बुधवार, 26 मई 2021

प्रमुख पदाधिकारियों की सूची #नवीनतम_कौन_क्या ?

              पद                                      नाम


1) भारत के राष्ट्रपति                     ---  महामहिम रामनाथ कोविंद

2) भारत के उपराष्ट्रपति                ---  एम. वैकैया नायडू

3)भारत के मुख्य न्यायधीश           ----  एन.वी. रमन्ना

4) भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त   ----  सुशील चंद्रा

   अन्य निर्वाचन आयुक्त    ----          राजीव कुमार

5) अटॉर्नी जनरल [ भारत के महान्यायवादी ] --- के. के. वेणुगोपाल

6) भारत की सेना के अध्यक्ष :-
        थलसेना अध्यक्ष           ---  मनोज मुकुन्द नरवड़े

        जलसेना अध्यक्ष          ---  कर्मवीरसिहं(३१ मई से )

        वायुसेना अध्यक्ष          ---  राकेश सिहं भदौरिया ( १ अक्टूबर से )

         वायुसेना उपाध्यक्ष       ----  के. एस. भदौरिया


7) विदेश सचिव            -----    हर्षवर्धन श्रृंगला
8) रिजर्व बैक ऑफ इण्डिया के गवर्नर  ------ शक्तिकांत दास
9) आर्थिक सलाहकार                       ------  कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम्

10) संघ लोकसेवा आयोग ( upsc ) के अध्यक्ष --  प्रदीप जोशी

रविवार, 16 मई 2021

चूहा , कछुआ और बिच्छू की प्रेरणादायक कहानी

एक नदी में बाढ़ आ जाती है ।छोटे से टापू में पानी भर जाता है। वहां रहने वाला सीधा साधा एक चूहा कछुवे से कहता है मित्र क्या तुम मुझे नदी पार करा सकते हो मेरे बिल में पानी भर गया है ?


कछुवा राजी हो जाता है तथा चूहे को अपनी पीठ पर बैठा लेता है


तभी एक बिच्छु भी बिल से बाहर आता है और कहता है मुझे भी पार जाना है मुझे भी ले चलो ।

चूहा बोला मत बिठाओ ये जहरीला है ये मुझे काट लेगा

तभी समय की नजाकत को भांपकर बिच्छू बड़ी विनम्रता से कसम खाकर प्रेम प्रदर्शित करते हुए कहता है भाई कसम से नही काटूंगा बस मुझे भी ले चलो।


कछुआ चूहे और बिच्छू को ले तैरने लगता है।

तभी बीच रास्ते मे बिच्छू चूहे को काट लेता है।

चूहा चिल्लाकर कछुए से बोलता है "मित्र इसने मुझे काट लिया अब मैं नही बचूंगा।


थोड़ी देर बाद उस बिच्छू ने कछुवे को भी डंक मार दिया। कछुवा मजबूर था जब तक किनारे पहुंचा चूहा मर चुका था।।


कछुआ बोला 

"मैं तो इंसानियत से मजबूर था तुम्हे बीच मे नही डुबोया" 

मगर तुमने मुझे क्यों काट लिया ?


बिच्छु उसकी पीठ से उतरकर जाते जाते बोला "मूर्ख तुम जानते नही मेरा तो धर्म ही है डंक मारना चाहे कोई भी हो।"

गलती तुम्हारी है जो तुमने मुझ पर विश्वास किया।


ठीक इसी तरह हमारे लोगों ने भी नदी पार करवाने के लिए कुछ बिच्छुओं को पीठ पर बिठा लिया है।


वे लगातार डंक मार रहे है हमारे लोगो को अगल कर रहे है और हमारी सारी ताकत को खत्म कर रहे है। 

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फलस्वरूप

हर रोज बेचारे निर्दोष बहुजन मर रहे हैं।


गहन विचार कीजिए अपनी आने वाली पीढ़ियों को ताकतवर बनाने के लिए खुद कार्य कीजिए और ज्यादा कुछ नहीं कर सकते तो बस ऐसे मैसेजो को बहुजनो तक पहुंचने का कार्य ही कर दीजिए ये भी एक योगदान ही होगा।।


धन्यवाद ।

बुधवार, 12 मई 2021

समझदार बैल की प्रेरणादायक कहानी #चतुरबैल की कहानी

एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया | 

वह बैल घंटों ज़ोर-ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं ? 

काफी सोच विचार के बाद अंततः उसने निर्णय लिया कि बैल चूँकि अब काफी बूढा हो चुका है अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं है इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिए |

किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी | 

जैसे ही बैल की समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह और जोर - जोर से चीखकर कर रोने लगा और फिर, अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया | 

सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह यह देखकर आश्चर्य से सन्न रह गया...अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था | 

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे-वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एक सीढी ऊपर चढ़ आता जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह बैल कुएँ के किनारे पर पहुँच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया |


 ध्यान रखे आपके जीवन में भी बहुत तरह से मिट्टी फेंकी जायेगी बहुत तरह की गंदगी आप पर गिरेगी जैसे कि, आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही आपकी आलोचना करेगा | कोई आपकी सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला बुरा कहेगा | कोई आपसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो आपके आदर्शों के विरुद्ध होंगे... 

ऐसे में आपको हतोत्साहित हो कर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हर तरह की गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख ले कर उसे सीढ़ी बनाकर बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है | इस मनुष्य जीवन में हमें तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | जीवन में बहुत सारे उतार चढ़ाव आते हैं उनसे विचलित नही होना चाहिए | तमाम बधाओं को पार करते हुए आगे बढ़ते चले जाना है | अपना मनोबल कभी गिरने नही देना है अपना हौसला हमेशा बुलंद रखो |


               सकारात्मक रहे..... सकारात्मक जिए !


√इस संसार में.....

                         सबसे बड़ी सम्पत्ति "बुद्धि "

                         सबसे अच्छा हथियार "धैर्य"

                         सबसे अच्छी सुरक्षा "विश्वास"

                         सबसे बढ़िया दवा "हँसी" है

             और आश्चर्य की बात कि "ये सब निशुल्क है.....  

            

    



सांप और वैद्य की प्रेरणादायक कहानी

एक बार की बात है, एक गाँव में एक वैद्यजी रहते थे। 

वैद्यजी के पास कभी - कभार कोई मरीज आता था क्योंकि उस गाँव में ज्यादातर लोग बीमार नहीं पड़ते थे। 

इससे वैद्यजी की आजीविका में बहुत समस्या आती थी। 

एक दिन वैद्यजी अपनी झोपड़ी से बाहर निकले और एक पेड़ के नीचे जाकर बैठे। तभी उन्हें उस पेड़ के कोटर में एक सांप दिखाई दिया। 

वैद्यजी सोचने लगे कि अगर यह सांप किसी को काट खाए तो कितना अच्छा हो। मैं उसे ठीक करके अच्छा खासा धन कमा सकता हूँ।

तभी वैद्यजी की नजर सामने खेल रहे बच्चों पर पड़ी। उन्होंने बच्चो के पास जाकर कहा.. देखो ! बच्चों उस पेड़ के कोटर में मिट्टू मिया बैठे है। 

बच्चे तो बच्चे होते है, उनमें से एक बच्चा दौड़ा और सीधे जाकर कोटर में हाथ डाल दिया। संयोग से सांप की मुण्डी उसके हाथ में आ गई। 

जैसे ही उसने बाहर निकाला तो डर के मारे उछाल दिया। नीचे अन्य बच्चों के साथ वैद्यजी खड़े थे। 

सांप सीधा वैद्यजी के ऊपर आकर गिरा और कई जगह डस लिया। तड़पते हुयें वैद्यजी की जान निकल गई।

इसलिए कहते है.. "कर बुरा तो हो बुरा”


शिक्षा – दोस्तों ! इसलिए मनुष्य को हमेशा दूसरों का भला सोचना चाहिए, और भला ना हो सके तो कमसे कम बुरा तो नहीं सोचना चाहिए। 

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शुक्रवार, 7 मई 2021

बुद्ध कथा प्रेरणादायक # कहानी

 #बुद्धकथा#

 

एक बार नदी को अपने पानी के प्रचंड प्रवाह पर घमंड हो गया ।  नदी को लगा कि मुझमें इतनी ताकत है कि मैं पहाड़, मकान, पेड़, पशु, मानव आदि सभी को बहाकर ले जा सकती हूँ। 

एक दिन नदी ने बड़े गर्वीले अंदाज में समुद्र से कहा - बताओ! मैं तुम्हारे लिए क्या-क्या लाऊँ ? मकान, पशु, मानव, वृक्ष जो तुम चाहो, उसे मैं जड़ से उखाड़़कर ला सकती हूँ। 

समुद्र समझ गया कि नदी को अहंकार हो गया है, उसने नदी से कहा - यदि तुम मेरे लिए कुछ लाना ही चाहती हो, तो थोड़ी सी घास उखाड़कर ले आओ। 


नदी ने कहा बस इतनी सी बात, अभी लेकर आती हूँ। नदी ने अपने जल का पूरा जोर लगाया, पर घास नहीं उखड़ी, नदी ने कई बार जोर लगाया, लेकिन असफलता ही हाथ लगी। 


आखिर नदी हारकर समुद्र के पास पहुँची और बोली मैं वृक्ष, मकान, पहाड़ आदि तो उखाड़़कर ला सकती हूँ। मगर जब भी घास को उखाड़ने के लिए जोर लगाती हूँ, तो वह नीचे की ओर झुक जाती है और मैं खाली हाथ ऊपर से गुजर जाती हूँ। समुद्र ने नदी की पूरी बात ध्यान से सुनी और मुस्कुराते हुए बोला -  जो पहाड़ और वृक्ष जैसे कठोर होते हैं, वे आसानी से उखड़ जाते हैं । किन्तु घास जैसी विनम्रता जिसने सीख ली हो, उसे प्रचंड आँधी-तूफान या प्रचंड वेग भी नहीं उखाड़ सकता। 


 जीवन में खुशी का अर्थ लड़ाइयाँ लड़ना नहीं, बल्कि उनसे बचना है। कुशलता पूर्वक पीछे हटना भी अपने आप में एक जीत है, क्योंकि अभिमान फरिश्तों को भी शैतान बना देता है और नम्रता साधारण व्यक्ति को भी फरिश्ता बना देती है।

लेखक -  किरण कुमार बौद्ध


💐💐   नमों बुद्धाय जय भीम  💐💐



बुद्धजी की प्रेरणादायक समाज को जागरूक करने वाली कथा #बुद्धकथा

 #बुद्धकथा#

एक बार तथागत बुद्ध अपने शिष्यों के साथ जा रहे थे । रास्ते में कुछ गड्ढे खुदे पड़े थे । और उनके अंदर नर कंकाल पड़े थे।

 उनको देखकर बुद्ध के शिष्य ने पूछा - "तथागत, इन गड्ढों में ये नर कंकाल क्यों पड़े हैं?" 

तथागत चुप रहे ।

फिर कुछ दूर चलने के बाद वहाँ पर भी गड्ढों में नर कंकाल पड़े मिले।

 तथागत के शिष्य ने फिर पूछा, "तथागत, इन गड्ढों में नर कंकाल क्यों पड़े हैं?" 

तथागत बुद्ध ने कहा, "इन लोगों को प्यास लगी थी, इन लोगों ने कुआँ खोदना चाहा, लेकिन ये लोग अलग-अलग कुआँ खोदने में लग गए और कुआँ खोदते-खोदते ही मर गए । न तो उनको पानी मिला, न ही इनकी प्यास बुझी । यदि ये लोग एक साथ मिलकर एक कुआँ खोदते तो कुआँ भी खुदता, शक्ति भी कम लगती, इनकी प्यास भी बुझती और ये जिंदा भी रहते।

आज ठीक इसी तरह  समाज के लोग अलग-अलग लड़ रहे हें और अपनी शक्ति को नष्ट कर रहे हैं। जिससे उनकी समस्यायें खत्म होने की बजाय बढ़ती जा रही हैं।  इसलिये एक साथ मिलकर लड़िये अन्यथा वही होगा जो उपरोक्त कुआँ खोदने वालों का हुआ।

 जय भीम नमो बुद्धाय ।

लेखक - किरण कुमार बौद्ध " बुलबुल भैया "