बुधवार, 6 अगस्त 2025

सेंसर बोर्ड क्या होता है?

 सेंसर बोर्ड, जिसे आधिकारिक तौर पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (Central Board of Film Certification - CBFC) कहा जाता है, भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण निकाय है। इसका मुख्य काम यह सुनिश्चित करना है कि भारत में रिलीज होने वाली कोई भी फिल्म या टीवी कार्यक्रम सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त है या नहीं।

सेंसर बोर्ड के मुख्य कार्य

सेंसर बोर्ड का काम सिर्फ फिल्मों में से दृश्य या संवाद हटाना नहीं है, बल्कि उसके कई और महत्वपूर्ण काम हैं:

 * फिल्मों को प्रमाणित करना: सेंसर बोर्ड किसी भी फिल्म को उसकी सामग्री के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में सर्टिफिकेट देता है। ये सर्टिफिकेट बताते हैं कि फिल्म किस उम्र के दर्शकों के लिए उपयुक्त है।

 * प्रमाणन के प्रकार:

   * U (यूनिवर्सल): इसका मतलब है कि फिल्म सभी आयु वर्ग के लोग देख सकते हैं।

   * U/A (यूनिवर्सल/अडल्ट): इस तरह की फिल्मों को 12 साल से कम उम्र के बच्चे अपने माता-पिता के मार्गदर्शन में देख सकते हैं।

   * A (अडल्ट): ये फिल्में सिर्फ 18 साल या उससे ज़्यादा उम्र के दर्शक देख सकते हैं।

   * S (स्पेशल): ये सर्टिफिकेट सिर्फ खास तरह के दर्शकों के लिए होता है, जैसे डॉक्टर या वैज्ञानिक।

 * आपत्तिजनक सामग्री को हटाना: बोर्ड फिल्म के कंटेंट को ध्यान से देखता है और अगर उन्हें लगता है कि कोई दृश्य या संवाद समाज के लिए आपत्तिजनक, हिंसा को बढ़ावा देने वाला, या किसी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला है, तो वे उसे हटाने या संशोधित करने की सलाह देते हैं।

 * कानून का पालन सुनिश्चित करना: सेंसर बोर्ड यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी फिल्म सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 और उसके तहत बनाए गए नियमों का पालन करती है। बिना सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट के कोई भी फिल्म भारत में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की जा सकती।

संक्षेप में, सेंसर बोर्ड एक प्रहरी की तरह काम करता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि फिल्मों के जरिए जो सामग्री समाज तक पहुँच रही है, वह सुरक्षित और उपयुक्त हो।


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