रविवार, 16 मई 2021

चूहा , कछुआ और बिच्छू की प्रेरणादायक कहानी

एक नदी में बाढ़ आ जाती है ।छोटे से टापू में पानी भर जाता है। वहां रहने वाला सीधा साधा एक चूहा कछुवे से कहता है मित्र क्या तुम मुझे नदी पार करा सकते हो मेरे बिल में पानी भर गया है ?


कछुवा राजी हो जाता है तथा चूहे को अपनी पीठ पर बैठा लेता है


तभी एक बिच्छु भी बिल से बाहर आता है और कहता है मुझे भी पार जाना है मुझे भी ले चलो ।

चूहा बोला मत बिठाओ ये जहरीला है ये मुझे काट लेगा

तभी समय की नजाकत को भांपकर बिच्छू बड़ी विनम्रता से कसम खाकर प्रेम प्रदर्शित करते हुए कहता है भाई कसम से नही काटूंगा बस मुझे भी ले चलो।


कछुआ चूहे और बिच्छू को ले तैरने लगता है।

तभी बीच रास्ते मे बिच्छू चूहे को काट लेता है।

चूहा चिल्लाकर कछुए से बोलता है "मित्र इसने मुझे काट लिया अब मैं नही बचूंगा।


थोड़ी देर बाद उस बिच्छू ने कछुवे को भी डंक मार दिया। कछुवा मजबूर था जब तक किनारे पहुंचा चूहा मर चुका था।।


कछुआ बोला 

"मैं तो इंसानियत से मजबूर था तुम्हे बीच मे नही डुबोया" 

मगर तुमने मुझे क्यों काट लिया ?


बिच्छु उसकी पीठ से उतरकर जाते जाते बोला "मूर्ख तुम जानते नही मेरा तो धर्म ही है डंक मारना चाहे कोई भी हो।"

गलती तुम्हारी है जो तुमने मुझ पर विश्वास किया।


ठीक इसी तरह हमारे लोगों ने भी नदी पार करवाने के लिए कुछ बिच्छुओं को पीठ पर बिठा लिया है।


वे लगातार डंक मार रहे है हमारे लोगो को अगल कर रहे है और हमारी सारी ताकत को खत्म कर रहे है। 

कहानी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें ।


फलस्वरूप

हर रोज बेचारे निर्दोष बहुजन मर रहे हैं।


गहन विचार कीजिए अपनी आने वाली पीढ़ियों को ताकतवर बनाने के लिए खुद कार्य कीजिए और ज्यादा कुछ नहीं कर सकते तो बस ऐसे मैसेजो को बहुजनो तक पहुंचने का कार्य ही कर दीजिए ये भी एक योगदान ही होगा।।


धन्यवाद ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें