डॉक्टर साहब, मेरा नाम गीता नहीं, अदिति है। पिछले दस सालों से मैं बाबूजी के लिए गीता बनी हुई थी। "


डॉक्टर : " क्या मतलब ? "🍂


अदिति : " कोई 10 साल पुरानी बात है डॉक्टर साहब, मैं साग-भाजी लेने सब्जी मार्केट गई थी। खरीदारी के बाद जब मार्केट से बाहर आई और किसी खाली रिक्शे की तलाश में इधर-उधर देख रही थी तभी, गीताss गीताss पुकारते एक बुजुर्गवार मेरे करीब पहुँचे और मेरी बाँह पकड़ मुझसे बोले, गीताss, अरे मुझे अपना घर ही नहीं मिल रहा। कब से मैं यहाँ खड़ा हूँ लेकिन किधर जाऊँ कुछ समझ ही नहीं आ रहा। अच्छा हुआ तू आ गई। चल, अब घर चलें। "🍂


" बुजुर्गवार किसी अच्छे घर के लग रहे थे, दिखने में भी और कपड़ों से भी। मेरा हाथ थामे बोलने लगे, गीताsss चल जल्दी। मुझे कबसे भूख लगी है। " 


" मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ ? बुजुर्गवार की स्नेहमयी, मीठी वाणी सुन सोचा कि, उनको घर ले जाती हूँ। कुछ खिलाकर, शांति से उनका एड्रेस पूछती हूँ और फिर उन्हें उनके घर छोड़ आती हूँ। अतः रिक्शे पर हम दोनों घर आए। "🍂


" घर पहुँचते ही, बुजुर्गवार बोलने लगे, गीताsss जल्दी खाना दे, बहुत भूख लगी है। "


" मैंने जल्दी से थाली में उन्हें उपलब्ध भोजन परोसा तो कई दिनों के उपवासे जैसे वे तेजी से खाने लगे। भरपेट भोजन के बाद मैंने उनसे पूछा, बाबूजी आप कहाँ रहते हो ? याद है क्या आपको ? चलो मैं आपको, आपके घर छोड़ आती हूँ। " 


बुजुर्गवार बोले : " अरे गीता, यही तो है अपना घर। "


" मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था। फिर वे बाहर सोफे पर ही सो गए। "🍂


" शाम को अमित के घर आने पर मैंने सारा किस्सा सुनाया। फिर अमित के कहने पर हमने न्यूजपेपर में गुमशुदा वाले पृष्ठ पर और टीवी के गुमशुदा वाले कार्यक्रम के माध्यम से बुजुर्गवार का एड्रेस और नाते-रिश्तेदारों का पता करना प्रारंभ किया। अमित ने पुलिस थाने में भी बुजुर्गवार की जानकारी दी। पुलिस ने कहा, कुछ पता चलने पर खबर करेंगे। तब तक बुजुर्गवार को अपने घर पर रखो या तुम्हें दिक्कत हो तो उन्हें सरकारी वृद्धाश्रम अथवा अस्पताल में दाखिल करवा दो। "🍂

 

" गीता...गीता...पुकारते वे मेरे आगे-पीछे घूमा करते। गीता आज भिंडी की सब्जी बना, आज बेसन के भजिए वाली कढ़ी बना, आज हलवे की इच्छा है, ऐंसी फरमाइशें किया करते। उनकी बातें, उनका अपनापन देख-सुन मेरा मन भर-भर आता। बड़े हक से वे मुझे हर बात कहते जो मुझे भी बहुत भाता। "


" हफ्ता गुजर गया लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। उनसे कोई हेल्प नहीं मिलती लेकिन घर में रह रहे एक बुजुर्ग का अस्तित्व हमें खूब अच्छा लगने लगा। उनके लिए कुछ करना हमें खूब भाता। "


" मैंने और अमित ने निर्णय लिया कि हम उन्हें कहीं नहीं भेजेंगे, अपने घर पर अपने साथ ही रखेंगे। फिर हमने पुलिस थाने में भी अपने इस निर्णय की सूचना दे दी। बस तभी से बुजुर्गवार हमारे बाबूजी बन गए। "


" दस बरस हो गए मेरा दूसरा नामकरण गीता हुए। आज बाबूजी के साथ गीता का भी अस्तित्व समाप्त हो गया। " ---बोलते हुए अदिति की आँखों से पुनः झर-झर आँसू बहने लगे।

 

🍂अदिति से सारा किस्सा सुन डॉक्टर निशब्द हो गए। थोड़ी देर बाद बोले : " इतने सालों में मुझे जरा भी महसूस नहीं हुआ कि, ये तुम्हारे पिता नहीं बल्कि कोई गैर हैं। सच कहूँ तो अल्जाइमर बड़ा गंभीर रोग है। आजकल वृद्ध लोगों में यह समस्या बढ़ती ही जा रही है। "🍂

" आज के दौर में खुद की औलादें अपने माता-पिता को साथ रखना पसंद नहीं कर रहीं। पैसे-प्रोपर्टी वसूली कर वृद्ध माता-पिता की जवाबदारी से मुँह मोड़ लेने का चलन समाज में बढ़ गया है। दिनोंदिन वृद्धाश्रमों में भीड़ बढ़ती ही जा रही है। लेकिन इसी समाज में आप जैसे लोग भी हैं, यह मेरे लिए बेहद आश्चर्य का विषय है। "🍂


फिर डॉक्टर साहब खामोश हो गए। उन्होंने अमित और अदिति की पीठ पर प्यार और सांत्वना भरी थपकी दी। फिर बाबूजी का डेथ सर्टिफिकेट उन्हें सौंपा और डबडबाई आँखों से घर के मुख्यद्वार की ओर बढ़ गए।।🙏

सोमवार, 30 अक्टूबर 2023

जिला मुरैना की भाषा सीखने के लिए मुरैना के प्राचीन शब्दकोष से लिए गये चुनिंदा

 जिला मुरैना   की भाषा सीखने के लिए

मुरैना की प्राचीन Dictionary से लिए

गए कुछ चुनिंदा शब्द

Excuse me - नैक सुनियो

what- का

why- काये / काइकों

really - अरे रहन देओ??

oh no- अरे नानै

hey dude- ए लला

hey girl- ऐ लली

whats up- का है रओ ए

done - है गओ

not done - नानै भओ

Let him go - जान्न देओ बाय

i dont know-मोय ना मालिम

hurry - चटकई

Smooth -चीकनो

Lady - बहूठिया

man - मर्द

Father- बाप

mother - मइयो

Grand father - डोकरा

Grand mother - डुकरिया

Resolved - निबटाये लओ

Slapping - सूत दओ

run away - भागि जा

stay here - झईं रइयो

now - अबई

not now- अबै नानै

never- कभऊ नईं

Wife - बहू

Husband- आदमी

Boy- मौड़ा

Girl- मौडी

Come here- हियन आ

Go There- उतै जा

Same to same- जैसे को तैसो

Sunlight - घाम

shadow - छाई

very- भौत

less - नैक

basket- डलिया

gate- किबाड़

neck- गरो

Knee- घोंटू

Finger - उंगरिया

ox- बदिया

rat-चुखरा

Confused - लालटेन झप्प।।।

पिंजरे में तोता शिक्षाप्रद कहानी

 *प्रेम मालिक नहीं सेवक है* !!


" बड़ा वह है,जो औरो की पीड़ा पहचाने " !!


_*पढ़ने से पहले... धीरे से अपनी आँखें बन्द करें... और अपने माँ के पवित्र प्रेम को महसूस करें...*_  


*पिंजरे में तोता*


एक दिन दस साल का एक बच्चा अपनी माँ से एक सवाल पूछता है, "माँ हमारा तोता हमेशा हमसे दूर उड़ने को क्यों आतुर रहता है? वह अपनी जगह पर खुश क्यों नहीं लगता? मैं उसे इतना प्यार देता हूँ, उसकी पसंद का खाना खिलाता हूँ, उसकी इतनी देखभाल करता हूँ, उसे बाहर के जानवरों से बचाता हूँ, बाहर भी घुमाता हूँ, फिर भी वह मुझसे दूर क्यों जाना चाहता है?" 


तब महिला ने बहुत ही प्यार से जवाब दिया, “बेटा पहले एक खेल खेलते हैं और उसके बाद मैं इस सवाल का जवाब दूँगी, ठीक है ना?”


बच्चा उत्तर जानने के लिए उतावला तो था, लेकिन वह मान गया।


माँ ने कहा, "बेटा, आज तुम्हें इसी कमरे में रहना होगा, मैं तुम्हें सब कुछ तुम्हारे कमरे में लाकर दूँगी। तुम्हारे पसंद के खिलौने, पसंद का खाना, अच्छा बिस्तर और वह सब कुछ जो तुम्हें पसंद है।" बच्चा उत्साहित और खुश होकर मान गया और बोला "माँ मुझे सब कुछ मिल जाएगा ना?" 


महिला ने कहा, "हाँ बेटा! लेकिन एक शर्त है, तुम्हें इस कमरे से बाहर नहीं जाना है, ठीक है ना?"


बच्चा राज़ी हो गया और बोला, "माँ मुझे बाहर निकलने की ज़रूरत ही नहीं है, मैं कमरे में बहुत खुश हूँ! आप सब कुछ जो मुझे पसंद है वह लाकर दोगे तो मैं कमरे से बाहर आने के बारे में सोचूंगा भी क्यों?"


महिला मुस्कुराई और कहा, "ठीक है, तुम मौज करो।"


एक घंटे के बाद महिला ने अपने बेटे के कुछ दोस्तों को घर में खेलने के लिए बुलाया। उनके बेटे ने दोस्तों को देखा लेकिन नज़रअंदाज कर दिया क्योंकि वह कमरे में आनंद ले रहा था। 


तीन घंटे के बाद बच्चा थक गया और कमरे से बाहर आना चाहता था, लेकिन महिला ने कहा, "नहीं बेटा, तुम्हें और क्या चाहिए मुझे बताओ, मैं तुम्हें सब लाकर दूँगी लेकिन तुम कमरे से बाहर नहीं आ सकते।"


फिर बच्चा उदास हो गया और एक घंटे बाद रोने लगा और बोला, "मुझे कुछ नहीं चाहिए माँ, बस मैं इस कमरे से बाहर आना चाहता हूँ और मैं जिस तरह से चाहूँ वैसे मज़े लेना चाहता हूँ, मैं आज़ाद होना चाहता हूँ। कृपया मुझे बाहर निकालो।"


महिला ने उसे बाहर निकाला और बेटे से पूछा, "क्या हुआ? मैंने तुम्हें वह सब कुछ दिया जो तुम्हें चाहिए था, मैं तुम्हारे साथ थी, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, फिर भी तुम उदास हो और रो रहे हो, क्यों?" 


तब बच्चे ने नम आँखों से उत्तर दिया और कहा, "माँ यह कैसा प्यार और देखभाल है? मैं वह नहीं कर पा रहा था जो मुझे पसंद है। मैं आपके द्वारा खींची गई इस सीमा से बाहर नहीं जा सकता था। मुझे ऐसा लगा जैसे मैं तोते की तरह पिंजरे में हूँ। और आप पूछ रहे हैं कि मैं क्यों रोया?"


तब वह महिला मुस्कुराई और जवाब दिया, "बेटा मुझे उम्मीद है कि अब तुमको तुम्हारा जवाब मिल गया होगा।


*तुम उस तोते से प्यार नहीं करते* बल्कि उसे पसंद करते हो, क्योंकि उसे अपने साथ देखकर तुमको खुशी मिलती है। तुम्हें ऐसा लगता है कि तुम उसे सब कुछ दे रहे हो लेकिन तोते को इन सबकी ज़रूरत नहीं होती। वह तो बस आकाश में उड़ना चाहता है और अपनी आज़ादी के मज़े लेना चाहता है और तुम यह सोच रहे हो की तुम उससे प्यार करते हो। लेकिन वास्तव में हम उसकी आज़ादी को छीन रहे हैं और चाहते हैं कि वह हमारे साथ खुश रहे, बिना खुद के बारे में सोचे!


बेटा हम अक्सर यह गलती कर बैठते हैं, सोचते हैं कि हम एक इंसान को इतना कुछ दे रहे हैं, उससे इतना प्यार करते हैं फिर भी वो खुश क्यों नहीं है?   


इस पिंजरे को खोलो और उस तोते को उड़ने का मौका दो और देखो कि क्या वह तोता तुम्हारे पास वापस आएगा?


हो सकता है कि वह दूर न जाए, लेकिन क्योंकि तुम उसे पकड़े हुए हो, वह दूर जाने की कोशिश करता है। अगर वह तुमसे सही मायने में प्यार करता है तो उसे किसी पिंजरे की ज़रूरत नहीं होगी और अगर नहीं, तो कोई भी पिंजरा उसे पकड़ नहीं पाएगा। मुझे आशा है कि तुम मेरी बात को समझ गए होगे।" 


*सच्चा प्यार तब होता है जब आप दूसरे की खुशी देख सकें और उन्हें वैसा करने दें जैसा वे चाहते हैं।*


                           ♾️ 


*“प्रेम वह है जो प्रियतम को स्वतंत्रता दे। पिंजरे से उड़ा पंछी भी वापस लौट आता है।”*


❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

गुरुवार, 26 अक्टूबर 2023

शेर - शायरी विकास दिव्यकीर्ति सर

 

अगर तू है हरजाई , तो अपना भी तौर सही। 

तू नहीं कोई और सही , कोई और नहीं तो कोई और सही।।


तू नहीं कोई और सही , कोई और नहीं  , कोई और सही।

बहुत लम्बी है जमीं , मिलेगे लाख हसीं इस जमाने में सनम ।।

बुधवार, 25 अक्टूबर 2023

वक्त बदलते देर नहीं लगती

 #IAS story को जरूर पढ़ना 

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 बाहर  बारिश  हो  रही  थी, और अन्दर  क्लास  चल रही  थी.

तभी  टीचर  ने  बच्चों  से  पूछा - अगर तुम  सभी  को  100-100 रुपया  दिए जाए  तो  तुम  सब  क्या  क्या खरीदोगे ?


किसी  ने  कहा - मैं  वीडियो  गेम खरीदुंगा..


किसी  ने  कहा - मैं  क्रिकेट  का  बेट खरीदुंगा..


किसी  ने  कहा - मैं  अपने  लिए  प्यारी सी  गुड़िया  खरीदुंगी..


तो, किसी  ने  कहा - मैं  बहुत  सी चॉकलेट्स  खरीदुंगी..


एक  बच्चा  कुछ  सोचने  में  डुबा  हुआ  था  

टीचर  ने  उससे  पुछा - तुम  

क्या  सोच  रहे  हो, तुम  क्या खरीदोगे ?


बच्चा  बोला -टीचर  जी  मेरी  माँ  को थोड़ा  कम  दिखाई  देता  है  तो  मैं अपनी  माँ  के  लिए  एक  चश्मा खरीदूंगा !


टीचर  ने  पूछा  -  तुम्हारी  माँ  के  लिए चश्मा  तो  तुम्हारे  पापा  भी  खरीद सकते  है  तुम्हें  अपने  लिए  कुछ  नहीं खरीदना ?


बच्चे  ने  जो  जवाब  दिया  उससे टीचर  का  भी  गला  भर  आया !


बच्चे  ने  कहा -- मेरे  पापा  अब  इस दुनिया  में  नहीं  है  

मेरी  माँ  लोगों  के  कपड़े  सिलकर मुझे  पढ़ाती  है, और  कम  दिखाई  देने  की  वजह  से  वो  ठीक  से  कपड़े नहीं  सिल  पाती  है  इसीलिए  मैं  मेरी माँ  को  चश्मा  देना  चाहता  हुँ, ताकि मैं  अच्छे  से  पढ़  सकूँ  बड़ा  आदमी बन  सकूँ, और  माँ  को  सारे  सुख  दे सकूँ.!


टीचर -- बेटा  तेरी  सोच  ही  तेरी कमाई  है ! ये 100 रूपये  मेरे  वादे के अनुसार  और, ये 100 रूपये  और उधार  दे  रहा  हूँ। जब  कभी  कमाओ तो  लौटा  देना  और, मेरी  इच्छा  है, तू  इतना  बड़ा  आदमी  बने  कि  तेरे सर  पे  हाथ  फेरते  वक्त  मैं  धन्य  हो जाऊं !


20  वर्ष  बाद..........


बाहर  बारिश  हो  रही है, और अंदर क्लास चल रही है !


अचानक  स्कूल  के  आगे  जिला कलेक्टर  की  बत्ती  वाली  गाड़ी आकर  रूकती  है  स्कूल  स्टाफ चौकन्ना  हो  जाता  हैं !


स्कूल  में  सन्नाटा  छा  जाता  हैं !


मगर ये क्या ?


जिला  कलेक्टर  एक  वृद्ध  टीचर के पैरों  में  गिर  जाते  हैं, और  कहते हैं -- सर  मैं ....   उधार  के  100  रूपये  लौटाने  आया  हूँ !


पूरा  स्कूल  स्टॉफ  स्तब्ध ! 


वृद्ध  टीचर  झुके  हुए  नौजवान कलेक्टर  को उठाकर भुजाओं में कस लेता है, और रो  पड़ता  हैं !


दोस्तों --

मशहूर  होना, पर मगरूर  मत  बनना।

साधारण रहना, कमज़ोर  मत  बनना।


वक़्त  बदलते  देर  नहीं  लगती..


शहंशाह  को  फ़कीर, और  फ़क़ीर को शहंशाह  बनते,


देर  नही  लगती ....


यह छोटी सी कहानी आप  के साथ शेयर की है, अगर दिल को छू गयी हो तो कृपया शेयर करें।

पोस्ट - Ashok kumar

विभिन्न वस्तुओं के पीएच मान

 ❇️  pH मान [ pH value ] ❇️


अक्सर देखा गया है कि किसी न किसी का pH value
पूछ ही लिए जाता है। सारे pH value का एक साथ
आप Note बना लीजिये
━━━━━━━━━━━━━━━━━━
▪️ जल का  pH मान कितना होता है  ?
Ans  - 7

▪️ दूध का pH मान कितना होता है ?
Ans -  6.4

▪️ सिरके  का pH कितना होता है ?
Ans  - 3

▪️ मानव रक्त का pH मान  कितना होता है ?
Ans  - 7.4

▪️ नीबू  के रस का pH मान कितना होता है ?
Ans  - 2.4

▪️ NaCl का pH मान कितना होता है ?
Ans  - 7

▪️ pH पैमाने का पता किसने लगाया था ?
Ans  - सारेन्सन ने

▪️ अम्लीय घोल का pH मान कितना होता है ?
Ans  - 7 से कम

▪️ उदासिन घोल का pH मान कितना होता है ?
Ans  - 7

▪️ शराब का pH मान कितना होता है ?
Ans  - 3.5

▪️ मानव मूत्र का pH मान कितना होता है ?
Ans  - 4.8 - 8.4

▪️ समुद्री जल का pH मान कितना होता है ?
Ans  - 8.1

▪️ आसू का pH मान कितना होता है ?
Ans  - 7.4

▪️ मानव लार का pH मान कितना होता है ?
Ans  - 6.5 - 7.5

मंगलवार, 24 अक्टूबर 2023

परेशानी का अनोखा हल


     !! *कहानी परेशानी का अनोखा हाल* !!

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एक शहर में एक अमीर आदमी रहता था। उसको पैसों का बहुत घमण्ड था। एक बार किसी कारण से उसकी आँखों मे इन्फेक्शन हो गया और उसकी आँखों मे बुरी तरह जलन होने लगी। वह कई डॉक्टरों के पास गया, लेकिन किसी भी डॉक्टर को उसकी परेशानी समझ नही आयी। वह बहुत परेशान होने लगा। वह अपना इलाज कराने विदेश चला गया। वहाँ एक बड़े डॉक्टर ने उसकी आँखे देखी और कहा – मैंने अपनी पूरी लाइफ में अभी तक ऐसा केस नही देखा है। ( वह आदमी बहुत डर जाता है ) वह डॉक्टर से पूछता है – क्या हुआ डॉक्टर। 


डॉक्टर कहते है – आपकी आंखों में एलर्जी हो गयी है। आप सिर्फ ‘ हरा रंग देख सकते है। यदि आप हरे कलर के अलावा’ दूसरे कलर’ देखोगे, तो आपकी आंखों में जलन होने लगेगी और धीरे-धीरे आपकी आंखों की रोशनी चली जायेगी। ( वह बहुत उदास हो जाता है )। उसके पास पैसा तो बहुत होता है, इसलिए वह पेंटर को बुलाता है और कहता है – तुम इस घर को ‘ हरा कलर ‘ कर दो और जहाँ भी, मैं जाता हूं, पूरी जगह को हरा कर दो। उसने अपनी गली, सड़क ,बोर्ड सब कुछ हरा करवा दिया। उसने बहुत पैसा खर्च कर दिया, फिर भी कोई ना कोई ऐसी चीज रह जाती। 


जिसको हरा नही किया जा सकता था। जैसे नीला आसमान, खाना खाने के लिए रोटी, और शरीर का कलर, सब चीजों को हरा कलर नही किया जा सकता था। ( उसका हर रोज बहुत ज्यादा पैसा ख़र्च हो जाता था ) एक दिन उसी गली से एक लड़का निकल रहा था। उसने देखा कि, चारो ओर हरा कलर ही क्यों है। उसने वहां कुछ लोगो से पूछा – कि यहाँ चारो ओर ‘हरा कलर’ क्यों है। लोगो ने बताया कि, यहाँ एक अमीर आदमी रहता है। उसकी आँखों मे एलर्जी है। 


अगर वह हरे कलर के अलावा दूसरा कलर देखता है तो उसकी आँखों मे जलन होने लगती है। इसलिए सब जगह हरा कलर है। वह लड़का उस आदमी के पास जाता है और कहता है – आपने सभी जगह को हरा क्यों कर दिया है। आपकी परेशानी का दूसरा इलाज भी हो सकता है। आपकी परेशानी का इलाज बहुत ही सस्ता और आसान है। आप वेवजह ही इतना पैसा खर्च करते हो। वह आदमी कहता है – आप बताओ, इस परेशानी का क्या हाल हो सकता है। लड़का कहता है – आपकी परेशानी का हल अभी निकल सकता है। 


आप एक ‘हरे कलर का चश्मा पहनो।’ जिससे आपको सारी चीजे हरी दिखाई देंगी। जो बहुत ही सस्ता होगा और आपका एक पैसा भी खर्च नही होगा। ( यह सुनकर उस अमीर आदमी की आंखें खुली की खुली रह जाती है ) वह सोचता है, कि कितना आसान तरीका है। मैं, ना जाने कितना पैसा खर्च करता रहा। मैं हड़बड़ी में फैसले लेता रहा। मेरी परेशानी का हल मेरे सामने था। अगर, मैं आराम से इस बारे मे सोचता, तो आसानी से हल निकल आता।



*शिक्षा*:-

दोस्तों, कई बार हमारे सामने कुछ परेशानियां आ जाती है। जो बहुत ही आसान होती है। उसका हल भी हमारे सामने होता है। लेकिन हम हड़बड़ाहट में ठीक से सोच नही पाते है और घबरा जाते है। जिससे हम अपनी लाइफ में गलत फैसले ले लेते है..!!

   

स्थान की कीमत प्रेरणादायक कहानी

 पिता ने बेटे से कहा, "तुमने बहुत अच्छे नंबरों से ग्रेजुएशन पूरी की है। अब क्यूंकि तुम नौकरी पाने के लिए प्रयास कर रहे हो , मैं तुमको यह कार उपहार स्वरुप भेंट करना चाहता हूँ , यह कार मैंने कई साल पहले हासिल की थी, यह बहुत पुरानी है। इसे कार डीलर के पास ले जाओ और उन्हें बताओ कि तुम इसे बेचना चाहते हो। देखो वे तुम्हें कितना पैसा देने का प्रस्ताव रखते हैं।"


बेटा कार को डीलर के पास ले गया, पिता के पास लौटा और बोला, "उन्होंने 60,000 रूपए की पेशकश की है क्योंकि कार बहुत पुरानी है।" पिता ने कहा, "ठीक है, अब इसे कबाड़ी की दुकान पर ले जाओ।"


बेटा कबाड़ी की दुकान पर गया, पिता के पास लौटा और बोला, "कबाड़ी की दुकान वाले ने सिर्फ 6000 रूपए की पेशकश की, क्योंकि कार बहुत पुरानी है।"


पिता ने बेटे से कहा कि कार को एक क्लब ले जाए जहां विशिष्ट कारें रखी जाती हैं।


बेटा कार को एक क्लब ले गया, वापस लौटा और उत्साह के साथ बोला, "क्लब के कुछ लोगों ने इसके लिए 60 लाख रूपए तक की पेशकश की है! क्योंकि यह निसान स्काईलाइन आर34 है, एक प्रतिष्ठित कार, और कई लोग इसकी मांग करते हैं।"


पिता ने बेटे से कहा, "कुछ समझे? मैं चाहता था कि तुम यह समझो कि सही जगह पर ही तुम्हें सही महत्व मिलेगा। अगर किसी प्रतिष्ठान में तुम्हें कद्र नहीं मिल रही, तो गुस्सा न होना, क्योंकि इसका मतलब एक है कि तुम गलत जगह पर हो।


  सफलता केवल अपने हुनर और परिश्रम से नहीं मिल जाती, लोगों के साथ मिलती है, और तुम किन लोगों के बीच में हो , कुछ समय में तुमको स्वतः ही ज्ञात हो जाएगा I तुम्हें सही जगह पर जाना होगा, जहाँ लोग तुम्हारी कीमत जानें और सराहना करें।

सोमवार, 16 अक्टूबर 2023

भारत के सभी 25 उच्च न्यायालयों की सूची

 न्यायालय         स्थान           स्थापना   न्याय क्षेत्र      पीठ

इलाहाबाद       इलाहाबाद    17 मार्च    उत्तरप्रदेश   लखनऊ

उच्च न्यायालय                      1866


मुम्बई उच्च        मुम्बई        14 अगस्त   महाराष्ट्र ,     नागपुर,

                                                                        पणजी,


                                                                    औरंगाबाद


न्यायालय                           1862       गोवा , 

                                                      दादर और नगर                                                              हवेली , दमन

                                                     और द्वीप



कलकत्ता 

उच्च न्यायालय


छत्तीसगढ़ 

उच्च न्यायालय


दिल्ली

 उच्च न्यायालय


गुवाहाटी 

उच्च न्यायालय


गुजरात 

उच्च न्यायालय


हिमाचल प्रदेश 

उच्च न्यायालय


झारखण्ड

उच्च न्यायालय


कर्नाटक 

उच्च न्यायालय


केरल 

उच्च न्यायालय


मध्य प्रदेश 

उच्च न्यायालय


मद्रास 

उच्च न्यायालय


उड़ीसा

उच्च न्यायालय


पटना 

उच्च न्यायालय



राजस्थान 

उच्च न्यायालय



सिक्किम

उच्च न्यायालय



उत्तराखण्ड 

उच्च न्यायालय



मणिपुर 

उच्च न्यायालय


मेघालय 

उच्च न्यायालय


त्रिपुरा 

उच्च न्यायालय


आन्ध्र प्रदेश 

उच्च न्यायालय



तेलंगाना 

उच्च न्यायालय



जम्मू और 

कश्मीर 

उच्च

न्यायालय




पंजाब

 और 

हरियाणा 

उच्च 

न्यायालय















































कलकत्ता


रॉची


बिलासपुर

नई दिल्ली 31 अक्टूबर. 1966|


बेंगलूरू


गुवाहाटी । मार्च, 1948


कोच्चि



अहमदाबाद| । मई, 1960

शिमला 1971


जबलपुर


चेन्नई


कटक


पटना


जोधपुर


गंगटोक


नैनीताल


इम्फाल


स्थापित


शिलांग



अगरतला


4 अगस्त, 1862


अमरावती


2 जुलाई, 1862


हैदराबाद


1 नवम्बर, 2000


2000


1884


1956


2 जनवरी, ।936


15 अगस्त, 1862

3 अप्रैल, 1948


2 सितम्बर, 1916


15 अगस्त, 1947


21 जून, 1949


1975


2000


25 मार्च, 2013


23 मार्च, 2013


26 मार्च, 2013


। जनवरी, 2019


। जनवरी, 2019




न्याय क्षेत्र


छत्तीसगढ़

राष्ट्रीय राजधानी प्रदेश


(दिल्जी)


पश्चिम बंगाल, अंडमान पोर्ट ब्लेयर

निकोबार


नगालैण्ड, मिजोरम


गुजरात

हिमाचल प्रदेश


जम्मू और कश्मीर,


लद्दाख


अरुणाचल प्रदेश, असम, कोहिमा,


झारखण्ड


कर्नाटक


केरल, लक्षाद्ीप

मध्य प्रदेश


तमिलनाडु, पुदु्चेरी

ओडिशा


बिहार


पंजाब, हरियाणा,


चंडीगढ़


राजस्थान


सिक्किम


उत्तराखण्ड


मणिपुर


मेघालय


त्रिपुरा


पीठ


आन्ध प्रदेश


लखनऊ


तेलंगाना



(क्षेत्र संघ).

जलपाईगुड़ी


इंटानगर,


एजवल


धारवाड़ व

गुलबर्गा


ग्वालियर,

इन्दौर


मदुरै


जयपुर

ज्ञान की प्यास प्रेरक प्रसंग

           ज्ञान की प्यास


एक गुरु के दो शिष्य थे- एक पढा़ई में बहुत

तेज और विद्वान था और दूसरा फिसडी पहले

शिष्य की हर जगह प्रशंसा और सम्मान होता

था, जबकि दूसरे शिष्य की लोग अकसर

उपेक्षा करते थे।


एक दिन गुस्से में दूसरा शिष्य गुरुजी के

जाकर बोला, "गुरुजी! में उससे पहले से

आपके पास विद्याध्ययन कर रहा हूं, फिर भी

आपने उसे मुझसे अधिक शिक्षा दी।"


गुरुजी थोड़ी देर मौन रहने के

बाद बोले, "पहले तुम एक

कहानी सुने- एक

यात्री कहीं जा रहा

था। रास्ते में उसे

प्यास लगी। थोड़ी

दूर पर उसे एक

कुआं मिला। कुएं

पर बाल्टी तो थी,

लेकिन रस्सी नहीं थी,


इसलिए वह आगे बढ़ गया। थोड़ी देर बाद

एक दूसरा यात्री उस कुएं के पास आया। कुएं

पर रस्सी न देखकर उसने इधर-उधर देखा।

पास में ही बड़ी बड़ी घास उगी थी। उसने घास

उखाड़कर रस्सी बनाना (बुनना) शुरू किया।

थोड़ी देर में एक लंबी रस्सी तैयार हो गई,

जिसकी सहायता से उसने कुएं से पानी

निकाला और अपनी प्यास बुझ ली। गुरुजी ने

उस शिष्य से पूछा, "अब तुम मुझे यह बताओ

कि प्यास किस यात्री को ज्यादा लगी थी?"

शिष्य ने तुरंत उत्तर दिया कि दूसरे यात्री को।

गुरुजी फिर बोले, "प्यास दूसरे यात्री को

ज्यादा लगी थी। यह हम इसलिए कह सकते

हैं क्योंकि उसने प्यास बुझाने के लिए परिश्रम

किया। उसी प्रकार तुम्हारे सहपाठी में ज्ञान की

प्यास है, जिसे बुझाने लिए वह कठिन परिश्रम

करता है, जबकि तुम ऐसा नहीं करते।"

शिष्य को अपने प्रश्न का उत्तर मिल चुका था।

वह भी कठिन परिश्रम में जुट गया।



शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2023

नैतिक शिक्षा प्रेरणादायक ( निजी विचार )

एक समय था जब हम अपनी मॉं को सर्वश्रेष्ठ गुरु और पिता को सर्वोत्तम आदर्श माना करते थे ।

आज बच्चे अपने ही मॉं-बाप को कमतर समझने लगे हैं । 

बच्चों में प्रारंभिक शिक्षा द्वारा प्रदत्त संस्कारों के अभाव की झलक साफ़ साफ़ दिखाई दे रही है और इसका दोष हमें अपने ऊपर लेना चाहिये । हमारे पास समय नहीं हैं बच्चों के लालन पालन का , हम किन्हीं किन्ही मजबूरियों के कारण उनके दादा - दादी से दूर उनकी परवरिश कर रहे हैं जबकि दादा - दादी ही मॉं -बाप के बाद प्रथम शाला होते हैं जो अब शन: शन: कब *थे * में परिणित हो गये पता ही नहीं चला। 

हम भौतिक संसाधनों को एकत्र करने और अप्राकृतिक आत्म विकास की होड़ में बहुत आगे निकल गये हैं और अपने जीवन के वास्तविक तत्वों को एक धूल के ग़ुबार की भाँति पीछे छोड़ आये हैं ।

इसी के दूरगामी परिणाम आज हमारे समक्ष मुँह बाये खड़े हैं कि बच्चों के संस्कारों को लेकर चिंतित हैं उनके दिशा भ्रमित होने की चिंता को लेकर रातों की नींद और दिन का चैन खो चुके हैं । 

सोच का गंभीर विषय है ।

🙏🏻🙏🏻

मेरा अपना मत है कृपया व्यक्तिगत अथवा अन्यथा क़तई ना लें ।

🙏🏻🙏🏻

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2023

पंचशील , ताशकंद , शिमला समझौता

 कुछ समझौते 👉

1. 1954 में पंचशील समझौता भारत और चीन देश के पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा चाऊ इन लाई के बीच हुआ।

2. 1966 में ताशकंद समझौता भारत और पाकिस्तान के मध्य लाल बहादुर शास्त्री तथा जनरल अयूब खान के बीच हुआ।

3. 1972 में शिमला समझौता भारत और पाकिस्तान के मध्य  इन्दिरा गॉंधी तथा जुल्फिकार अली भुट्टो , बेनजीर भुट्टो के बीच हुआ।

भेद , प्रकार , भाग ,घटक ( हिन्दी व्याकरण )

 ✅भेद, प्रकार, भाग, घटक.!!


👉 संज्ञा के भेद – 5

👉 रचना के आधार पर संज्ञा के भेद – 3

👉 संधि के भेद – 3

👉 स्वर संधि के भेद – 5

👉 समास के भेद – 6

👉 तत्पुरुष समास के भेद – 6

👉 कारक के प्रकार – 8

👉 वचन कितने प्रकार के है – 2

👉 लिंग के प्रकार – 2

👉 काल के भेद – 3

👉 विशेषण के भेद – 4

👉 सर्वनाम के भेद – 6

👉 क्रिया विशेषण के भेद – 4

👉 क्रिया के प्रकार – 2

👉 छंद के प्रकार – 2

👉 अलंकार के प्रकार – 3

👉 रस कितने प्रकार के होते है – 9

👉 शब्द शक्ति के प्रकार – 3

👉 वाक्य के घटक होते है – 2

👉 वर्णों की संख्या – 52

👉 व्यंजन वर्णों की संख्या – 33

👉 संचारीभाव की संख्या – 33

👉 सात्विक भाव की संख्या – 8

👉 विभाव के भेद – 2

👉 काव्य के भेद – 2

👉 वेद कितने है – 4

👉 वेदांग कितने है – 6

👉 पुराण कितने है – 18

👉 बौद्धों के धर्म-ग्रन्थ – 3

👉 संगीत-स्वर के भेद – 3

👉 नायिका के भेद – 3

👉 नायक के भेद – 4

👉 श्रृंगार के भेद – 2

👉 हास्य के भेद – 6

👉 वीर-रस के भेद – 3

👉 काव्य के गुण – 3

👉 विद्याएँ -18

👉 विवाह प्रकार – 8

👉 माताएँ – 7

👉 रत्न के प्रकार – 9

👉 राशियाँ – 12

👉 दिन-रात के पहर – 8

👉 वायु के प्रकार – 5

👉 अग्नियाँ – 3

👉 गुण के प्रकार – 3

👉 शारीरिक दोष – 3

👉 लोक – 3

👉 ऋण के प्रकार – 3

👉 ताप – 3

👉 युग – 4

👉 पुरुषार्थ – 4

👉 वर्ण – 4

👉 दंड के प्रकार – 4

👉 शत्रु – 6

👉 संहिताएँ – 4

👉 भारतीय व्यक्ति-जीवन के संस्कार – 16

👉 ईश्वर के रूप – 2(सगुण, निर्गुण)

👉 भाषा के प्रकार – 2

👉 मूल स्वर के भेद – 3

👉 व्यंजनों के प्रकार – 3

👉 स्पर्श व्यंजन होते है – 25

👉 उष्म व्यंजन होते है – 4

👉 संयुक्त व्यंजन – 4

👉 वर्णों की मात्राएँ होती है – 10

👉 कंठ्य वर्णों की संख्या – 9

👉 तालव्य वर्णों की संख्या – 9

👉 प्रयोग की दृष्टि से शब्द-भेद – 2

👉 विकारी शब्द के प्रकार – 4

👉 अविकारी शब्द के प्रकार – 4

👉 उत्पति की दृष्टि से शब्द-भेद – 4

👉 व्युत्पत्ति या रचना की दृष्टि से शब्द भेद – 3

👉 वाक्य के भेद- अर्थ के आधार पर – 8

👉 वाक्य के भेद- रचना के आधार पर – 3

👉 विधेय के भाग – 6

👉 सर्वनाम की संख्या – 11

👉 प्रत्यय के भेद – 2

👉 रस के अंग – 4?

👉 अनुभाव के भेद – 4

👉 स्थायी भाव के प्रकार – 9

👉 श्रृंगार रस के प्रकार – 2

👉 संज्ञा के भेद – 5

👉 रचना के आधार पर संज्ञा के भेद – 3

👉 संधि के भेद – 3

👉 स्वर संधि के भेद – 5

👉 समास के भेद – 6

👉 तत्पुरुष समास के भेद – 6

👉 कारक के प्रकार – 8

👉 वचन कितने प्रकार के है – 2

👉 लिंग के प्रकार – 2

👉 काल के भेद – 3

👉 विशेषण के भेद – 4

👉 सर्वनाम के भेद – 6

👉 क्रिया विशेषण के भेद – 4

👉 क्रिया के प्रकार – 2

👉 छंद के प्रकार – 2

👉 अलंकार के प्रकार – 3

👉 रस कितने प्रकार के होते है – 9

👉 शब्द शक्ति के प्रकार – 3

👉 वाक्य के घटक होते है – 2

👉 वर्णों की संख्या – 52

👉 व्यंजन वर्णों की संख्या – 33

👉 संचारीभाव की संख्या – 33

👉 सात्विक भाव की संख्या – 8

👉 विभाव के भेद – 2

👉 काव्य के भेद – 2

👉 वेद कितने है – 4

👉 वेदांग कितने है – 6

👉 पुराण कितने है – 18

👉 बौद्धों के धर्म-ग्रन्थ – 3

👉 संगीत-स्वर के भेद – 3

👉 नायिका के भेद – 3

👉 नायक के भेद – 4

👉 श्रृंगार के भेद – 2

👉 हास्य के भेद – 6

👉 वीर-रस के भेद – 3

👉 काव्य के गुण – 3

👉 विद्याएँ -18

👉 विवाह प्रकार – 8

👉 माताएँ – 7

👉 रत्न के प्रकार – 9

👉 राशियाँ – 12

👉 दिन-रात के पहर – 8

👉 वायु के प्रकार – 5

👉 अग्नियाँ – 3

👉 गुण के प्रकार – 3

👉 शारीरिक दोष – 3

👉 लोक – 3

👉 ऋण के प्रकार – 3

👉 ताप – 3

👉 युग – 4

👉 पुरुषार्थ – 4

👉 वर्ण – 4

👉 दंड के प्रकार – 4

👉 शत्रु – 6

👉 संहिताएँ – 4

👉 भारतीय व्यक्ति-जीवन के संस्कार – 16

👉 ईश्वर के रूप – 2(सगुण, निर्गुण)

👉 भाषा के प्रकार – 2

👉 मूल स्वर के भेद – 3

👉 व्यंजनों के प्रकार – 3

👉 स्पर्श व्यंजन होते है – 25

👉 उष्म व्यंजन होते है – 4

👉 संयुक्त व्यंजन – 4

👉 वर्णों की मात्राएँ होती है – 10

👉 कंठ्य वर्णों की संख्या – 9

👉 तालव्य वर्णों की संख्या – 9

👉 प्रयोग की दृष्टि से शब्द-भेद – 2

👉 विकारी शब्द के प्रकार – 4

👉 अविकारी शब्द के प्रकार – 4

👉 उत्पति की दृष्टि से शब्द-भेद – 4

👉 व्युत्पत्ति या रचना की दृष्टि से शब्द भेद – 3

👉 वाक्य के भेद- अर्थ के आधार पर – 8

👉 वाक्य के भेद- रचना के आधार पर – 3

👉 विधेय के भाग – 6

👉 सर्वनाम की संख्या – 11

👉 प्रत्यय के भेद – 2 

👉 रस के अंग – 4

👉 अनुभाव के भेद – 4


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नोट -  यह पोस्ट हमने सोशल मीडिया से ली है जिसमें त्रुटि रहना संभव है। अत: आप अगर हमें त्रुटि से अवगत तो हम त्रुटि में सुधार करेगें।

धन्यवाद

नयी IPC की धाराएं

 *नई IPC की धाराऍं ...*


1. हत्या के लिए सज़ा- धारा 101

2. आत्महत्या के लिए उकसाना- धारा 106

3. अपहरण- धारा 135

4.बलात्कार - धारा 63

5. सामूहिक बलात्कार- धारा 70

6. मानहानि- धारा 354

(महत्वपूर्ण)

7. धोखाधड़ी- धारा 316

8. दहेज हत्या- 799. 

9. चोरी- धारा 301

10. छीनना- धारा 302


*पुराने IPC में 302 धारा हत्या के लिए लगाया जाता है,नए में 302 छिनैती के लिए लगेगा।*


*नए IPC में ये बदल गया*


*IPC की धारा-377 के मुताबिक़, अगर कोई व्यक्ति अप्राकृतिक रूप से यौन संबंध बनाता है तो उसे उम्रक़ैद या जुर्माने के साथ दस साल तक की क़ैद हो सकती है.*


*अब कोई सजा नहीं होगी. धारा 377 को हटा दिया गया है.*


*यह बदलेगा-एक नया सेक्शन जोड़ा गया है धारा 69*


*"शादी का झूठा वादा कर यौन संबंध" बनाने वाले व्यक्ति को अधिकतम 10 वर्ष की सजा का प्रावधान.*


*ये कृत्य ‘रेप’ की कैटेगरी में नहीं आएगा*


*-धोखे से,लालच देकर, पहचान छिपाकर या महिला से शादी का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाना रेप की कैटेगरी में नहीं आएगा।अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान।*




पुरानी कहावतें/शेर/दोहे

 पुरानी कहावतें/शेर/दोहे

नये संदर्भ में:


पुरानी कहावत: 

घर घर मिट्टी के चूल्हे हैं।


नये संदर्भ में: 

घर घर गैस के चूल्हे हैं।


पुरानी कहावत:

गुड़ खाएं, गुलगुले से परहेज़ करें


नये संदर्भ में:

केक खाएं, अंडे से परहेज़ करें।


पुरानी कहावत:

थोड़ा पढ़ा तो हर से गया,

ज्यादा पढ़ा तो घर से गया।


नये संदर्भ में:

थोड़ा पढ़ा तो शहर से गया,

ज्यादा पढ़ा तो देश से गया।


पुराना शेर:

उम्रे दराज मांग कर लाए थे चार दिन,

दो आरजू में कट गए दो इंतजार में।


नये संदर्भ में:

वोटर मांग लाए थे संसद के चार दिन,

दो हंगामे में कट गए दो 'वाक आऊट ' में।


पुराना शेर:

दिल में छुपा के रखी है तस्वीर यार की,

जब जी चाहा गरदन झुकाई तस्वीर देख ली।


नये संदर्भ में:

मोबाइल में 'सेव' कर ली है तस्वीर यार की,

जब जी चाहा बटन दबाया तस्वीर देख ली।


पुराना शेर:

हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन

दिल के बहलाने को ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है।


नये संदर्भ में:

हमको मालूम है तेरे 'प्रोफाइल' की हकीकत लेकिन

दिल के बहलाने को 'सोशल मीडिया ' अच्छा है।


पुराना दोहा:

जो तो को कांटा बोए ताय बोए तू फूल,

तो को फूल के फूल हैं बाको हैं तिरशूल।


नये संदर्भ में:

जो तो को कांटा बोए बाय बोए तू भाला,

वो भी साला समझ जाय अब पड़ा जबर से पाला।


पुराना दोहा:

ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोए,

औरन को शीतल करे आपहु शीतल होय।


नये संदर्भ में:

ऐसी वाणी बोलिए जम कर झगड़ा होए

पर वा सें कबंहु न बोलिए जो आपसे तगड़ा होए।


पुराना दोहा:

सांई इतना दीजिए जामें कुटुंब समाय

मैं भी भूखा ना रहूं साधु ने भूखा जाय।


नये संदर्भ में:

सांई इतना दीजिए, सौ पुश्तें तरह जाएं

मैं भी खाऊं बैठ कर,  बैठ पीढि़यां खाएं।


पुराना दोहा:

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून,

पानी बिना न ऊबरे, मोती मानुष चूना।


नये संदर्भ में:

रहिमन पैसा राखिए, बिन पैसे सब सून,

पैसा बिना न मिलते हैं, मोती मानुष चून।


         - सुरेन्द्र हयारण "ग्वालियरी "

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग स्थापना दिवस

▪️ 12 अक्टूबर, 2023 को 'राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग' (NHRC) का 30वाँ स्थापना दिवस आयोजित किया गया। ज्ञात हो कि 'राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग' एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के तहत 12 अक्टूबर, 1993 को की गई थी।

▪️ मानवाधिकार आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा इसके वर्तमान अध्यक्ष के पद पर आसीन है।

▪️ राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का अधिदेश, मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा यथासंशोधित मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 में निहित है।

▪️ राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन पेरिस सिद्धांतों के अनुरूप है जिन्हें अक्टूबर, 1991 में पेरिस में मानव अधिकार संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए राष्ट्रीय संस्थानों पर आयोजित पहली अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में अंगीकृत किया गया था तथा 20 दिसम्बर, 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा संकल्प 48/134 के रूप में समर्थित किया गया था।

▪️ इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति, जिसमें प्रधानमंत्री सहित लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा का उप-सभापति, संसद के दोनों सदनों के मुख्य विपक्षी नेता तथा केंद्रीय गृहमंत्री शामिल होते हैं, की सिफारिशों के आधार पर की जाती है।

▪️ राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक निर्धारित है। इसके अतिरिक्त ये पुनर्नियुक्ति के भी पात्र होंगे।

▪️ राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीश भी नियुक्त किए जा सकते हैं।

भारतीय संविधान की विशेषताएं


     भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं

1. भारत का संविधान एक लिखित दस्तावेज है। यह दुनिया के सभी लिखित संविधान का दूसरा सबसे लंबा और सबसे व्यापक है।

2. संविधान, जैसा कि मूल रूप से अपनाया गया था, के 22 भाग थे, 395 लेख और 8 अनुसूचियां।

3. भारतीय संविधान आंशिक रूप से कठोर और आंशिक रूप से लचीला है।

4. संविधान भारत को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक और गणराज्य घोषित करता है।

5. संविधान ने केंद्र और राज्यों दोनों में सरकार के संसदीय स्वरूप की स्थापना की।

6. भारत का संविधान देश का सर्वोच्च कानून है।

7. संविधान ने भारत को एक समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में स्थापित किया है।

8. संविधान भारत में एकल नागरिकता प्रदान करता है।

9. संविधान व्यक्ति के कुछ मौलिक अधिकारों की घोषणा करता है।

10. संविधान सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के सिद्धांत का परिचय देता है।

11. संविधान ने एक स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका प्रदान करने का प्रावधान किया है। सर्वोच्च न्यायालय संविधान के संरक्षक के रूप में कार्य करता है और अपील का सर्वोच्च न्यायालय है।

12. संविधान ने न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा की शक्ति प्रदान की है।

13. भारत का संविधान एकात्मक विशेषताओं के साथ संघीय है।

14. संविधान राष्ट्रपति को संघ के संवैधानिक प्रमुख के रूप में मान्यता देता है।

15. भारत के संविधान ने वास्तव में कल्याणकारी राज्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत प्रदान किए हैं।

16. हालाँकि संविधान ने भारत को राज्यों का संघ घोषित किया है लेकिन कोई भी राज्य स्वयं को भारतीय संघ से अलग घोषित नहीं कर सकता है।