मंगलवार, 5 अगस्त 2025

IMPS क्या होता है?

 IMPS का मतलब Immediate Payment Service (इमीडिएट पेमेंट सर्विस) है, जिसे हिंदी में "तत्काल भुगतान सेवा" कहते हैं। यह भारत में बैंकों के बीच फंड ट्रांसफर करने का एक डिजिटल तरीका है।

यह सुविधा नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा शुरू की गई थी। IMPS की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 24x7 उपलब्ध है, यानी आप कभी भी, किसी भी समय, छुट्टियों के दिन भी तुरंत पैसे भेज और प्राप्त कर सकते हैं।

IMPS की मुख्य विशेषताएं

 * रियल-टाइम ट्रांसफर: IMPS के जरिए पैसे भेजते ही तुरंत दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में पहुँच जाते हैं।

 * 24x7 उपलब्धता: यह सेवा साल के 365 दिन, हर समय उपलब्ध रहती है, जिसमें बैंक की छुट्टियाँ भी शामिल हैं।

 * सुरक्षित: यह एक सुरक्षित माध्यम है और इसमें OTP (वन टाइम पासवर्ड) जैसी सुरक्षा सुविधाएँ होती हैं।

 * विभिन्न तरीके: आप IMPS का उपयोग कई तरीकों से कर सकते हैं:

   * मोबाइल नंबर और MMID: इसके लिए आपको लाभार्थी (जिसे पैसे भेजने हैं) का मोबाइल नंबर और 7 अंकों का MMID (मोबाइल मनी आइडेंटिफ़ायर) चाहिए होता है।

   * खाता नंबर और IFSC कोड: आप लाभार्थी के बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड का उपयोग करके भी पैसे भेज सकते हैं।

 * लेनदेन की सीमा: IMPS के जरिए एक दिन में ₹5 लाख तक का लेनदेन किया जा सकता है, हालाँकि, यह सीमा आपके बैंक पर भी निर्भर कर सकती है।

IMPS, NEFT और RTGS में अंतर

IMPS को अक्सर NEFT (National Electronic Funds Transfer) और RTGS (Real Time Gross Settlement) से तुलना की जाती है। इन तीनों में मुख्य अंतर नीचे दिए गए हैं:

 * IMPS: तुरंत फंड ट्रांसफर करता है, 24x7 उपलब्ध है, और छोटे से लेकर बड़े अमाउंट तक के लिए इस्तेमाल होता है।

 * NEFT: यह बैच (Batch) में काम करता है, इसलिए पैसे ट्रांसफर होने में कुछ समय लग सकता है। यह आमतौर पर बैंक के वर्किंग घंटों के दौरान उपलब्ध होता है।

 * RTGS: यह भी रियल-टाइम में पैसे ट्रांसफर करता है, लेकिन इसका उपयोग आमतौर पर बड़ी रकम (₹2 लाख या उससे ज़्यादा) के लिए होता है। यह भी बैंक के वर्किंग घंटों के दौरान ही उपलब्ध होता है।


NPCI क्या होता है?

 NPCI का मतलब नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India) है। यह भारत में रिटेल पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम्स को मैनेज करने वाली एक संस्था है।

NPCI से जुड़ी कुछ अहम बातें:

 * स्थापना: इसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और इंडियन बैंक्स' एसोसिएशन (IBA) की पहल पर 2008 में स्थापित किया गया था।

 * उद्देश्य: इसका मुख्य काम भारत में एक सुरक्षित, मजबूत और कुशल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है।

 * गैर-लाभकारी संगठन: NPCI एक गैर-लाभकारी संगठन (Not-for-Profit) के रूप में काम करता है।

 * मुख्य उत्पाद: NPCI ने कई लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

   * यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI): एक रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम जो तुरंत बैंकों के बीच फंड ट्रांसफर की सुविधा देता है।

   * रुपे (RuPay): भारत का अपना कार्ड पेमेंट नेटवर्क।

   * इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS): 24/7 तुरंत फंड ट्रांसफर करने की सेवा।

   * नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH): सैलरी, पेंशन और बिल पेमेंट जैसे बड़े ट्रांजैक्शन के लिए एक बल्क पेमेंट सिस्टम।

   * नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC): FASTag के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक टोल पेमेंट की सुविधा।

   * भारत बिलपे (BBPS): बिल पेमेंट के लिए एक एकीकृत (integrated) प्लेटफार्म।


रविवार, 6 जुलाई 2025

केंचुआ खेती के लाभ

 दोस्तो आज केंचुए के बारे में यहां कुछ बाते आपको बताने जा रहा हु  और उसके लाभ के  अलावा भी खेती में केंचुए के कई और भी फ़ायदे हैं जिनको आप आज जानेंगे 


मिट्टी की संरचना में सुधार: केंचुए मिट्टी को ढीला करते हैं और मिलाते हैं, जिससे मिट्टी की संरचना और जल निकासी में सुधार होता है. इससे कटाव और बाढ़ को रोकने में मदद मिलती है. 

 

पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है: केंचुए पौधों के मलबे और मिट्टी खाते हैं, जिससे मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ जाती है. 

 

खाद तैयार करते हैं: केंचुए खेत में मौजूद कार्बनिक पदार्थों को खाकर अच्छी गुणवत्ता वाली खाद तैयार करते हैं. इस खाद को वर्मीकॉम्पोस्ट कहते हैं. 

 

ट्रैक्टर से भी अच्छी जुताई करते हैं: केंचुए खेत में ट्रैक्टर से भी अच्छी जुताई कर देते हैं. 

 

मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता बढ़ाते हैं: केंचुओं से मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता बढ़ती है. 

 

बैक्टीरिया, शैवाल, प्रोटोजोआ, एक्टिनाइमिसिटी आदि की वृद्धि में मदद मिलती है. 

 

केंचुआ खाद से फसलों की उपज में 15-20% तक की वृद्धि होती है. 


यह खेत में दीमक एवं अन्य हानिकारक कीटों को नष्ट कर देता हैं। इससे कीटनाशक की लागत में कमी आती हैं। इसके उपयोग के बाद 2-3 फसलों तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनी रहती हैं। मिट्टी में केचुओं की सक्रियता के कारण पौधों की जड़ों के लिए उचित वातावरण बना रहता हैं, जिससे उनका सही विकास होता हैं।


दोस्तो आज की ये स्टोरी आपको कैसा लगा अपने कमेंट जरूर लिखें।

साभार 🙏

भारतीय संविधान के भाग

 Gs by Kiran kumar  sir 💐

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🟦 भारतीय संविधान के भाग ✍


♦️भारतीय संविधान के 22 भाग है


◾️भाग 1 - संघ और उनका राज्यक्षेत्र


◾️भाग 2 - नागरिकता


◾️भाग 3 -  मूल अधिकार


◾️भाग 4 - राज्य की नीति के निर्देशक तत्व

🔺4 (क) मूल कर्तव्य


◾️भाग 5 - संघ


◾️भाग 6 - राज्य


◾️भाग 7 - निकाल दिया गया निरस्त कर दिया गया


◾️भाग 8 - संघ राज्य क्षेत्र


◾️भाग 9 - पंचायत


🔺9 (क) नगर पालिकाए

🔺9 (ख) सहकारी समितियां


◾️भाग - 10 - अनुसूचित जाति, जनजातीय क्षेत्र 


◾️भाग 11 - संघ और राज्यों के बीच संबंध


◾️भाग - 12 - वित्त, संपत्ती, संविदाए और वाद


◾️भाग - 13 - भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम


◾️भाग - 14 - संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं

🔺14 (क) अधिकरण


◾️भाग 15 - निर्वाचन


◾️भाग 16 - कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध


◾️भाग 17 - राज्य भाषा


◾️भाग 18 - आपात उपबंध


◾️भाग 19 - प्रकीर्ण


◾️भाग 20 - संविधान का संशोधन


◾️भाग 21 - अस्थाई, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध


◾️भाग 22 - संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिंदी में प्राधिकृत पाठ और निरसन

आर्थिक सम्वृद्धि की परिभाषाएं

 


■ 2. आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth)

आर्थिक संवृद्धि से अभिप्राय आय अथवा उत्पादन में होने वाली दीर्घकालीन वृद्धि से है। आय अथवा उत्पादन के मूल्य में वृद्धि तब हो सकती है। 

(i) जब वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि हो तथा वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें स्थिर (Constant) रहे।

(ii) जब वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों में वृद्धि हो और वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन स्थिर (Constant) रहे। 'आर्थिक

संवृद्धि' से अभिप्राय पहले प्रकार के उत्पादन के मूल्य (Value of Output) में वृद्धि से है अर्थात् वह मूल्य (Value) जो बस्तुओं

तथा सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि के फलस्वरूप संभव होता है, जबकि वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमत स्थिर रहती हैं। इस प्रकार की संवृद्धि को ही वास्तविक संवृद्धि (Real Growth) कहा जाता है। इसका तात्पर्य है देश में वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रवाह में वृद्धि (It) implies increase in the flow of goods and services) | यदि देश की जनसंख्या स्थिर (Constant ) रहती है तब वास्तविक संवृद्धि का अर्थ है प्रतिब्यक्ति के लिए देश में वस्तुओं तथा सेवाओं की अधिक उपलब्धता।

■ परिभाषा ( Definition)

प्रो. मायर के अनुसार, "आर्थिक संवृद्धि वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी देश की प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में

दीर्घकालीन वृद्धि होती है।" (Economic growth may be defined as the process whereby the real per capita

income of the country increases over a long period of time - Meier)

प्रो. सालवाटोर के शब्दों में, "आर्थिक संवृद्धि वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी देश की प्रतिव्यक्ति उत्पादकता

निरन्तर बढ़ने के फलस्वरूप दीर्घकाल तक के लिए उस देश को प्रतिव्यक्ति वास्तविक कुल राष्ट्रीय आय उत्पाद में वृद्धि होती

है अथवा प्रतिव्यक्ति उत्पादकता में निरन्तर वृद्धि होने से आय में दीर्घकालीन वृद्धि होती है।" (Economic growth has been defined as the process whereby a country's real per capita gross national product (GNP) or

income increase over a sustained period of time through continuing increase in per capita productivity. Salvatore)

प्रो. पीटरसन के अनुसार, "आर्थिक संवृद्धि से अभिप्राय है वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रतिव्यक्ति वास्तविक उत्पादन में समय के साथ-साथ वृद्धि हो तथा अर्थव्यवस्था की वस्तुओं तथा सेवाओं की उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो।" (Economic growth involves an increase in overtime in the per capital actual output of goods and services as well

as an increase in the economy's capability to produce goods and services. - Peterson)

उपरोक्त परिभागओं के अनुसार आर्थिक संवृद्धि यह प्रक्रिया है जिसके फलस्वरूप देश में प्रतिव्यक्ति वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन प्रतिव्यक्ति वास्तविक कुल राष्ट्रीय उत्पाद अथवा प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में दीर्घकालीन वृद्धि होती है। इस संदर्भ में

निम्नलिखित बातों का स्पष्टीकरण आवश्यक है:

(i) वस्तुओं के परिमाण में होने वाली आकस्मिक वृद्धि (Occasional rise in the volume of output) को आर्थिक संवृद्धि नहीं कहा जा सकता। उदाहरण के लिए मान लो, किसी वर्ष, अच्छी वर्षा के कारण, कृषि उत्पादन में तो (उस विशेष वर्ष) वृद्धि हो जाती है, परन्तु आगामी वर्षों में कृषि उत्पादन कम हो जाता है तो इसे आर्थिक संवृद्धि नहीं कहा जाएगा। अतएव संवृद्धि की धारणा परिवर्तन के उस प्रवृत्ति पथ (Trend Path) को व्यक्त करती है जो समय के साथ-साथ वृद्धि की ओर अग्रसर हो, बेशक बीच में उत्पादन में थोड़ी-बहुत आकस्मिक गिरावट हो अथवा न हो।


शनिवार, 1 मार्च 2025

वर्तमान में अध्यक्ष और आयुक्त

 वर्तमान समय में आयुक्त या अध्यक्ष:



◽नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ::  संजय मूर्ति
◽मुख्य सूचना आयुक्त :: हीरालाल सामरिया

◽मुख्य चुनाव आयुक्त :: ज्ञानेश कुमार

◽ लोकसभा अध्यक्ष :: ओम बिरला
◽ राज्य सभा :: जगदीप धनखड़

◽चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया::  संजीव खन्ना


◽राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के प्रथम अध्यक्ष::  जस्टिस बालचंद्रन (बालकृष्ण ईराड़ी)

◽16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष :: अरविंद पनगढ़िया

◽वर्तमान में महान्यायवादी :: आर.वेंकटरमनी
◽राष्ट्रीय महिला आयोग:: विजय रहाटकर
◽राष्ट्रीय मानवअधिकार आयोग :: न्यायमूर्ति वी. रामा सुब्रह्मण्यम
◽राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग :: इकबाल सिंह लालपुरा

◽प्रथम लोकपाल:: पिनाकी चंद्र घोष
◽वर्तमान लोकपाल :: जस्टिस खानविलकर

 👉 भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ( सेबी ) के नये अध्यक्ष ::  तुहिन कांत पाण्डे

शनिवार, 15 फ़रवरी 2025

उत्पत्ति के आधार पर शब्द के भेद

 📚उत्पत्ति के आधार पर शब्द के भेद

उत्पत्ति के आधार पर शब्द के चार भेद होते हैं:
1. तत्सम शब्द
2. तद्भव शब्द
3. देशज शब्द
4. विदेशी शब्द

📚तत्सम शब्द :
तत् (उसके) + सम (समान) यानी ऐसे शब्द जिनकी उत्पत्ति संस्कृत भाषा में हुई ओर वे हिन्दी भाषा में बिना किसी परिवर्तन के प्रयोग में आने लगे, ऐसे शब्द तत्सम शब्द कहलाते हैं। जैसे: पुष्प, पुस्तक, पृथ्वी, क्षेत्र, कार्य, मृत्यु, कवि, माता, विद्या, नदी, फल, अग्नि, पुस्तक आदि।

📚तद्भव शब्द
ऐसे शब्द जिनकी उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई थी लेकिन वो रूप बदलकर हिन्दी में आ गए हों, ऐसे शब्द तद्भव शब्द कहलायेंगे। जैसे:
दुग्ध → दूध
अग्नि → आग
कार्य → काम
कर्पूर → कपूर
हस्त → हाथ

📚देशज शब्द
ऐसे शब्द जो भारत की विभिन्न स्थानीय बोलियों में से हिंदी में आ गए हैं, वे शब्द देशज शब्द कहलाते हैं। जैसे: पेट, डिबिया, लोटा, पगड़ी, थैला, इडली, डोसा, समोसा, चमचम, गुलाबजामुन, लड्डु, खटखटाना, खिचड़ी आदि। 
दिए गए सभी उदाहरण भारत की ही विभिन्न स्थानीय बोलियों में से क्षेत्रीय प्रभाव के कारण परिस्थिति व आवश्यकतानुसार बनकर प्रचलित हो गए हैं। ये अब हिन्दी में आ गए हैं। अतः यह शब्द देशज शब्द कहलायेंगे।

📚विदेशी शब्द
ऐसे शब्द जो भारत से बाहर की भाषाओं से हैं लेकिन ज्यों के त्यों हिन्दी में प्रयुक्त हो गए, वे शब्द विदेशी शब्द कहलाते हैं। मुख्यतः यह विदेशी जातियों से हमारे बढ़ते मिलन से हुआ है। ये विदेशी शब्द उर्दू, अरबी, फारसी,अंग्रेजी, पुर्तगाली, तुर्की, फ्रांसीसी, ग्रीक आदि भाषाओं से आए हैं। 
विदेशी शब्दों के उदाहरण निम्न हैं :
अंग्रेजी : कॉलेज, पैंसिल, रेडियो, टेलीविजन, डॉक्टर, लैटरबक्स, पैन, टिकट, मशीन, सिगरेट, साइकिल आदि
फारसी : अनार,चश्मा, जमींदार, दुकान, दरबार, नमक, नमूना, बीमार, बरफ, रूमाल, आदमी, चुगलखोर, आदि। 
अरबी : औलाद, अमीर, कत्ल, कलम, कानून, खत, फकीर, रिश्वत, औरत, कैदी, मालिक, गरीब आदि। 
तुर्की : कैंची, चाकू, तोप, बारूद, लाश, दारोगा, बहादुर आदि। 
पुर्तगाली : अचार, आलपीन, कारतूस, गमला, चाबी, तिजोरी, तौलिया, फीता, साबुन, तंबाकू, कॉफी, कमीज आदि। 
फ्रांसीसी : पुलिस, कार्टून, इंजीनियर, कर्फ्यू, बिगुल आदि। 
चीनी : तूफान, लीची, चाय, पटाखा आदि। 
यूनानी : टेलीफोन, टेलीग्राफ, ऐटम, डेल्टा आदि। 
जापानी : रिक्शा आदि।