शुक्रवार, 28 जून 2024

मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षकों पर आधारित कविता

 मध्यप्रदेश का अतिथि शिक्षक 

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हो गया आबंटन।

अब हो बाटांधार।।

पोर्टल से हटेंगे अब।

वारी वारी सबकी वारी।।‌

सियासत के गलियारों में।

फंसें सभी संगठन है।।

नेताओं की बातों में।

घर ना घाट बच पाए।।

मांगों का बना पुलंदा।

घर बैठने जातें हम।।

कलम छोड़ डंडा थामा था।

अब स्कूल छोड़ घर जाना है।

नये नये संगठन बना लिए।

नेता बनने के चक्कर में।।

एक नहीं अनेकों मांगे मांग रहे हैं।

दम नहीं है एक मांग पूरी करवानें की।।

भोला भाला अतिथि शिक्षक भटक रहा है।

इन नेताओं के संगठन के गलियारों में।।

दम नहीं है इनकी बातों में।

नेता और गधा की लातों में।

चुनाव पूर्व जो दम भरते अपने अपने नेताओं का।

वोट और सपोर्ट लेकर कहां विलुप्त हो गए हैं।।

कहते कुछ हैं करते कुछ है।

भुगत रहे हम सब करनी।।

ऐ नहीं मानेंगे तब तक।

जब सभी को घर विठा नहीं देते।।

फिर चलेगा चंदा चिट्ठा।

व्यवसाय फली भूत होगा।।

ज्ञान चंद और स्वार्थ परख में।

डूबा दिया अतिथि शिक्षक को।।

आस लगाए बैठे थे जिनसे।

विश्वास घात किया दम से।।

घर से निकलने समय नहीं है।

चपरासी बनने दौड़ लगा बैठे।।

घर बैठ व्हाटसोप के ज्ञान चंदों की कमी नहीं है।

घर से बाहर निकल आने में लोक लाज इन्हें आतीं हैं।।

जब वारी आतीं झुनझुना बजाने की।

फिर चिल चिल पो पो करते हैं।।

एक विश्व में जन्तु अनोखा देखा।

जो अतिथि शिक्षक म.प्र. कहलाता है।।

अजित जैन शास्त्रि 

टीकमगढ़ 

7000265886

9754682969

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