■ 2. आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth)
आर्थिक संवृद्धि से अभिप्राय आय अथवा उत्पादन में होने वाली दीर्घकालीन वृद्धि से है। आय अथवा उत्पादन के मूल्य में वृद्धि तब हो सकती है।
(i) जब वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि हो तथा वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें स्थिर (Constant) रहे।
(ii) जब वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों में वृद्धि हो और वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन स्थिर (Constant) रहे। 'आर्थिक
संवृद्धि' से अभिप्राय पहले प्रकार के उत्पादन के मूल्य (Value of Output) में वृद्धि से है अर्थात् वह मूल्य (Value) जो बस्तुओं
तथा सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि के फलस्वरूप संभव होता है, जबकि वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमत स्थिर रहती हैं। इस प्रकार की संवृद्धि को ही वास्तविक संवृद्धि (Real Growth) कहा जाता है। इसका तात्पर्य है देश में वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रवाह में वृद्धि (It) implies increase in the flow of goods and services) | यदि देश की जनसंख्या स्थिर (Constant ) रहती है तब वास्तविक संवृद्धि का अर्थ है प्रतिब्यक्ति के लिए देश में वस्तुओं तथा सेवाओं की अधिक उपलब्धता।
■ परिभाषा ( Definition)
प्रो. मायर के अनुसार, "आर्थिक संवृद्धि वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी देश की प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में
दीर्घकालीन वृद्धि होती है।" (Economic growth may be defined as the process whereby the real per capita
income of the country increases over a long period of time - Meier)
प्रो. सालवाटोर के शब्दों में, "आर्थिक संवृद्धि वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी देश की प्रतिव्यक्ति उत्पादकता
निरन्तर बढ़ने के फलस्वरूप दीर्घकाल तक के लिए उस देश को प्रतिव्यक्ति वास्तविक कुल राष्ट्रीय आय उत्पाद में वृद्धि होती
है अथवा प्रतिव्यक्ति उत्पादकता में निरन्तर वृद्धि होने से आय में दीर्घकालीन वृद्धि होती है।" (Economic growth has been defined as the process whereby a country's real per capita gross national product (GNP) or
income increase over a sustained period of time through continuing increase in per capita productivity. Salvatore)
प्रो. पीटरसन के अनुसार, "आर्थिक संवृद्धि से अभिप्राय है वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रतिव्यक्ति वास्तविक उत्पादन में समय के साथ-साथ वृद्धि हो तथा अर्थव्यवस्था की वस्तुओं तथा सेवाओं की उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो।" (Economic growth involves an increase in overtime in the per capital actual output of goods and services as well
as an increase in the economy's capability to produce goods and services. - Peterson)
उपरोक्त परिभागओं के अनुसार आर्थिक संवृद्धि यह प्रक्रिया है जिसके फलस्वरूप देश में प्रतिव्यक्ति वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन प्रतिव्यक्ति वास्तविक कुल राष्ट्रीय उत्पाद अथवा प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में दीर्घकालीन वृद्धि होती है। इस संदर्भ में
निम्नलिखित बातों का स्पष्टीकरण आवश्यक है:
(i) वस्तुओं के परिमाण में होने वाली आकस्मिक वृद्धि (Occasional rise in the volume of output) को आर्थिक संवृद्धि नहीं कहा जा सकता। उदाहरण के लिए मान लो, किसी वर्ष, अच्छी वर्षा के कारण, कृषि उत्पादन में तो (उस विशेष वर्ष) वृद्धि हो जाती है, परन्तु आगामी वर्षों में कृषि उत्पादन कम हो जाता है तो इसे आर्थिक संवृद्धि नहीं कहा जाएगा। अतएव संवृद्धि की धारणा परिवर्तन के उस प्रवृत्ति पथ (Trend Path) को व्यक्त करती है जो समय के साथ-साथ वृद्धि की ओर अग्रसर हो, बेशक बीच में उत्पादन में थोड़ी-बहुत आकस्मिक गिरावट हो अथवा न हो।