रविवार, 6 जुलाई 2025

केंचुआ खेती के लाभ

 दोस्तो आज केंचुए के बारे में यहां कुछ बाते आपको बताने जा रहा हु  और उसके लाभ के  अलावा भी खेती में केंचुए के कई और भी फ़ायदे हैं जिनको आप आज जानेंगे 


मिट्टी की संरचना में सुधार: केंचुए मिट्टी को ढीला करते हैं और मिलाते हैं, जिससे मिट्टी की संरचना और जल निकासी में सुधार होता है. इससे कटाव और बाढ़ को रोकने में मदद मिलती है. 

 

पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है: केंचुए पौधों के मलबे और मिट्टी खाते हैं, जिससे मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ जाती है. 

 

खाद तैयार करते हैं: केंचुए खेत में मौजूद कार्बनिक पदार्थों को खाकर अच्छी गुणवत्ता वाली खाद तैयार करते हैं. इस खाद को वर्मीकॉम्पोस्ट कहते हैं. 

 

ट्रैक्टर से भी अच्छी जुताई करते हैं: केंचुए खेत में ट्रैक्टर से भी अच्छी जुताई कर देते हैं. 

 

मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता बढ़ाते हैं: केंचुओं से मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता बढ़ती है. 

 

बैक्टीरिया, शैवाल, प्रोटोजोआ, एक्टिनाइमिसिटी आदि की वृद्धि में मदद मिलती है. 

 

केंचुआ खाद से फसलों की उपज में 15-20% तक की वृद्धि होती है. 


यह खेत में दीमक एवं अन्य हानिकारक कीटों को नष्ट कर देता हैं। इससे कीटनाशक की लागत में कमी आती हैं। इसके उपयोग के बाद 2-3 फसलों तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनी रहती हैं। मिट्टी में केचुओं की सक्रियता के कारण पौधों की जड़ों के लिए उचित वातावरण बना रहता हैं, जिससे उनका सही विकास होता हैं।


दोस्तो आज की ये स्टोरी आपको कैसा लगा अपने कमेंट जरूर लिखें।

साभार 🙏

भारतीय संविधान के भाग

 Gs by Kiran kumar  sir 💐

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🟦 भारतीय संविधान के भाग ✍


♦️भारतीय संविधान के 22 भाग है


◾️भाग 1 - संघ और उनका राज्यक्षेत्र


◾️भाग 2 - नागरिकता


◾️भाग 3 -  मूल अधिकार


◾️भाग 4 - राज्य की नीति के निर्देशक तत्व

🔺4 (क) मूल कर्तव्य


◾️भाग 5 - संघ


◾️भाग 6 - राज्य


◾️भाग 7 - निकाल दिया गया निरस्त कर दिया गया


◾️भाग 8 - संघ राज्य क्षेत्र


◾️भाग 9 - पंचायत


🔺9 (क) नगर पालिकाए

🔺9 (ख) सहकारी समितियां


◾️भाग - 10 - अनुसूचित जाति, जनजातीय क्षेत्र 


◾️भाग 11 - संघ और राज्यों के बीच संबंध


◾️भाग - 12 - वित्त, संपत्ती, संविदाए और वाद


◾️भाग - 13 - भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम


◾️भाग - 14 - संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं

🔺14 (क) अधिकरण


◾️भाग 15 - निर्वाचन


◾️भाग 16 - कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध


◾️भाग 17 - राज्य भाषा


◾️भाग 18 - आपात उपबंध


◾️भाग 19 - प्रकीर्ण


◾️भाग 20 - संविधान का संशोधन


◾️भाग 21 - अस्थाई, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध


◾️भाग 22 - संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिंदी में प्राधिकृत पाठ और निरसन

आर्थिक सम्वृद्धि की परिभाषाएं

 


■ 2. आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth)

आर्थिक संवृद्धि से अभिप्राय आय अथवा उत्पादन में होने वाली दीर्घकालीन वृद्धि से है। आय अथवा उत्पादन के मूल्य में वृद्धि तब हो सकती है। 

(i) जब वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि हो तथा वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें स्थिर (Constant) रहे।

(ii) जब वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों में वृद्धि हो और वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन स्थिर (Constant) रहे। 'आर्थिक

संवृद्धि' से अभिप्राय पहले प्रकार के उत्पादन के मूल्य (Value of Output) में वृद्धि से है अर्थात् वह मूल्य (Value) जो बस्तुओं

तथा सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि के फलस्वरूप संभव होता है, जबकि वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमत स्थिर रहती हैं। इस प्रकार की संवृद्धि को ही वास्तविक संवृद्धि (Real Growth) कहा जाता है। इसका तात्पर्य है देश में वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रवाह में वृद्धि (It) implies increase in the flow of goods and services) | यदि देश की जनसंख्या स्थिर (Constant ) रहती है तब वास्तविक संवृद्धि का अर्थ है प्रतिब्यक्ति के लिए देश में वस्तुओं तथा सेवाओं की अधिक उपलब्धता।

■ परिभाषा ( Definition)

प्रो. मायर के अनुसार, "आर्थिक संवृद्धि वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी देश की प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में

दीर्घकालीन वृद्धि होती है।" (Economic growth may be defined as the process whereby the real per capita

income of the country increases over a long period of time - Meier)

प्रो. सालवाटोर के शब्दों में, "आर्थिक संवृद्धि वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी देश की प्रतिव्यक्ति उत्पादकता

निरन्तर बढ़ने के फलस्वरूप दीर्घकाल तक के लिए उस देश को प्रतिव्यक्ति वास्तविक कुल राष्ट्रीय आय उत्पाद में वृद्धि होती

है अथवा प्रतिव्यक्ति उत्पादकता में निरन्तर वृद्धि होने से आय में दीर्घकालीन वृद्धि होती है।" (Economic growth has been defined as the process whereby a country's real per capita gross national product (GNP) or

income increase over a sustained period of time through continuing increase in per capita productivity. Salvatore)

प्रो. पीटरसन के अनुसार, "आर्थिक संवृद्धि से अभिप्राय है वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रतिव्यक्ति वास्तविक उत्पादन में समय के साथ-साथ वृद्धि हो तथा अर्थव्यवस्था की वस्तुओं तथा सेवाओं की उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो।" (Economic growth involves an increase in overtime in the per capital actual output of goods and services as well

as an increase in the economy's capability to produce goods and services. - Peterson)

उपरोक्त परिभागओं के अनुसार आर्थिक संवृद्धि यह प्रक्रिया है जिसके फलस्वरूप देश में प्रतिव्यक्ति वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन प्रतिव्यक्ति वास्तविक कुल राष्ट्रीय उत्पाद अथवा प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में दीर्घकालीन वृद्धि होती है। इस संदर्भ में

निम्नलिखित बातों का स्पष्टीकरण आवश्यक है:

(i) वस्तुओं के परिमाण में होने वाली आकस्मिक वृद्धि (Occasional rise in the volume of output) को आर्थिक संवृद्धि नहीं कहा जा सकता। उदाहरण के लिए मान लो, किसी वर्ष, अच्छी वर्षा के कारण, कृषि उत्पादन में तो (उस विशेष वर्ष) वृद्धि हो जाती है, परन्तु आगामी वर्षों में कृषि उत्पादन कम हो जाता है तो इसे आर्थिक संवृद्धि नहीं कहा जाएगा। अतएव संवृद्धि की धारणा परिवर्तन के उस प्रवृत्ति पथ (Trend Path) को व्यक्त करती है जो समय के साथ-साथ वृद्धि की ओर अग्रसर हो, बेशक बीच में उत्पादन में थोड़ी-बहुत आकस्मिक गिरावट हो अथवा न हो।