" सुरक्षित यौन संबंध बनाये ,जांचा परखा रक्त चढ़ाए।
छूने से ये नहीं फैलता , याद हमेशा तुम ये रखना ।।
एड्स को समझों , एड्स को जानो , एड्स क्या है ? तुम पहचानो ।"
-- एड्स जागरूकता नारा नाको ( राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ) द्वारा
विश्व एड्स ( AIDS ) दिवस १ दिसम्बर पर एक लेख प्रस्तुत है -
एड्स को पूरो नाम ' एक्वार्ड डिफिसिएन्सी सिन्ड्रोम ' हैगो। और जो रोग एचआईवी ( ह्यूमन इम्यूनो डिफेसिएनसी वायरस ) नाम के वायरस से फैलत हैगो।
जो बीमारी भौत खतरनाक बीमारी ( संक्रमित बीमारी ) हैगी , जा बीमारी से मानव की मृत्यु भी हो जात हैगी ।
अबे तक एड्स बीमारी कौ कोई इलाज नई बनौ , जा बीमारी से बचाव ही जा बीमारी कौ इलाज हैगों ।
एड्स कौ इतिहास - एड्स सबसे पहलो केस ( एड्स से पीड़ित रोगी ) का अध्ययन कैलीफोर्निया ( अमेरिका ) और न्यूयार्क में सन् १९८१ में करौ।
एड्स फैलने के तीन कारण हैगे -
१) असुरक्षित यौन ( सेक्स ) संबंध से।
२) रक्त ( खून ) के द्वारा एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति को रक्त दान करने से , संक्रमित सुइयों से ।
३) मां के द्वारा शिशु ( बच्चे को )
बचाव के उपाय -
१) सुरक्षित यौन संबंध ।
२) रक्त दान के समय , रक्त की जांच करवाना ।
३) बच्चे और मां का उपचार करवाना ।
लेखक
किरण कुमार ( अध्ययनरत छात्र )
इन्दिरा गांधी यूनिवर्सिटी नयी दिल्ली ।
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ( नाको ) की वेबसाइट - NACO AIDDS
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क्योकि यह पोस्ट बहुत अध्ययन करने के बाद हमने बनाई है ।