शुक्रवार, 30 जुलाई 2021

रहीमदास जी के दोहे

 दोस्तों आज हम आपके लिए रहीमदास के दोहे लेकर आए हैं , जो हिन्दी साहित्य में बहुत प्रसिद्ध है ।

           रहीमदास का जीवन परिचय 

रहीमदास का पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना था । इनका जन्म लाहौर में सन् 1556 में हुआ था । रहीम अरबी , फारसी , संस्कृत के अच्छे जानकार थे । रहीम , अकबर के दरबार में रहते थे । 

रहीमदास की रचनाएं -  रहीम सतसई , श्रृंगार सतसई , रास पंचाध्यायी ,रहीम रत्नावली आदि ।

रहीमदास के दोहे -

1. रहिमन धागा प्रेम का , मत तोड़ो चटकाय ।

  टूटे से फिर ना जुड़े , जुड़े गाॅंठ पड़ जाय ।।


2. रहिमन पानी राखिए , बिन पानी सब सून ।

    पानी गये न ऊबरै , मोती , मानुष , चून ।।


3. एकै साधै सब सधै , सब साधे सब जाय ।

    रहिमन मूलहिं सीचबों , फूलै फलै अघाय ।।


4. चित्रकूट में राम रहे , रहिमन अवध नरेश ।

   जा पर बिपदा पड़त है , सो आवत यह देश ।।


5. दीरघ दोहा अरथ के , आखर थोरे आहिं ।

   ज्यों रहीम नट कुण्डली , सिमहि कूदि चढ़ि जाहिं ।।


6. धनि रहीम जल पंक को , लघु जिय पिअत अघाय ।

   उदधि बड़ाई कौन है , जगत पिआसो जाय ।।


7. नाद रीझि तन देत मृग , नर धन हेत समेत ।

   ते रहीम पशु से अधिक , रीझेहु कछू न देत।।


8. बिगरी बात बनै नहीं , लाख करौ किन कोय ।

   रहिमन फाटे दूध को , मथे न माखन होय ।।


9. रहिमन देखि बड़ेन को , लघु न दीजिये डारि ।

   जहां काम आवे सुई , कहा करे तलवारि ।।


10. रहिमन निज संपत्ति बिना , कोउ न बिपत्ति सहाय ।

       बिन पानी ज्यों जलज को , नहिं रवि सके बचाय ।।


11. रहिमन पानी  राखिए , बिन पानी सब सून ।

पानी गए न ऊबरै , मोती , मानुष ,चून ।।

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