गुरुवार, 27 जून 2019

संख्या पद्धति परिचय ( गणित )


  •  प्राकृत संख्याएँ :- वस्तुओ को गिनने के लिए जिन संख्याओ  का प्रयोग किया जाता है, उन्हे प्राकृत संख्याएँ कहते है। इन संख्याओं को गणन या गिनने वाली संख्या भी कहते है ।

          जैसे -  1,2,3,4,5,6,7,8,9............

  • पूर्ण संख्याएँ :- प्राकृत संख्याओं में शून्य ( 0 ) को शामिल करने पर जो संख्याएँ प्राप्त होती है, उन्हे पूर्ण संख्याएँ कहते है ।
           जैसे -   0,1,2,3,4,5,6,7,8,9 ........
  • पूर्णांक संख्याएँ :-  प्राकृत संख्याओं  में शून्य और ऋणात्मक संख्याओं को शामिल करने पर जो संख्याएँ   प्राप्त होती है, उन्हे पूर्णांक संख्याएँ कहते है ।
             जैसे -  ........-3, -2 , -1 , 0, 1 , 2, 3....
  •  सम संख्याएँ :- वे संख्याएँ जो 2 से पूर्णतः विभाजित हो जाती है , उन्हें सम संख्याएँ कहते है। अथवा जिन संख्याओ के इकाई के अंक 0, 2,4,6,8 हो ,उन्हे सम संख्याएँ कहते है।
         जैसे - 2,4,6,8,10....
  •  विषम संख्याएँ :-  वे संख्याएँ जो 2 से पूर्णतः विभाजित नहीं होती, उन्हें विषम संख्याएँ कहते है।   अथवा जिन संख्याओ के इकाई का अंक 1, 3, 5, 7, 9 हो ,विषम संख्याएँ  कहलाती है।
        जैसे -  1,3,5,7,9,11.....
  • भाज्य संख्याएँ :- वे संख्याएँ जो स्वयं और 1 के अतिरिक्त  किसी अन्य संख्या   से पूर्णतः विभाजित हो ,भाज्य संख्याएँ कहलाती है ।
                       जैसे - 4,6,8,9,10,12 .....
  • अभाज्य संख्याएँ :-  वे संख्याएँ जो स्वयं और 1  के अतिरिक्त किसी   अन्य संख्या से विभाजित नही हो, अभाज्य संख्याएँ कहलाती है ।
  •  1 एक  विशेष संख्या है जो न तो भाज्य है,और न ही अभाज्य संख्या है।  सबसे छोटी अभाज्य 2 है । 
  • परिमेय संख्याएँ :-  वे संख्याएँ जिन्हें p/q  या अंश/हर  के रूप लिखा जा सके ,परिमेय संख्याएँ कहलाती है ।
                      
                          जैसे - 3/2,4/5 , √4....
  • अपरिमेय संख्याएँ :-   वे संख्याएँ जिन्हें p/q या अंश /हर के रूप न लिखा जा सके ,अपरिमेय संख्याएँ कहलाती है ।
         जैसे -  √2,√3,√5.... 

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