जीवन अनमोल है हम सब एक छोटी सी असफलता के पीछे अपनी जान दे बैठते हैं हमें इतना ख्याल नहीं होता! जिन बूढ़े मां-बाप लाठी बनकर कर सहारा देना था। उनके हर अरमानों जलती चिता पर जला कर राख कर दिया, हमें इतना भी ख्याल नहीं आता जो बचपन से लेकर आज तक ना जाने कितने कष्ट सहन किए होंगे । हमारी एक मुस्कान के पीछे जान तक निछावर कर देने के लिए तैयार है, उनके साथ हम पढ़े-लिखे होनहार विद्यार्थी इतनी बड़ी गलती कर बैठते हैं।
हर मां-बाप के सपने होते हैं, कि मेरा बेटा या बेटी कुछ करके दिखाएं , अपनी एक पहचान बनाएं परंतु हम एक छोटी सी यह सफलता के पीछे अभी जान दे बैठते हैं। मुझे लगता है ,हम सबके माता पिता हमारे सपने पूरे करने के लिए अपने सपने बिखेर देते हैं ।अपनी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी बच्चों की खुशियों मे कुर्बान कर देते हैं। और बच्चों से उल्टा उनको यह कुर्बानी प्राप्त होती है! जो कि जिंदगी भर के लिए कष्टदाई है! आज जितने भी महान पुरुष है, उन सभी की जिंदगी में डायरेक्ट सफलता नहीं मिली हर किसी की जिंदगी में सफलता और असफलता दोनों आती जाती है। एक असफलता के पीछे खुद की जान को दाव में लगाना सबसे बड़ी बेवकूफी है। जिंदगी मे सफलता प्राप्त करने के लिए कई बार असफल होना पड़ता है, और संघर्ष के साथ कठिन परिश्रम करने पर ही हमें सफलता प्राप्त होती है! मेरे कहने का मतलब यह है, हर किसी क्षेत्र में नकारात्मक और सकारात्मक,सफलता और असफलता दोनों संघर्ष के हर मोड़ पर नजर आएंगे। यदि हम कठिन परिश्रम और मेहनत करें तो सफलता निश्चय ही प्राप्त होगी... जब तक मंजिल प्राप्त ना हो तक लगातार प्रयत्न करना चाहिए एक असफलता में हार मानना विद्यार्थी के इतिहास में नहीं है... यदि आपके आस-पास ऐसे कोई मित्र हो या फैमिली मेंबर हो तो कृपया उनको समझाएं मोटिवेट करें! धन्यवाद ।
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