गुरुवार, 15 अगस्त 2024

सार्वजनिक वस्तुएं , निजी वस्तुएं , उत्कृष्ठ वस्तुएं , मिश्रित वस्तुएं किसे कहते है?


1. सार्वजनिक वस्तुएं - सार्वजनिक ( लोक ) वस्तु से अभिप्राय उस वस्तु से होता है जिसका लाभ अविभाज्य होता है , और यह सम्पूर्ण समाज को प्राप्त होता है।


प्रो. पीए सेम्युल्सन के अनुसार “ सार्वजनिक वस्तु एक ऐसी वस्तु है जिसका सभी लोग मिलकर आनन्द प्राप्त करते है, जबकि किसी एक व्यक्ति के उपयोग में वृद्धि किसी अन्य व्यक्ति के उपयोगी में कमी किए बगैर प्राप्त होती है।"

2. निजी वस्तुएं  - निजी वस्तुएं अथवा व्यक्तिगत वस्तुएं वे है , जिन्हें बाजार व्यवस्था या कीमत प्रणाली के द्वारा संतुष्ट किया जा सकता है।


उदाहरण - रोटी एक निजी वस्तु है , जिसका उपभोग वहीं व्यक्ति करता है जिसने इसकी कीमत अदा की है। अन्य व्यक्ति इसका उपभोग नहीं कर सकता है।


3. उत्कृष्ट एवं गैर उत्कृष्ट वस्तुएं  -ऐसी वस्तुएं जो गुणो पर आधारित होती है उन्हें उत्कृष्ट या मैरिट वस्तुएं कहते है।

उदाहरण - शिक्षा , स्वास्थ्य , सार्वजनिक वितरण प्रणाली ।


सरकार जिन वस्तुओं के उपभोग को समाज के लिए हानिकारक समझती है , उन पर अनेक प्रकार के नियंत्रण लागू करती है। ऐसी वस्तुएं गैर - उत्कृष्ट वस्तुएं कहलाती है। 

जैसे - सिगरेट , तम्बाकू , शराब आदि।

4. मिश्रित वस्तुएं


शुक्रवार, 9 अगस्त 2024

वायुमण्डल किसे कहते है? वायुमण्डल में गैसों का संघटन समझाइए।

पृथ्वी के चारों ओर वायु का आवरण जो विभिन्न गैसों के मिश्रण से बना है , वायु मण्डल कहलाता है।

  गैस                 प्रतिशत

 नाइट्रोजन          78.1%

 ऑक्सीजन         20.9%

 आर्गन               0.09%

 कार्बन डाई ऑक्साइड 0.03%

 जलवाष्प और अन्य गैसें 0.02%

रविवार, 21 जुलाई 2024

भारत की प्रमुख जनजाति

 *✍️भारत की जनजातियाँ /States and their Major Tribes in India*


*जम्मू कश्मीर (Jammu & Kashmir):* बक्करवाल, गद्दी, लद्दाखी, गुर्जर (Bakarwal, Gaddi, Ladakhi, Gujjar)


*हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh):* गद्दी, लाहौली, किन्नौरा, गुर्जर (Gaddi, Lahauli, Kinnaura, Gujjar)


*उत्तराखंड (Uttarakhand):* थारू, बुक्सा, कोल, जौनसारी (Tharu, Buksa, Kol, Jaunsari)


*उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh):* कोल, खरवार, थारू (Kol, Kharwar, Tharu)


*मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh):* भील, बैगा, कोल, गोंड, मुंडा (Bhil, Baiga, Kol, Gond, Munda)


*छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh):* मुड़िया, कमार, कोरबा, मारिया, गोंड (Muria, Kamar, Korba, Maria, Gond)


*ओडिशा (Odisha):* संथाल, हो, कोल, ओझा, जुंग, खारिया (Santhal, Ho, Kol, Ojha, Jung, Kharia)


*झारखंड (Jharkhand):* संथाल, उरांव, मुंडा, बिरहोर, हो (Santhal, Oraon, Munda, Birhor, Ho)


*बिहार (Bihar):* संथाल, थारू (Santhal, Tharu)


*पश्चिम बंगाल (West Bengal):* लेपचा, लोहार, भूमिज, संथाल (Lepcha, Lohar, Bhumij, Santhal)


*सिक्किम (Sikkim):* लेपचा (Lepcha)


*असम (Assam):* नागा, अबोर, मिशिंग, सुन्भार (Naga, Abor, Mishing, Sunbhar)


*मेघालय (Meghalaya):* गारो, खासी, जयंतिया (Garo, Khasi, Jaintia)


*अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh):* मोपा, मीजी, अपातानी, डवल, निश्मी (Mopa, Miji, Apatani, Dawl, Nishmi)


*मिजोरम (Mizoram):* चकमा, मिजो, लुशाई (Chakma, Mizo, Lushai)


*नागालैंड (Nagaland):* नागा, अंगामी, मिकिर (Naga, Angami, Mikir)


*मणिपुर (Manipur):* नागा, अंगामी, कुकी (Naga, Angami, Kuki)


*त्रिपुरा (Tripura):* त्रिपुरी (Tripuri)


*आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh):* चेंचू, गवरा, गोंड (Chenchu, Gavara, Gond)


*तमिलनाडु (Tamil Nadu):* बडगा, टोडा, कोटा (Badaga, Toda, Kota)


*केरल (Kerala):* मोपला, उराली, ईश्वला, पनियान (Mopla, Urali, Eshwala, Paniyan)


*महाराष्ट्र (Maharashtra):* बारेली, कोंकण, कोली (Bareli, Konkan, Koli)


*राजस्थान (Rajasthan):* सहारिया, सांसी, मीणा, भील (Sahariya, Sansi, Meena, Bhil)


*गुजरात (Gujarat):* भील, पटेलिया, कोली (Bhil, Patelia, Koli)


*लक्षद्वीप (Lakshadweep):* अमीन (Amin)


*अंडमान एवं निकोबार (Andaman & Nicobar):* जारवा, जेन्टू, रेंटील्स, शोम्पेन (Jarawa, Jentu, Rentills, Shompen)

सिन्धु सभ्यता के प्रमुख नगर एवं नदी ।

 *_🗣️सिंधु सभ्यता के प्रमुख नगर_*


*नगर>>>>>>>>>>>> नदी*


🔲 मोहनजोदड़ो - सिंधु नदी 

🔲 हड़प्पा - रावी नदी 

🔲 रोपड़ - सतलज नदी 

🔲 माँडा - चिनाब नदी 

🔲 कालीबंगा - घग्गर नदी 

🔲 लोथल - भोगवा नदी 

🔲 सुत्कांगेडोर - दाश्क नदी 

🔲 बालाकोट - विंदार नदी 

🔲 सोत्काकोह - शादिकौर 

🔲 आलमगीरपुर - हिण्डन नदी 

🔲 रंगपुर - मादर नदी

🔲 कोटदीजी - सिंधु नदी 

🔲 बनवाली - प्राचीन सरस्वती नदी

🔲 चन्हूदड़ों - सिंधु नदी

गुरुवार, 18 जुलाई 2024

भारत के पशु अनुसंधान केन्द्र

 *✍️भारत में प्रमुख पशुधन अनुसंधान संस्थान*

*Major Livestock Research Institutes in India*


- *राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान*  

  National Dairy Research Institute  

  - करनाल (हरियाणा)  

    Karnal (Haryana)


- *राष्ट्रीय मधुमक्खी अनुसंधान संस्थान*  

  National Bee Research Institute  

  - पुणे (महाराष्ट्र)  

    Pune (Maharashtra)


- *केन्द्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान*  

  Central Avian Research Institute  

  - इज्जतनगर (उत्तर प्रदेश)  

    Izatnagar (Uttar Pradesh)


- *राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र*  

  National Horse Research Center  

  - हिसार (हरियाणा)  

    Hisar (Haryana)


- *राष्ट्रीय पशु चिकित्सा विषाणु अनुसंधान संस्थान*  

  National Institute of Veterinary Virology  

  - इज्जतनगर (उत्तर प्रदेश)  

    Izatnagar (Uttar Pradesh)


- *भारतीय घास क्षेत्र एवं चारा अनुसंधान केन्द्र* 

  Indian Grassland and Fodder Research Institute  

  - झाँसी (उत्तर प्रदेश)  

    Jhansi (Uttar Pradesh)


- *केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान*  

  Central Buffalo Research Institute  

  - हिसार (हरियाणा)  

    Hisar (Haryana)


- *केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान*  

  Central Goat Research Institute  

  - मखदूम (उत्तर प्रदेश)  

    Makhdoom (Uttar Pradesh)


- *राष्ट्रीय मांस अनुसंधान केन्द्र* 

  National Meat Research Center  

  - इज्जतनगर (उत्तर प्रदेश)  

    Izatnagar (Uttar Pradesh)

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मंगलवार, 9 जुलाई 2024

मुगलकालीन पुस्तकें

 📚मुगल कालीन प्रमुख साहित्य:– 


     साहित्य                लेखक 


०बाबरनामा–बाबर

०आइना-ए-अकबरी–अबुल फजल 

०अकबरनामा– अबुल फ़ज़ल

०मुंतख़ाब अत तवारीख़–बदायूँनी

०हुमायूँनामा–गुलबदन बेगम

०पादशाहनामा–अब्दुल हमीद लाहौरी

०ताजुल मासिर–हसन निज़ामी

०कानून-ए-हुमायूंनी–ख्वांदमीर

०तबकाते अकबरी–निजामुद्दीन अहमद

०नुश्खा-ए-दिलकुशा–भीम सेन

०तारीखे शेरशाही–अब्बास खां शरवानी

०तोहफा-ए-अकबर–अब्बास खां शरवानी

०आलमगीर नामा–मिर्जा मोहम्मद काज़िम

०सियार-उल-मुतखरीन–गुलाम हुसैन

०आलमे सालेह–मुहम्मद सालेह

०शाहजहांनामा–इनायत खां

०इकबालनामा-ए-जहांगीरी–मोतमिद खां

०चहार चमन–चन्द्रभान ब्रह्मन

०फुतुहात-ए-आलमगीरी–ईश्वरदास

शुक्रवार, 28 जून 2024

मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षकों पर आधारित कविता

 मध्यप्रदेश का अतिथि शिक्षक 

=====.===== 

हो गया आबंटन।

अब हो बाटांधार।।

पोर्टल से हटेंगे अब।

वारी वारी सबकी वारी।।‌

सियासत के गलियारों में।

फंसें सभी संगठन है।।

नेताओं की बातों में।

घर ना घाट बच पाए।।

मांगों का बना पुलंदा।

घर बैठने जातें हम।।

कलम छोड़ डंडा थामा था।

अब स्कूल छोड़ घर जाना है।

नये नये संगठन बना लिए।

नेता बनने के चक्कर में।।

एक नहीं अनेकों मांगे मांग रहे हैं।

दम नहीं है एक मांग पूरी करवानें की।।

भोला भाला अतिथि शिक्षक भटक रहा है।

इन नेताओं के संगठन के गलियारों में।।

दम नहीं है इनकी बातों में।

नेता और गधा की लातों में।

चुनाव पूर्व जो दम भरते अपने अपने नेताओं का।

वोट और सपोर्ट लेकर कहां विलुप्त हो गए हैं।।

कहते कुछ हैं करते कुछ है।

भुगत रहे हम सब करनी।।

ऐ नहीं मानेंगे तब तक।

जब सभी को घर विठा नहीं देते।।

फिर चलेगा चंदा चिट्ठा।

व्यवसाय फली भूत होगा।।

ज्ञान चंद और स्वार्थ परख में।

डूबा दिया अतिथि शिक्षक को।।

आस लगाए बैठे थे जिनसे।

विश्वास घात किया दम से।।

घर से निकलने समय नहीं है।

चपरासी बनने दौड़ लगा बैठे।।

घर बैठ व्हाटसोप के ज्ञान चंदों की कमी नहीं है।

घर से बाहर निकल आने में लोक लाज इन्हें आतीं हैं।।

जब वारी आतीं झुनझुना बजाने की।

फिर चिल चिल पो पो करते हैं।।

एक विश्व में जन्तु अनोखा देखा।

जो अतिथि शिक्षक म.प्र. कहलाता है।।

अजित जैन शास्त्रि 

टीकमगढ़ 

7000265886

9754682969

अर्थशास्त्र की प्रसिद्ध पुस्तकें ( किताबें ) और उनके लेखक

 *✍️अर्थशास्त्र: प्रमुख पुस्तकें /Economics: Major Books*



1. वेल्थ ऑफ नेशन्स / Wealth of Nations

   - लेखक (Author): एडम स्मिथ / Adam Smith


2. फाउंडेशन ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस / Foundation of Economic Analysis

   - लेखक (Author): सैमुएल्सन / Samuelson


3. प्रिंसिपल्स ऑफ इकोनॉमिक्स / Principles of Economics

   - लेखक (Author): मार्शल / Marshall


4. नेचर एंड सिग्निफिकेंस ऑफ इकोनॉमिक साइंस / Nature and Significance of Economic Science

   - लेखक (Author): रॉबिन्स / Robbins


5. दास कैपिटल / Das Kapital

   - लेखक (Author): कार्ल मार्क्स / Karl Marx


6. द थ्योरी ऑफ एम्प्लॉयमेंट, इंटरेस्ट एंड मनी / The General Theory of Employment, Interest, and Money

   - लेखक (Author): जे. एम. केन्ज / J. M. Keynes


7. जनरल थ्योरी ऑफ एम्प्लॉयमेंट, इंटरेस्ट एंड मनी / The General Theory of Employment, Interest, and Money

   - लेखक (Author): कीन्स / Keynes


8. हाउ टू पे फॉर द वार / How to Pay for the War

   - लेखक (Author): कीन्स / Keynes

रविवार, 9 जून 2024

अलंकार

 हिन्दी व्याकरण/HINDI GRAMMAR:

🔰 अलंकार 🔰

*अलंकार – ” काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व अलंकार कहे जाते हैं ! “*

*अलंकार के तीन भेद हैं –*

*1. शब्दालंकार – ये शब्द पर आधारित होते हैं ! प्रमुख शब्दालंकार हैं – अनुप्रास , यमक , शलेष , पुनरुक्ति , वक्रोक्ति आदि !*

*2. अर्थालंकार – ये अर्थ पर आधारित होते हैं ! प्रमुख अर्थालंकार हैं – उपमा , रूपक , उत्प्रेक्षा, प्रतीप , व्यतिरेक , विभावना , विशेषोक्ति ,अर्थान्तरन्यास , उल्लेख , दृष्टान्त, विरोधाभास , भ्रांतिमान आदि !*

*3.उभयालंकार- उभयालंकार शब्द और अर्थ दोनों पर आश्रित रहकर दोनों को चमत्कृत करते हैं!*

*1- उपमा – जहाँ गुण , धर्म या क्रिया के आधार पर उपमेय की तुलना उपमान से की जाती है*
👉जैसे –  हरिपद कोमल कमल से ।
हरिपद ( उपमेय )की तुलना कमल ( उपमान ) से कोमलता के कारण की गई ! अत: उपमा अलंकार है !

*2- रूपक – जहाँ उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप किया जाता है !*
👉 जैसे –
अम्बर पनघट में डुबो रही ताराघट उषा नागरी ।
आकाश रूपी पनघट में उषा रूपी स्त्री तारा रूपी घड़े डुबो रही है ! यहाँ आकाश पर पनघट का , उषा पर स्त्री का और तारा पर घड़े का आरोप होने से रूपक अलंकार है !

*3- उत्प्रेक्षा – उपमेय में उपमान की कल्पना या सम्भावना होने पर उत्प्रेक्षा अलंकार होता है !*
👉जैसे –  मुख मानो चन्द्रमा है ।
यहाँ मुख ( उपमेय ) को चन्द्रमा ( उपमान ) मान लिया गया है ! यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है !

👆🏻👆🏻 *इस अलंकार की पहचान मनु , मानो , जनु , जानो शब्दों से होती है !*

*4- यमक – जहाँ कोई शब्द एक से अधिक बार प्रयुक्त हो और उसके अर्थ अलग -अलग हों वहाँ यमक अलंकार होता है !*
👉 जैसे – सजना है मुझे सजना के लिए ।
यहाँ पहले सजना का अर्थ है – श्रृंगार करना और दूसरे सजना का अर्थ – नायक शब्द दो बार प्रयुक्त है ,अर्थ अलग -अलग हैं ! अत: यमक अलंकार है !

*5- शलेष – जहाँ कोई शब्द एक ही बार प्रयुक्त हो , किन्तु प्रसंग भेद में उसके अर्थ एक से अधिक हों , वहां शलेष अलंकार है !*
👉 जैसे – रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून ।
पानी गए न ऊबरै मोती मानस चून ।।
यहाँ पानी के तीन अर्थ हैं – कान्ति , आत्म – सम्मान और जल ! अत: शलेष अलंकार है , क्योंकि पानी शब्द एक ही बार प्रयुक्त है तथा उसके अर्थ तीन हैं !

*6- विभावना – जहां कारण के अभाव में भी कार्य हो रहा हो , वहां विभावना अलंकार है !*

👉जैसे –
बिनु पग चलै सुनै बिनु काना ।
वह ( भगवान ) बिना पैरों के चलता है और बिना कानों के सुनता है ! कारण के अभाव में कार्य होने से यहां विभावना अलंकार है !

*7- अनुप्रास – जहां किसी वर्ण की अनेक बार क्रम से आवृत्ति हो वहां अनुप्रास अलंकार होता है !*
👉 जैसे –
भूरी -भूरी भेदभाव भूमि से भगा दिया ।
‘ भ ‘ की आवृत्ति अनेक बार होने से यहां अनुप्रास अलंकार है !

*8- भ्रान्तिमान – उपमेय में उपमान की भ्रान्ति होने से और तदनुरूप क्रिया होने से भ्रान्तिमान अलंकार होता है !*
👉 जैसे –
नाक का मोती अधर की कान्ति से , बीज दाड़िम का समझकर भ्रान्ति से,
देखकर सहसा हुआ शुक मौन है, सोचता है अन्य शुक यह कौन है ?
यहां नाक में तोते का और दन्त पंक्ति में अनार के दाने का भ्रम हुआ है , यहां भ्रान्तिमान अलंकार है !

9- सन्देह – जहां उपमेय के लिए दिए गए उपमानों में सन्देह बना रहे तथा निशचय न हो सके, वहां सन्देह अलंकार होता है !जैसे –
सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है ।
सारी ही की नारी है कि नारी की ही सारी है ।

*10- व्यतिरेक – जहां कारण बताते हुए उपमेय की श्रेष्ठता उपमान से बताई गई हो , वहां व्यतिरेक अलंकार होता है !*
👉जैसे –
का सरवरि तेहिं देउं मयंकू । चांद कलंकी वह निकलंकू ।।
मुख की समानता चन्द्रमा से कैसे दूं ? चन्द्रमा में तो कलंक है , जबकि मुख निष्कलंक है !

*11- असंगति – कारण और कार्य में संगति न होने पर असंगति अलंकार होता है !*
👉 जैसे –
हृदय घाव मेरे पीर रघुवीरै ।
घाव तो लक्ष्मण के हृदय में हैं , पर पीड़ा राम को है , अत: असंगति अलंकार है !

*12- प्रतीप – प्रतीप का अर्थ है उल्टा या विपरीत । यह उपमा अलंकार के विपरीत होता है । क्योंकि इस अलंकार में उपमान को लज्जित , पराजित या हीन दिखाकर उपमेय की श्रेष्टता बताई जाती है !*

👉 जैसे –
सिय मुख समता किमि करै चन्द वापुरो रंक ।
सीताजी के मुख ( उपमेय )की तुलना बेचारा चन्द्रमा ( उपमान )नहीं कर सकता । उपमेय की श्रेष्टता प्रतिपादित होने से यहां प्रतीप अलंकार है !

*13- दृष्टान्त – जहां उपमेय , उपमान और साधारण धर्म का बिम्ब -प्रतिबिम्ब भाव होता है,*

👉जैसे-
बसै बुराई जासु तन ,ताही को सन्मान ।
भलो भलो कहि छोड़िए ,खोटे ग्रह जप दान ।।
यहां पूर्वार्द्ध में उपमेय वाक्य और उत्तरार्द्ध में उपमान वाक्य है ।इनमें ‘ सन्मान होना ‘ और ‘ जपदान करना ‘ ये दो भिन्न -भिन्न धर्म कहे गए हैं । इन दोनों में बिम्ब -प्रतिबिम्ब भाव है । अत: दृष्टान्त अलंकार ह


*14- अर्थान्तरन्यास – जहां सामान्य कथन का विशेष से या विशेष कथन का सामान्य से समर्थन किया जाए , वहां अर्थान्तरन्यास अलंकार होता है !*

👉जैसे –
जो रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकत कुसंग ।
चन्दन विष व्यापत नहीं लपटे रहत भुजंग ।।

*15- विरोधाभास – जहां वास्तविक विरोध न होते हुए भी विरोध का आभास मालूम पड़े , वहां विरोधाभास अलंकार होता है !*
👉 जैसे –
या अनुरागी चित्त की गति समझें नहीं कोइ ।
ज्यों -ज्यों बूडै स्याम रंग त्यों -त्यों उज्ज्वल होइ ।।
यहां स्याम रंग में डूबने पर भी उज्ज्वल होने में विरोध आभासित होता है , परन्तु वास्तव में ऐसा नहीं है । अत: विरोधाभास अलंकार है !

*16- मानवीकरण – जहां जड़ वस्तुओं या प्रकृति पर मानवीय चेष्टाओं का आरोप किया जाता है , वहां मानवीकरण अलंकार है !*
👉 जैसे –
फूल हंसे कलियां मुसकाई ।
यहां फूलों का हंसना , कलियों का मुस्कराना मानवीय चेष्टाएं हैं , अत: मानवीकरण अलंकार है!

*17- अतिशयोक्ति – अतिशयोक्ति का अर्थ है – किसी बात को बढ़ा -चढ़ाकर कहना ।*
👉जब काव्य में कोई बात बहुत बढ़ा -चढ़ाकर कही जाती है तो वहां अतिशयोक्ति अलंकार होता है !जैसे –
लहरें व्योम चूमती उठतीं ।
यहां लहरों को आकाश चूमता हुआ दिखाकर अतिशयोक्ति का विधान किया गया है !

18- वक्रोक्ति – *जहां किसी वाक्य में वक्ता के आशय से भिन्न अर्थ की कल्पना की जाती है , वहां वक्रोक्ति अलंकार होता है !*

👉 *इसके दो भेद होते हैं –*
(1 ) काकु वक्रोक्ति
(2) शलेष वक्रोक्ति ।

*1- काकु वक्रोक्ति – वहां होता है जहां वक्ता के कथन का कण्ठ ध्वनि के कारण श्रोता भिन्न अर्थ लगाता है ।*
👉जैसे –
मैं सुकुमारि नाथ बन जोगू ।

*2- शलेष वक्रोक्ति – जहां शलेष के द्वारा वक्ता के कथन का भिन्न अर्थ लिया जाता है !*
👉 जैसे –
को तुम हौ इत आये कहां घनस्याम हौ तौ कितहूं बरसो ।
चितचोर कहावत हैं हम तौ तहां जाहुं जहां धन है सरसों ।।

*19- अन्योक्ति – अन्योक्ति का अर्थ है अन्य के प्रति कही गई उक्ति ।*

👉 *इस अलंकार में अप्रस्तुत के माध्यम से प्रस्तुत का वर्णन किया जाता है !*
👉जैसे –
नहिं पराग नहिं मधुर मधु नहिं विकास इहि काल ।
अली कली ही सौं बिध्यौं आगे कौन हवाल ।।
*यहां भ्रमर और कली का प्रसंग अप्रस्तुत विधान के रूप में है जिसके माध्यम से राजा जयसिंह को सचेत किया गया है , अत: अन्योक्ति अलंकार है !*

जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय और रचनाएं

 🙇‍♂ जयशंकर प्रसाद

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🖌 परिचय
जन्म : 30 जनवरी 1889, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
भाषा : हिंदी
विधाएँ : कविता, उपन्यास, नाटक, निबंध, कहानी
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📚 मुख्य कृतियाँ
काव्य : झरना, आँसू, लहर, कामायनी, प्रेम पथिक
नाटक : स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, जन्मेजय का नाग यज्ञ, राज्यश्री, अजातशत्रु, विशाख, एक घूँट, कामना, करुणालय, कल्याणी परिणय, अग्निमित्र, प्रायश्चित, सज्जन
कहानी संग्रह : छाया, प्रतिध्वनि, आकाशदीप, आँधी, इंद्रजाल
उपन्यास : कंकाल, तितली, इरावती
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🔥 निधन
14 जनवरी 1937, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

हिन्दी साहित्य की परिभाषा और काल विभाजन

 हिंदी साहित्य / Hindi Sahitya:

1. हिंदी साहित्य क्या है?
हिंदी साहित्य क्या है तो हम आपको बता दें कि हिंदी साहित्य हिंदी की आत्मा है इसके बिना हिंदी का कोई भी अस्तित्व नहीं है आज हम जो हिंदी लिख पा रहे हैं उसके पीछे हिंदी साहित्य की अहम भूमिका है प्राचीन काल में केवल हिंदी बोली और समझी जाती थी लेकिन इसे लिखने के लिए हिंदी साहित्य की आवश्यकता थी और जैसे ही साहित्य का निर्माण हुआ हिंदी भाषा को लोगों के द्वारा लिखा जाने लगा और धीरे-धीरे इस भाषा को कई लोगों के द्वारा लिखा पढ़ा और समझा जाने लगाअन्य शब्दों में हम कह सकते हैं कि हिंदी साहित्य भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों है इसके बिना हमारी हिंदी बिल्कुल अधूरी है

2. हिंदी साहित्य की परिभाषा
हिंदी साहित्य का क्षेत्र काफी व्यापक है इसे शब्दों के माध्यम से बयान करना संभव नहीं है हालांकि हिंदी साहित्य की परिभाषा के बारे में संस्कृति के प्रमुख विद्यान कुंतक ने इसे परिभाषित करते हुए लिखा है
जब शब्द और अर्थ के बीच सुंदरता के लिए स्पर्धा लगी हो तो साहित्य की सृष्टि होती है केवल सिर्फ संस्कृतनिष्ठ या क्लिष्ट लिखना ही साहित्य नहीं है और न ही अनर्थक तुकबंदी साहित्य की श्रेणी में आती है।’
आसान शब्दों में हम समझे तो हिंदी साहित्य भाव हिना और अर्थहीन  हिंदी साहित्य नहीं है बल्कि इसके अंदर अर्थ और भाव को बहुत ही गहराई के साथ दर्शाया गया है और रचना को साहित्य की  कतार में लाने का भरसक प्रयास किया गया इसलिए हिंदी साहित्य हिंदी की आत्मा है इसके अभाव में हिंदी का सौंदर्य नीरस हो सकता है

3. हिंदी साहित्य का इतिहास और काल विभाजन :-
आज दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं है जिसका इतिहास ना हो इतिहास बीती हुई बातों का एक संजोया हुआ दर्पण होता है इसके माध्यम से हम अतीत के पलों के बारे में जान सकते हैं, ऐसे में हिंदी साहित्य के इतिहास के बारे में अगर हम बात करें तो इसका इतिहास 1000 साल पुराना है उस समय हिंदी संस्कृत भाषा थी जो पूरी तरह से शुद्ध नहीं थी

और इसे बोल पाना और समझना काफी कठिन आम लोगों के लिए होता था हालांकि आगे चलकर इस में अभूतपूर्व परिवर्तन भी आया और उस समय हिंदी का विकास तेजी के साथ हुआ हिंदी के विकास में कई काल खंडों का विवरण हिंदी साहित्य में किया गया है उन सभी काल खंडों का विवरण हम आपको नीचे दे रहे हैं आइए जानते –

1 आदिकाल –
आदि काल को हिंदी साहित्य का सबसे प्रारंभिक काल कहा जाता है आदिकाल का इतिहास 1400 ईस का पहले का पहले का समय माना जाता है इस समय हिंदी भाषा का उदय हुआ था इस काल में हिंदी भाषा पर  अपभ्रंश या अवहट्ट का प्रभाव  ज्यादा था आदि काल को हिंदी साहित्य का समृद्धि काल भी कहा जाता है |

2. भक्तिकाल-
भक्ति काल हिंदी साहित्य का गोल्डन काल कहा जाता है इसकी शुरुआत संत काव्य के माध्यमों से हुई थी महान संत तुलसीदास ने भक्ति काल की शुरुआत की थी उन्होंने इस समय सभी काव्य शास्त्र की रचना अवधी भाषा में की थी भक्ति काल का प्रमुख लक्ष्य भक्ति और धर्म का प्रचार करना था और इससे में जितने भी काव्या लिखे गए थे वह सभी भक्ति रस ओतप्रोत थे | भक्ति काल का समय खंड 1700 तक माना जाता है।

3. रीतिकाल-
रीति काल हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार का काल माना जाता है इस समय कवियों ने सिंगार अलंकार शब्द आदि के प्रयोग करने की जो प्रक्रिया है उसे शुरू किया था और इस काल का समय  1900 तक का काल माना जाता है  रीतिकाल के समय काल में भाषा की शुद्धता पर विशेष जोर दिया गया था

4. आधुनिक काल-
आधुनिक काल का उदय 1900 के  के बाद वादा इस काल को  भारतेन्दु काल भी कहा जाता है।  आधुनिक काल के समय कई भाषाओं का हिंदी में अनुवाद किया गया ताबे खंड का विभाजन भी आधुनिक काल के समय में हुआ था जिसमें कविता लेखन कहानी नाटक उपन्यास कथा पटकथा इत्यादि चीजें आधुनिक काल की देन है

4. हिंदी साहित्य के प्रकार
गद्य-  इसके अंतर्गत कई प्रकार के चीज जाते हैं जिसका विवरण हम आपको नीचे दे रहे हैं आइए जानते हैं
कहानी, उपन्यास, नाटक, कथा-पटकथा, निबंध, यात्रा विवरण, डायरी, संस्मरण, जीवनी, आत्मकथा, लेख, संपादकीय, भाषण आदि 

पद्य- पद्य को काव्य खंड कहां जाता है और इसके अंतर्गत कई प्रकार की चीजें सम्मिलित की गई है जिसका विवरण हम आपको नीचे दे रहे हैं
कविता, दोहे, गीत, नज़्म, गजल, शायरी आदि लिखे 

चंपू-
 चंपू साहित्य गद्य साहित्य और पद्य साहित्य का मिशन होता है यानी इसके अंतर्गत   गद्य और पद्य दोनों शामिल होते हैं वह चंपू साहित्य कहलाता है।

5. हिंदी साहित्य में क्या क्या आता है?
कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध, जीवनी, भाषण, कविता, शायरी, स्लोगन, कोट्स, संदेश |