दोस्तों आज हम आपके लिए रहीमदास के दोहे लेकर आए हैं , जो हिन्दी साहित्य में बहुत प्रसिद्ध है ।
रहीमदास का जीवन परिचय
रहीमदास का पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना था । इनका जन्म लाहौर में सन् 1556 में हुआ था । रहीम अरबी , फारसी , संस्कृत के अच्छे जानकार थे । रहीम , अकबर के दरबार में रहते थे ।
रहीमदास की रचनाएं - रहीम सतसई , श्रृंगार सतसई , रास पंचाध्यायी ,रहीम रत्नावली आदि ।
रहीमदास के दोहे -
1. रहिमन धागा प्रेम का , मत तोड़ो चटकाय ।
टूटे से फिर ना जुड़े , जुड़े गाॅंठ पड़ जाय ।।
2. रहिमन पानी राखिए , बिन पानी सब सून ।
पानी गये न ऊबरै , मोती , मानुष , चून ।।
3. एकै साधै सब सधै , सब साधे सब जाय ।
रहिमन मूलहिं सीचबों , फूलै फलै अघाय ।।
4. चित्रकूट में राम रहे , रहिमन अवध नरेश ।
जा पर बिपदा पड़त है , सो आवत यह देश ।।
5. दीरघ दोहा अरथ के , आखर थोरे आहिं ।
ज्यों रहीम नट कुण्डली , सिमहि कूदि चढ़ि जाहिं ।।
6. धनि रहीम जल पंक को , लघु जिय पिअत अघाय ।
उदधि बड़ाई कौन है , जगत पिआसो जाय ।।
7. नाद रीझि तन देत मृग , नर धन हेत समेत ।
ते रहीम पशु से अधिक , रीझेहु कछू न देत।।
8. बिगरी बात बनै नहीं , लाख करौ किन कोय ।
रहिमन फाटे दूध को , मथे न माखन होय ।।
9. रहिमन देखि बड़ेन को , लघु न दीजिये डारि ।
जहां काम आवे सुई , कहा करे तलवारि ।।
10. रहिमन निज संपत्ति बिना , कोउ न बिपत्ति सहाय ।
बिन पानी ज्यों जलज को , नहिं रवि सके बचाय ।।
11. रहिमन पानी राखिए , बिन पानी सब सून ।
पानी गए न ऊबरै , मोती , मानुष ,चून ।।