बुधवार, 28 अप्रैल 2021

शेर और कुत्ते की प्रेरणादायक कहानी

 

एक बूढ़ा शेर और एक जवान शेर मे गहरी दोस्ती थी ।दोनों हर वक्त साथ में रहते थे। मिलकर शिकार करना घूमना और मस्ती करना यह उनका काम था। पूरे जंगल मे उनकी दोस्ती की चर्चा थी , लेकिन एक दिन दोनों के बीच एक छोटी सी बात को ले कर टकराव हो गया और दोस्ती टूट गई । दोनों अलग हो गए , दुश्मनी इतनी बढ़ी कि अब एक दूसरे  का चहेरा देखना भी पसंद नहीं करते थे ।
एक दिन बूढ़े शेर पर जंगली कुत्तों ने हमला कर दिया । शेर बूढ़ा था , कमजोर था, इसलिए कुत्ते उसे नोचने लगे । बूढ़ा शेर थक चुका था । अब उनका कमजोर शरीर उनका साथ नही दे रहा था ।



तब दूर खड़ा उनका जवान शेर उनको बचाने आ गया । वो दहाड़ कर बोला तुम डरना नहीं मै तुम्हारे साथ हूं । जवान शेर कुत्तो पर टूट पड़ा । उनका गुस्सा देख कर कुत्ते भाग खड़े हुए । बूढ़े शेर को बचाने के बाद जवान शेर वहां से जा ने लगा । तब एक तीसरे शेर ने उनको आवाज़ दी और उनको रोका । जवान शेर रुका ।
तीसरे शेर ने जवान शेर को पूछा कि एक बात बताओं तुम्हारी और बूढ़े शेर की तो दोस्ती टूट चुकी है तुम दोनों तो दुश्मन हो फिर भी तुमने बूढे शेर की जान क्यों बचाई? तब जवान शेर ने जवाब दिया । आपस की दुश्मनी अलग बात है लेकिन जब बात कौम या समाज हो तो उठकर मुकाबला करना चाहिए । अगर ऐसा नही करेंगे तो कुत्ते हम पर राज करेंगे और ये मुझे मंजूर नहीं है ।

अतः मेरे प्यारे आंबेडकरवादी दोस्तों वक़्त है, जाग जाइए । तुम शेर हो और तुम पर कुत्ते इसीलिए राज करते है क्योंकि तुम मे  जवान शेर जैसी सोच नहीं है।
आपने इस कहानी को पढ़ने में इतना समय दिया , इसके लिए हम आपके आभारी हैं ।

लेेखक -  किरण कुमार बौद्ध

सभी दोस्तों को जय भीम नमो बुद्धाय 🙏🙏

बुधवार, 21 अप्रैल 2021

अच्छे कर्म और बुरे कर्म _ शिक्षाप्रद कहानी


एक दिन एक राजा ने अपने तीन मन्त्रियो को दरबार में  बुलाया, और  तीनो  को  आदेश  दिया  के  एक - एक  थैला  ले  कर  बगीचे  में  जाएं  , और वहां  से  अच्छे - अच्छे  फल  (fruits ) जमा  करें ।

वो  तीनो  अलग - अलग  बाग़  में   गए ,


पहले  मन्त्री  ने  कोशिश  की  के  राजा  के  लिए  उसकी पसंद  के  अच्छे  अच्छे  और  मज़ेदार  फल  जमा  किए जाएँ , उस ने  काफी  मेहनत  के  बाद  बढ़िया और  ताज़ा  फलों  से  थैला  भर  लिया ।


दूसरे मन्त्री  ने  सोचा  राजा  हर  फल  का परीक्षण  तो करेगा नहीं , इस  लिए  उसने  जल्दी  जल्दी  थैला  भरने  में  ताज़ा , कच्चे , गले  सड़े फल  भी  थैले  में  भर  लिए ।🍏


तीसरे  मन्त्री  ने  सोचा  राजा  की  नज़र  तो  सिर्फ  भरे  हुवे थैले  की  तरफ  होगी  वो  खोल  कर  देखेगा  भी  नहीं  कि  इसमें  क्या  है , उसने  समय बचाने  के  लिए  जल्दी  जल्दी  इसमें  घास , और  पत्ते  भर  लिए  और  वक़्त  बचाया ।


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दूसरे  दिन  राजा  ने  तीनों मन्त्रियो  को  उनके  थैलों  समेत  दरबार  में  बुलाया  और  उनके  थैले  खोल  कर  भी  नही देखे  और  आदेश दिया  कि , तीनों  को  उनके  थैलों  समेत  दूर  स्थान के एक जेल  में  ३  महीने  क़ैद  कर  दिया  जाए .




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अब  जेल  में  उनके  पास  खाने  पीने  को  कुछ  भी  नहीं  था  सिवाए  उन  थैलों  के ।

तो  जिस मन्त्री ने  अच्छे  अच्छे  फल  जमा  किये  वो  तो  मज़े  से  खाता  रहा  और  3 महीने  गुज़र  भी  गए ,


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फिर  दूसरा  मन्त्री जिसने  ताज़ा , कच्चे  गले  सड़े  फल  जमा  किये  थे,  वह कुछ  दिन  तो  ताज़ा  फल  खाता  रहा  फिर  उसे  ख़राब  फल  खाने  पड़े , जिस  से  वो  बीमार  होगया  और  बहुत  तकलीफ  उठानी  पड़ी ।


और  तीसरा मन्त्री  जिसने  थैले  में  सिर्फ  घास  और  पत्ते  जमा  किये  थे  वो  कुछ  ही  दिनों  में  भूख  से  मर  गया ।

अब  आप  अपने  आप  से  पूछिये  कि  आप  क्या  जमा  कर  रहे  हो  ? 🤔❓


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आप  इस समय जीवन के  बाग़  में  हैं , जहाँ  चाहें  तो  अच्छे कर्म जमा  करें ..

चाहें  तो बुरे कर्म ,

मगर याद रहे जो आप जमा करेंगे वही आपको आखरी समय काम आयेगा ।


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कहानी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें। 

धन्यवाद