शनिवार, 23 मई 2020

ई - पेपर पढ़ने के लिए लिंक

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मध्यप्रदेश के प्रमुख अखबार पढ़ने के लिए लिंक -
1) शिवपुरी पत्रिका खबर :-http://epaper.patrika.com/m5/2682505/Shivpuri-Patrika/Shivpuri-Patrika#page/1/1

2) नई दुनिया ग्वालियर :-
https://epaper.naidunia.com/epaper/edition-today-gwalior-52.html

3)  नई दुनिया भोपाल :-
https://epaper.naidunia.com/epaper/edition-today-bhopal-33.html

4) दैनिक भास्कर शिवपुरी :-
https://epaper.bhaskar.com/shivpuri/shivpuri-bhaskar/359/03062015/mpcg/1/

5) स्वदेश भोपाल :-
http://epaper.swadesh.in/EditionPage/EPpage.php?edn=Bhopal%20Main-Edition&isid=SWADNEW_BHO_20200523#Page/1

6) दैनिक जागरण भोपाल :-
http://www.jagranmp.com/epaper/index.php?edition=bhopal&date=2020-05-23&page=23bpl-pg02.pdf#.Xskq_7co2DZ

7) हरिभूमि भोपाल :-
https://www.haribhoomi.com/full-page-pdf/epaper/bhopal-full-edition/2020-05-23/bhopal-main/23344

8) पीपुल समाचार :-
http://epapers.peoplessamachar.in/epaper/edition/2915/gwalior/page/2






भारत के प्रमुख अखबार को पढ़ने के लिए लिंक  :-
1) दैनिक भास्कर :-
http://m.epaper.bhaskar.com/

2) दैनिक जागरण:-
http://epaper.jagran.com/mpaper_app.aspx

3) अमर उजाला :-
http://epaper.amarujala.com/

4) दीहिन्दू :-
https://epaper.thehindu.com/

5) टाइम्स आफ इंडिया :-
https://epaperlive.timesofindia.com/

6) इंडियन एक्सप्रेस :-
http://epaper.indianexpress.com/

7) नवभारत टाइम्स :-
http://epaper.navbharattimes.com/

8) आधार ज्योति:-
http://andhrajyothyamp.epapr.in/

9) राजस्थान पत्रिका :-
http://epaper.patrika.com/

10) पंजाबकेसरी :-
http://punjabkesariamp.epapr.in/

11) डेली न्यूज:-
http://epaper.dailynews360.com/

12) टाईम्स ग्रुप
https://epaper.timesgroup.com/

13) नई दुनिया :-
https://epaper.naidunia.com/epaper/

14) दिल्ली जनसत्ता :-
https://epaper.jansatta.com/m5/2683626/Jansatta/23-May-2020#page/1/1

 15) राष्ट्रीय सहारा ई- पेपर
http://rashtriyasahara.com//


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बुधवार, 13 मई 2020

ज़िन्दगी की जंग खुद लड़नी पड़ती हैं। ( शिक्षाप्रद कहानी )

ज़िन्दगी की जंग खुद लड़नी पड़ती है !

एक गिरगिरट को सांप ने जबड़े में काबू कर लिया और निगलने लगा !
गिरगिट बिल्कुल बेबस और लाचार हो गया !
पर उसने हिम्मत न हारी और अपने बचाव  की कोशिश लगातार जारी रखी !
उसने सांप के मुँह में जाकर भी काटना तर्क नही किया बल्कि लगातार काटता गया और आखिर कार उस को फाड़ कर सर बाहर निकाल लिया ।

शायद गिरिगिट बाहर निकल कर अपनी जान न बचा पाया हो लेकिन मरते दम तक कोशिश जारी रख कर कम अज़ कम अपने से कई बड़े गुना दुश्मन को मार तो दिया।

गिरिगिट ने हमे ये पैगाम दिया कि दुश्मन का छोटा या बड़ा होना मायने नही रखता बल्कि हमारा लड़ने का हौसला और जज़्बा अहमियत रखता है ।
मुश्किल या मुसीबत चाहे जितनी भी बड़ी हो इंसान को कोशिश करनी चाहिए ।
अगर मुसीबत को टाल दिया तो भी जीत ना टाल पाया तो भी जीत 

देश व शहरों के असली नाम

 देश व शहरों के असली नाम

01. हिन्दुस्तान, इंडिया, भारत : आर्यावर्त्त
02. कानपुर : कान्हापुर
03. दिल्ली : इन्द्रप्रस्थ
04. हैदराबाद : भाग्यनगर
05. औरंगाबाद : संभाजी नगर
06. भोपाल : भोजपाल
07. लखनऊ : लक्ष्मणपुरी
08. अहमदाबाद : कर्णावती
09. अलीगढ़ : हरिगढ़
10. मिराज : शिव प्रदेश
11. मुजफ्फरनगर : लक्ष्मी नगर
12. शामली : श्यामली
13. रोहतक : रोहितासपुर
14. पोरबंदर : सुदामापुरी
15. पटना : पाटलीपुत्र
16. नांदेड : नंदीग्राम
17. आजमगढ : आर्यगढ़
18. अजमेर : अजयमेरु
19. उज्जैन : अवंतिका
20. जमशेदपुर : काली माटी
21. विशाखापट्टनम : विजात्रापश्म
22. गुवाहटी : गौहाटी
23. सुल्तानगँज : चम्पानगरी
24. बुरहानपुर : ब्रह्मपुर
25. इंदौर : इंदुर
26. नशरुलागंज : भीरुंदा
27. सोनीपत : स्वर्णप्रस्थ
28. पानीपत : पर्णप्रस्थ
29. बागपत : बागप्रस्थ
30. उसामानाबाद : धाराशिव(महाराष्ट्र)
31. देवरिया : देवपुरी(उत्तर प्रदेश)
32. सुल्तानपुर : कुशभवनपुर
33. लखीमपुर : लक्ष्मीपुर(उत्तर प्रदेश)
34. मुरैना : मयुरवन

बिल्ली के लिए गाय ( शिक्षाप्रद कहानी )



*🎗️बिल्ली के लिए गाय🎗️*

एक बार की बात है, बहुत सारे चूहों ने विजयनगर के लोगों को परेशान कर रखा था। चूहों से छुटकारा पाने की बहुत कोशिशें की गईं। अंत में इस समस्या के हल के लिए राजा ने घोषणा की कि चूहों को पकड़ने के लिए प्रत्येक परिवार को एक-एक बिल्ली दी जाएगी। बिल्ली की देखरेख का बोझ लोगों पर न पड़े इसलिए प्रत्येक घर को एक-एक गाय भी दी जाएगी जिससे कि उस गाय का दूध बिल्लियों को पिलाया जा सके। राजा का यह निर्णय तेनालीराम को पसंद नहीं आया और राजा को समझाने के लिए उसने एक योजना बनाई।

तेनालीराम अपनी बिल्ली को पीने के लिए प्रतिदिन गर्म दूध देता। बिल्ली जैसे ही दूध पीती उसकी जीभ बुरी तरह जल जाती इसलिए बिल्ली ने धीरे-धीरे दूध पीना ही छोड़ दिया। एक दिन राजा बिल्लियों का निरीक्षण करने के लिए शहर गए। राजा ने देख कि सभी घरों की बिल्लियां तो स्वस्थ हैं, परंतु तेनालीराम की बिल्ली बहुत दुर्बल व पतली है।पूछने पर तेनालीराम बोला, 'यह बिल्ली दूध ही नही पीती।' तेनालीराम की बात की सत्यता जांचने के लिए राजा के कहने पर बिल्ली को दूध दिया गया, परंतु सदा की तरह अपनी जली जीभ की याद आते ही वह दूध देख तुरंत भाग गई।राजा समझ गए कि अवश्य ही इसमें तेनालीराम की कोई चाल है। इससे अवश्य ही कुछ ऐसा किया है जिससे कि बिल्ली दूध को देखते ही भाग जाती है। वे क्रोधित होकर अपने सैनिकों से बोले, 'तेनाली को सौ कोड़े मारे जाएं।' तेनालीराम ने राजा की ओर देखा और बोला, 'महाराज, मुझे सौ कोड़े मारिए, मुझे इसका कोई दुख नहीं है, परंतु मैं यही सोचता हूं कि जब मनुष्यों को पीने के लिए उपयुक्त मात्रा में दूध उपलब्ध नहीं है, तब बिल्लियों को इस प्रकार दूध पिलाना उचित है?

राजा को तुरंत ही अपनी गलती का एहसास हो गया। उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि गायों के दूध का उपयोग बिल्लियों के बजाय मनुष्यों के लिए किया जाए।

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है-पर्याप्त है।*
✒️✒️✒️✒️✒️✒️✒️

प्रमुख विदेशी यात्री

🎎भारत मे आने वाले विदेशी यात्री🎎




*🌺 प्लिनी* - यह भारत में पहली शताब्दी में आया था प्लिनी द्वारा '

*नेचुरल हिस्ट्री ' ( Neutral* History ) नामक पुस्तक लिखी गयी है। इस पुस्तक में भारतीय पशुओं,पेड़ों,खनिजों आदि के बारे में जानकारी प्राप्त होती है

*🌺टॅालमी -*' भारत का भूगोल ' नामक पुस्तक के लेखक टॅालमी ने दूसरी शताब्दी में भारत की यात्रा की थी।

*🌺मेगास्थनीज -* यह एक यूनानी शासक सैल्युकस निकेटर का राजदूत था जो 302 ई.पू. चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था। यह 6 वर्षों तक चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में रहा और ' इंडिका ' नामक पुस्तक लिखी। इस पुस्तक से मौर्य युग की संस्कृति,समाज एवं भारतीय इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है ।

*🌺डाइमेकस -* यह बिन्दुसार के राजदरबार में आया था । डाइमेकस सीरीयन नरेश आन्तियोकस का राजदूत था। इसके द्वारा किये गए विवरण मौर्य साम्राज्य से संबंधित है।

*🌺डायोनिसियस -* यह यूनानी राजदूत था जो सम्राट अशोक के दरबार में आया था। इसे मिस्र के नरेश टॅालमी फिलेडेल्फस द्वारा दूत बनाकर भेजा गया था।

*🌺फाहियान -* यह एक चीनी यात्री था जो गुप्त साम्राज्य में चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासन काल में 405 ई. में भारत आया था तथा 411 ई. तक भारत में रहा। इसका मूल उद्देश्य भारतीय बौद्ध ग्रंथों की जानकारी प्राप्त करना था। इसने अपने विवरण में मध्यप्रदेश की जनता को सुखी और समृद्ध बताया है।

*🌺हेुंएनसाँग -* यह भी एक चीनी यात्री था जो हर्षवर्धन के शासन काल में भारत आया था। यह 630 ई. से 643 ई. तक भारत में रहा तथा 6 वर्षों तक नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण की। हुएनसाँग के भ्रमण वृत्तांत को सि-रू-की नाम से भी जाना जाता है।इसके विवरण में हर्षवर्धन के काल के समाज,धर्म एवं राजनीति का उल्लेख है

*🌺संयुगन -* यह चीनी यात्री था जो 518 ई. में भारत आया था। इसने अपनी यात्रा में बौद्ध धर्म से संबंधित प्रतियाँ एकत्रित किया।

*🌺इत्सिंग -* इस चीनी यात्री ने 7 वी शताब्दी में भारत की यात्रा की थी। इसने नालंदा विश्वविद्यालय तथा विक्रमशिला विश्वविद्यालय का वर्णन किया है।

*🌺अलबरूनी -* यह भारत महमूद गजनवी के साथ आया था। अलबरूनी ने ' तहकीक-ए-हिन्द या 'किताबुल हिन्द' नामक पुस्तक की रचना की थी। इस पुस्तक में हिन्दुओं के इतिहास,समाज, रीति रिवाज, तथा राजनीति का वर्णन है।

*🌺मार्कोपोलो* - यह 13 वी शताब्दी के अन्त में भारत आया था। यह वेनिस का यात्री था जो पांडय राजा के दरबार में आया था।

*🌺इब्नबतूता* - यह अफ्रीकी यात्री मुहम्मद तुगलक के समय भारत आया था।मुहम्मद तुगलक द्वारा इसे प्रधान काजी नियुक्त किया गया था तथा राजदूत बनाकर चीनी भेजा गया था। इब्नबतूता द्वारा ' रहेला ' की रचना की गई है जिससे फिरोज तुगलक के शासन की जानकारी मिलती है।

*🌺अलमसूदी* - यह अरबी यात्री प्रतिहार शासक महिपाल प्रथम के शासन काल में भारत आया था। इसके द्वारा 'महजुल जबाह' नामक ग्रंथ लिखा गया था।

*🌺अब्दुल रज्जाक* - यह ईरानी यात्री विजयनगर के शासक देवराय द्वितीय के शासन काल में भारत आया था।

*🌺पीटर मण्डी* - यह यूरोप का यात्री था जो जहांगीर के शासन काल में भारत आया था।

*🌺बाराबोसा* - यह 1560 ई. में भारत आया था जब विजयनगर का शासक कृष्णदेवराय था।

🌺 *निकोला मैनुकी* - यह वेनिस का यात्री था जो औरंगजेब के दरबार में आया था। इसके द्वारा ' स्टोरियो डी मोगोर ' नामक ग्रंथ लिखा गया जिसमें मुगल साम्राज्य का वर्णन है।

*🌺बेलैंगडर डी लस्पिने -* यह एक फ्रांसीसी सैनिक था जो 1672 ई. में समुद्री बेड़े के साथ भारत पहुँचा था। इसके द्वारा पाण्डिचेरी नगर की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान रहा था।

*🌺जीन बैप्टिस्ट तेवर्नियर -* यह शाहजहां के शासन काल में भारत आया था। इसके द्वारा ही भारत के प्रसिद्ध हीरा ' कोहिनूर ' की जानकारी दी गई हैं।

*🌺कैप्टन हॅाकिग्स -* यह 1608 ई. से 1613 ई. तक भारत में रहा। यह जहांगीर के समय भारत आया था तथा ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए सुविधा प्राप्त करने का प्रयास किया। यह फारसी भाषा का जानकार था। इसके द्वारा जहांगीर के दरबार की साज सज्जा तथा जहांगीर के जीवन की जानकारी प्राप्त होती है।

*🌺सर टामस रो -* यह 1616 ई. में जहांगीर के दरबार में आया था। इसके द्वारा जहांगीर से ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए व्यापारिक सुविधा प्राप्त करने का प्रयास किया गया था।

*🌺बर्नियर* - यह एक फ्रांसीसी डाँक्टर था जो 1556 ई. में भारत आया था। इसने शाहजहां तथा औरंगजेब के शासन काल का विवरण किया है। इसकी यात्रा का वर्णन ' ट्रेवल्स इन द मुगल एम्पायर ' में है जो 1670 ई. में प्रकाशित हुआ था।

*🌺हमिल्टन -* यह एक शल्य चिकित्सक था जो फारुखसियार के शासन काल में ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रतिनिधि मंडल का सदस्य बना ।


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वैज्ञानिक मात्रक और उनकी इकाई



🌷💐 वैज्ञानिक  मात्रक एवं ईकाई💐🌷
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🌞शक्ति का मात्रक है– वाट
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🌞बल का मात्रक है– न्यूटन
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🌞कार्य का मात्रक है– जूल
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🌞चालक की वैधुत प्रतिरोधकता की मात्रक है– ओम मीटर
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🌞प्रकाश वर्ष इकाई है– दूरी का
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🌞प्रकाश वर्ष है– वह दूरी, जो प्रकाश 1 वर्ष में तय करता है|
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🌞एक पारसेक, तारों संबंधी दूरियां मापने का मात्रक, बराबर है– 3.25 प्रकाश वर्ष
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🌞पारसेक मात्रक है– दूरी की
एंपियर मापने की इकाई है– current
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🌞मेगा वाट बिजली के नापने की इकाई है जो– उत्पादित की जाती है
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🌞त्वरण का मात्रक है– मीटर प्रति सेकंड स्क्वायर
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🌞आवेश का मात्रक है– न्यूटन सेकंड
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🌞उष्मा का मात्रक है – कैलोरी
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🌞समुद्री जहाज की गति मापी जाती है– नॉट
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🌞नौसंचालन का मात्रक है– नॉटिकल मील
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🌞विभवांतर का मात्रक है– वोल्ट
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🌞प्रकाश के तरंगधैर्य का मात्रक है – Angastram
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🌞एक हॉर्स पावर में कितने वाट होते हैं-746
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🌞ऊर्जा का मात्रक है– जूल
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🌞दाब का मात्रक है– पास्कल
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🌞उच्च वेग को प्रदर्शित करता है– मैक(mach)
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🌞ध्वनि की प्रबलता की मात्रक है– डेसीबल
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🌞शक्ति की इकाई है– अश्वशक्ति(हॉर्स पॉवर)
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🌞नौसंचालन में दूरी की इकाई है– समुद्री मील
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🌞क्यूसेक में मापा जाता है – जल का बहाव
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🌞ओजोन परत की ऊंचाई मापी जाती है– dabson(डॉबसन)
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🌞महासागर में डूबी हुई वस्तुओं की स्थिति जानने के लिए यंत्र का प्रयोग करते हैं– सोनार
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🌞नौसंचालाको द्वारा प्रयोग में लाया जाता है– सोनार
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🌞ध्वनि की तीव्रता मापने वाले यंत्र हैं– ऑडियो मीटर
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🌞वायु की चाल मापने वाला यंत्र है– एनीमोमीटर
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🌞विधुत प्रतिरोध का मात्रक है– ओम
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🌞विधुत आवेश का मात्रक है  -कूलाम
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🌞करेंट का मात्रक है– एम्पिएर
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🌞लम्बाई की न्यूनतम इकाई है– फर्मिमीटर
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🌞भूकम्प की तीव्रता मापी जाती है– रिक्टर पैमाने पर
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🌞डॉबसन इकाई का प्रयोग  जाता है – ओजोन परत की मोटाई मापने में
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🌞ध्वनि की तीव्रता को मापने वाला यन्त्र है– ऑडियोमीटर
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🌞पईरोमीटर मापन में प्रयोग होता है– उच्च ताप
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🌞मैनोमीटर के द्वारा माप की जाती है – गैसों के दाब
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🌞दाब मापने हेतु प्रयोग की जाती है – बैरोमीटर
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🌞अमीटर प्रयोग की जाती है – करंट
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🌞हाइग्रोमीटर मापन में प्रयोग होता है – आर्द्रता
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🌞रक्त दब मापने के यन्त्र है – स्फिग्मोमैनोमीटर
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🌞प्रकाश की तीव्रता मापने के लिए प्रयोग की जाती है – लक्समीटर
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🌞सिस्मोग्राफ क्या रिकॉर्ड करता है– भूचाल
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🌞रेनगेज का प्रयोग होता है – वर्षामापी के लिए
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🌞मात्रकों का अंतरराष्ट्रीय पद्धति कब लागू हुआ– 1971
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🌞एस आई पद्धति में लेंस की शक्ति का मात्रक है– डायोप्टर
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🌞ल्यूमेन मात्रक है- ज्योति फ्लक्स का
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🌞कैंडेला मात्रक है– ज्योति तीव्रता का
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🌞रेडियोऐक्टिव धर्मिता का मात्रक है- क्यूरी
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प्राचीनतम पुस्तकें

💐💐💐🍁वेद- वेदांङ्ग एवं पुराणों की संक्षिप्त जानकारी।।(तथा-प्राचीनकाल की महत्वपूर्ण पुस्तकें)🌷 💐💐💐
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1-अस्टाध्यायी               पांणिनी
2-रामायण                    वाल्मीकि
3-महाभारत                  वेदव्यास
4-अर्थशास्त्र                  चाणक्य
5-महाभाष्य                  पतंजलि
6-सत्सहसारिका सूत्र      नागार्जुन
7-बुद्धचरित                  अश्वघोष
8-सौंदरानन्द                 अश्वघोष
9-महाविभाषाशास्त्र        वसुमित्र
10- स्वप्नवासवदत्ता        भास
11-कामसूत्र                  वात्स्यायन
12-कुमारसंभवम्           कालिदास
13-अभिज्ञानशकुंतलम्    कालिदास 
14-विक्रमोउर्वशियां        कालिदास
15-मेघदूत                    कालिदास
16-रघुवंशम्                  कालिदास
17-मालविकाग्निमित्रम्   कालिदास
18-नाट्यशास्त्र              भरतमुनि
19-देवीचंद्रगुप्तम          विशाखदत्त
20-मृच्छकटिकम्          शूद्रक
21-सूर्य सिद्धान्त           आर्यभट्ट
22-वृहतसिंता               बरामिहिर
23-पंचतंत्र।                  विष्णु शर्मा
24-कथासरित्सागर        सोमदेव
25-अभिधम्मकोश         वसुबन्धु
26-मुद्राराक्षस               विशाखदत्त
27-रावणवध।              भटिट
28-किरातार्जुनीयम्       भारवि
29-दशकुमारचरितम्     दंडी
30-हर्षचरित                वाणभट्ट
31-कादंबरी                वाणभट्ट
32-वासवदत्ता             सुबंधु
33-नागानंद                हर्षवधन
34-रत्नावली               हर्षवर्धन
35-प्रियदर्शिका            हर्षवर्धन
36-मालतीमाधव         भवभूति
37-पृथ्वीराज विजय     जयानक
38-कर्पूरमंजरी            राजशेखर
39-काव्यमीमांसा         राजशेखर
40-नवसहसांक चरित   पदम् गुप्त
41-शब्दानुशासन         राजभोज
42-वृहतकथामंजरी      क्षेमेन्द्र
43-नैषधचरितम           श्रीहर्ष
44-विक्रमांकदेवचरित   बिल्हण
45-कुमारपालचरित      हेमचन्द्र
46-गीतगोविन्द            जयदेव
47-पृथ्वीराजरासो         चंदरवरदाई
48-राजतरंगिणी           कल्हण
49-रासमाला               सोमेश्वर
50-शिशुपाल वध          माघ
51-गौडवाहो                वाकपति
52-रामचरित                सन्धयाकरनंदी
53-द्वयाश्रय काव्य         हेमचन्द्र

वेद-ज्ञान:-

प्र.1-  वेद किसे कहते है ?
उत्तर-  ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक को वेद कहते है।

प्र.2-  वेद-ज्ञान किसने दिया ?
उत्तर-  ईश्वर ने दिया।

प्र.3-  ईश्वर ने वेद-ज्ञान कब दिया ?
उत्तर-  ईश्वर ने सृष्टि के आरंभ में वेद-ज्ञान दिया।

प्र.4-  ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ?
उत्तर- मनुष्य-मात्र के कल्याण         के लिए।

प्र.5-  वेद कितने है ?
उत्तर- चार ।                                                 
1-ऋग्वेद
2-यजुर्वेद 
3-सामवेद
4-अथर्ववेद

प्र.6-  वेदों के ब्राह्मण ।
        वेद              ब्राह्मण
1 - ऋग्वेद      -     ऐतरेय
2 - यजुर्वेद      -     शतपथ
3 - सामवेद     -    तांड्य
4 - अथर्ववेद   -   गोपथ

प्र.7-  वेदों के उपवेद कितने है।
उत्तर -  चार।
      वेद                     उपवेद
    1- ऋग्वेद       -     आयुर्वेद
    2- यजुर्वेद       -    धनुर्वेद
    3 -सामवेद      -     गंधर्ववेद
    4- अथर्ववेद    -     अर्थवेद

प्र 8-  वेदों के अंग हैं ।
उत्तर -  छः ।
1 - शिक्षा
2 - कल्प
3 - निरूक्त
4 - व्याकरण
5 - छंद
6 - ज्योतिष

प्र.9- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने किन किन ऋषियो को दिया ?
उत्तर- चार ऋषियों को।
         वेद                ऋषि
1- ऋग्वेद         -      अग्नि
2 - यजुर्वेद       -       वायु
3 - सामवेद      -      आदित्य
4 - अथर्ववेद    -     अंगिरा

प्र.10-  वेदों का ज्ञान ईश्वर ने ऋषियों को कैसे दिया ?
उत्तर- समाधि की अवस्था में।

प्र.11-  वेदों में कैसे ज्ञान है ?
उत्तर-  सब सत्य विद्याओं का ज्ञान-विज्ञान।

प्र.12-  वेदो के विषय कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-   चार ।
        ऋषि        विषय
1-  ऋग्वेद    -    ज्ञान
2-  यजुर्वेद    -    कर्म
3-  सामवे     -    उपासना
4-  अथर्ववेद -    विज्ञान

प्र.13-  वेदों में।

ऋग्वेद में।
1-  मंडल      -  10
2 - अष्टक     -   08
3 - सूक्त        -  1028
4 - अनुवाक  -   85
5 - ऋचाएं     -  10589

यजुर्वेद में।
1- अध्याय    -  40
2- मंत्र           - 1975

सामवेद में।
1-  आरचिक   -  06
2 - अध्याय     -   06
3-  ऋचाएं       -  1875

अथर्ववेद में।
1- कांड      -    20
2- सूक्त      -   731
3 - मंत्र       -   5977
         
प्र.14-  वेद पढ़ने का अधिकार किसको है ?                                                                                                                                                              उत्तर-  मनुष्य-मात्र को वेद पढ़ने का अधिकार है।

प्र.15-  क्या वेदों में मूर्तिपूजा का विधान है ?
उत्तर-  बिलकुल भी नहीं।

प्र.16-  क्या वेदों में अवतारवाद का प्रमाण है ?
उत्तर-  नहीं।

प्र.17-  सबसे बड़ा वेद कौन-सा है ?
उत्तर-  ऋग्वेद।

प्र.18-  वेदों की उत्पत्ति कब हुई ?
उत्तर-  वेदो की उत्पत्ति सृष्टि के आदि से परमात्मा द्वारा हुई । अर्थात 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख 43 हजार वर्ष पूर्व ।

प्र.19-  वेद-ज्ञान के सहायक दर्शन-शास्त्र ( उपअंग ) कितने हैं और उनके लेखकों का क्या नाम है ?
उत्तर-
1-  न्याय दर्शन  - गौतम मुनि।
2- वैशेषिक दर्शन  - कणाद मुनि।
3- योगदर्शन  - पतंजलि मुनि।
4- मीमांसा दर्शन  - जैमिनी मुनि।
5- सांख्य दर्शन  - कपिल मुनि।
6- वेदांत दर्शन  - व्यास मुनि।

प्र.20-  शास्त्रों के विषय क्या है ?
उत्तर-  आत्मा,  परमात्मा, प्रकृति,  जगत की उत्पत्ति,  मुक्ति अर्थात सब प्रकार का भौतिक व आध्यात्मिक  ज्ञान-विज्ञान आदि।

प्र.21-  प्रामाणिक उपनिषदे कितनी है ?
उत्तर-  केवल ग्यारह।

प्र.22-  उपनिषदों के नाम बतावे ?
उत्तर- 
01-ईश ( ईशावास्य ) 
02-केन 
03-कठ 
04-प्रश्न 
05-मुंडक 
06-मांडू 
07-ऐतरेय 
08-तैत्तिरीय
09-छांदोग्य
10-वृहदारण्यक
11-श्वेताश्वतर ।

प्र.23-  उपनिषदों के विषय कहाँ से लिए गए है ?
उत्तर- वेदों से।
प्र.24- चार वर्ण।
उत्तर-
1- ब्राह्मण
2- क्षत्रिय
3- वैश्य
4- शूद्र

प्र.25- चार युग।
1- सतयुग - 17,28000  वर्षों का नाम ( सतयुग ) रखा है।
2- त्रेतायुग- 12,96000  वर्षों का नाम ( त्रेतायुग ) रखा है।
3- द्वापरयुग- 8,64000  वर्षों का नाम है।
4- कलयुग- 4,32000  वर्षों का नाम है।
कलयुग के  4,976  वर्षों का भोग हो चुका है अभी तक।
4,27024 वर्षों का भोग होना है।

पंच महायज्ञ
       1- ब्रह्मयज्ञ 
       2- देवयज्ञ
       3- पितृयज्ञ
       4- बलिवैश्वदेवयज्ञ
       5- अतिथियज्ञ
 
स्वर्ग  -  जहाँ सुख है।
नरक  -  जहाँ दुःख है।.