मांग का नियम (Law of Demand) अर्थशास्त्र का एक मूलभूत सिद्धांत है। यह बताता है कि अन्य बातें समान रहने पर (ceteris paribus), किसी वस्तु की कीमत और उसकी मांगी गई मात्रा (quantity demanded) के बीच विपरीत (inverse) संबंध होता है।
इसका मतलब है:
* जब किसी वस्तु की कीमत बढ़ती है, तो उसकी मांग घटती है।
* जब किसी वस्तु की कीमत घटती है, तो उसकी मांग बढ़ती है।
यह सिद्धांत इस सहज मानवीय व्यवहार पर आधारित है कि उपभोक्ता कम कीमत पर अधिक वस्तुएं खरीदना पसंद करते हैं, क्योंकि उनकी क्रय शक्ति बढ़ जाती है। इसके विपरीत, जब कीमत बढ़ जाती है, तो वे उस वस्तु की कम मात्रा खरीदते हैं या उसके विकल्प (substitutes) की ओर मुड़ जाते हैं।
"अन्य बातें समान रहने पर" (Ceteris Paribus)
इस नियम में यह शर्त बहुत महत्वपूर्ण है। इसका मतलब है कि कीमत के अलावा अन्य सभी कारक जो मांग को प्रभावित करते हैं, जैसे:
* उपभोक्ता की आय
* उपभोक्ता की पसंद और प्राथमिकताएं
* संबंधित वस्तुओं (जैसे स्थानापन्न और पूरक वस्तुएं) की कीमतें
* भविष्य में कीमत में बदलाव की उम्मीद
* जनसंख्या का आकार
...ये सभी स्थिर रहते हैं। अगर इनमें से कोई भी कारक बदलता है, तो मांग का नियम पूरी तरह से लागू नहीं हो पाएगा।
मांग के नियम के अपवाद
कुछ विशेष परिस्थितियों में मांग का नियम लागू नहीं होता है। इन अपवादों में, कीमत बढ़ने पर भी मांग घटती नहीं है, बल्कि बढ़ सकती है, या कीमत घटने पर भी मांग घट सकती है। ये अपवाद हैं:
* गिफ़ेन वस्तुएं (Giffen Goods): ये बहुत निम्न-गुणवत्ता वाली वस्तुएं होती हैं। जब इनकी कीमत घटती है, तो उपभोक्ता अपनी बढ़ी हुई वास्तविक आय का उपयोग बेहतर वस्तुओं (जैसे मांस) को खरीदने में करते हैं, जिससे गिफ़ेन वस्तुओं की मांग घट जाती है।
* प्रतिष्ठा की वस्तुएं (Veblen Goods): इन्हें दिखावे या स्टेटस सिंबल के लिए खरीदा जाता है, जैसे लक्जरी कारें, हीरे, महंगे ब्रांडेड कपड़े। इन वस्तुओं की कीमत जितनी अधिक होती है, इनकी मांग उतनी ही अधिक होती है, क्योंकि लोग इन्हें अपनी सामाजिक स्थिति को दर्शाने के लिए खरीदते हैं।
* भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद: अगर किसी उपभोक्ता को लगता है कि भविष्य में किसी वस्तु (जैसे पेट्रोल, सोना) की कीमत और भी बढ़ जाएगी, तो वे वर्तमान में कीमत बढ़ने पर भी उसकी अधिक मात्रा खरीदना शुरू कर देते हैं।
* अनिवार्य वस्तुएं (Essential Goods): जीवन के लिए आवश्यक वस्तुओं (जैसे नमक, दवाइयां) की मांग उनकी कीमत से बहुत कम प्रभावित होती है। कीमत बढ़ने पर भी लोग इनकी उतनी ही मात्रा खरीदते रहते हैं, क्योंकि इनके बिना उनका काम नहीं चल सकता।
* उपभोक्ता की अज्ञानता: अगर कोई उपभोक्ता वस्तु की गुणवत्ता का अनुमान उसकी कीमत से लगाता है, तो वह महंगी वस्तु को बेहतर मानकर खरीद सकता है, भले ही सस्ती वस्तु समान हो।