शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2023

नैतिक शिक्षा प्रेरणादायक ( निजी विचार )

एक समय था जब हम अपनी मॉं को सर्वश्रेष्ठ गुरु और पिता को सर्वोत्तम आदर्श माना करते थे ।

आज बच्चे अपने ही मॉं-बाप को कमतर समझने लगे हैं । 

बच्चों में प्रारंभिक शिक्षा द्वारा प्रदत्त संस्कारों के अभाव की झलक साफ़ साफ़ दिखाई दे रही है और इसका दोष हमें अपने ऊपर लेना चाहिये । हमारे पास समय नहीं हैं बच्चों के लालन पालन का , हम किन्हीं किन्ही मजबूरियों के कारण उनके दादा - दादी से दूर उनकी परवरिश कर रहे हैं जबकि दादा - दादी ही मॉं -बाप के बाद प्रथम शाला होते हैं जो अब शन: शन: कब *थे * में परिणित हो गये पता ही नहीं चला। 

हम भौतिक संसाधनों को एकत्र करने और अप्राकृतिक आत्म विकास की होड़ में बहुत आगे निकल गये हैं और अपने जीवन के वास्तविक तत्वों को एक धूल के ग़ुबार की भाँति पीछे छोड़ आये हैं ।

इसी के दूरगामी परिणाम आज हमारे समक्ष मुँह बाये खड़े हैं कि बच्चों के संस्कारों को लेकर चिंतित हैं उनके दिशा भ्रमित होने की चिंता को लेकर रातों की नींद और दिन का चैन खो चुके हैं । 

सोच का गंभीर विषय है ।

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मेरा अपना मत है कृपया व्यक्तिगत अथवा अन्यथा क़तई ना लें ।

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